
बसंत पंचमी को मां सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस दिन माता की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। बसंत पंचमी को प्रकृति का उत्सव भी कहा जाता है क्योंकि इस दौरान चारों ओर पीले फूल खिलते हैं, सरसों के खेत लहराते हैं और बसंती रंग नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण से बसंत पंचमी के दिन मुख्य रूप से पीले रंग के वस्त्र धारण किए जाते हैं और पीले रंग की चीजें जैसे पीले फूल और पीला भोग माता को अर्पित करना चाहिए। बसंत पंचमी को विद्यारंभ, यानी बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत के लिए भी सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा कर छात्र अपने जीवन में एकाग्रता, स्मरण शक्ति और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। बसंत पंचमी के पर्व को लेकर गूगल ट्रेंड्स में भी कई सवाल पूछे जा रहे हैं। बसंत पंचमी कब है? पूजा की सही विधि क्या है? बसंत पंचमी का महत्व क्या है? बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है? ऐसे कई सवालों के सही जवाब जानने के लिए हमने ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से बात की। आइए आपको बताते हैं इसके बारे में विस्तार से।
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल बसंत पंचमी 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी। बसंत पंचमी माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है और इस साल यह तिथि 23 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन चंद्रमा मीन राशि में गोचर करेंगे और गुरु ग्रह के साथ मिलकर गजकेसरी योग का निर्माण करेंगे।
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इस साल बसंत पंचमी पर गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 23 जनवरी 2026 को चंद्रमा मीन राशि में रहेंगे और गुरु ग्रह के साथ शुभ दृष्टि संबंध बनाएंगे। ज्योतिष के अनुसार, इस तरह की घटना गजकेसरी योग का कारण बनती है। गजकेसरी योग सभी राशि के जातकों के जीवन में प्रभाव तो डालता ही है साथ ही व्यक्ति को बुद्धिमान और उच्च पद प्राप्त करने वाला भी बनाता है। मान्यता है कि यदि आप इस योग में पूजा करते हैं, विद्या का आरंभ करते हैं और किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं तो उसमें सफलता जरूर मिलती है।
बसंत पंचमी का पर्व मुख्य रूप से माता सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। माता सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, वाणी और रचनात्मकता की देवी के रूप में पूजा जाता है और उनके अवतरण दिवस को ही बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इसी वजह से ही बसंत पंचमी के दिन मुख्य रूप से माता सरस्वती की पूजा विधि के साथ की जाती है और बुद्धि और ज्ञान की कामना की जाती है। यह पर्व मुख्य रूप से विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए विशेष माना जाता है और इस दिन छात्र-छात्राएं माता सरस्वती से ज्ञान का आशीर्वाद लेते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से और बसंत पंचमी का भोग अर्पित करने से माता की पूर्ण कृपा बनी रहती है जिससे जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैलता है। इस दिन की गई सरस्वती पूजा से व्यक्ति की बुद्धि तीव्र होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है जिससे पढ़ाई और करियर में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। इसी वजह से बसंत पंचमी पर स्कूल, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में विशेष रूप से सरस्वती पूजा का आयोजन किया जाता है।

यदि आप विधि पूर्वक करना चाहती हैं, तो बसंत पंचमी की पूजा सामग्री का चुनाव ठीक से करना जरूरी होता है। यहां जानें पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और पूजा की सही विधि के बारे में-
बसंत पंचमी पर पीले रंग के वस्त्र पहनने का महत्व बहुत ज्यादा है। पीला रंग ज्ञान, समृद्धि, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यह रंग माता सरस्वती को अत्यंत प्रिय होता है और बसंत ऋतु में खिलने वाले सरसों के फूलों का भी प्रतीक होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग भगवान सूर्य का प्रिय रंग होता है और सूर्य की किरणें जिस प्रकार अंधकार का विनाश करती हैं उसी तरह यह मनुष्य के हृदय में बसी हुई बुरी भावनाओं को भी नष्ट करती हैं। इसी वजह से ही बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी पीले रंग को अत्यंत शुभ माना जाता और यह रंग व्यक्ति को मनोबल प्रदान करने वाला होता है। पीले रंग के वस्त्र धारण करने से जीवन में सफलता मिलती है एकाग्रता और और मानसिक प्रगति होती है। इसी वजह से बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है।
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बसंत पंचमी को विद्यारंभ संस्कार के लिए सबसे उत्तम दिन माना जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखवाए जाते हैं, जिसे अक्षर-अभ्यास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिक्षा की शुरुआत करने से बच्चा बुद्धिमान, संस्कारी और ज्ञानवान बनता है। यही नहीं कला और संगीत से जुड़े लोग भी इस दिन अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेते हैं, जिससे उन्हें सफलता मिल सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। इसी वजह से इस दिन शिक्षा का आरंभ करना बच्चों के भविष्य के लिए शुभ माना जाता है। यही नहीं इस दिन यदि आप करियर में सफलता के उपाय करती हैं तो भविष्य में इसके शुभ परिणाम मिलते हैं।

बसंत पंचमी का पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं होता है बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व बसंत ऋतु का आगमन, प्रकृति में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। बसंत पंचमी को प्रकृति का उत्सव कहा जाता है। इस समय प्रकृति स्वयं बसंती रंगों में सजने लगती है। पेड़ों पर नई कोपलें, रंग-बिरंगे फूल और चारों ओर फूलों की खुशबू इस ऋतु के आगमन का संदेश देती है। इस दिन बच्चों का विद्यारंभ संस्कार कराना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि बसंत पंचमी स्वयं अबूझ मुहूर्त होती है, इसलिए इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त का विचार किए हुए विवाह, शिक्षा की शुरुआत, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
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