
सूर्य ग्रहण एक ऐसी खगोलीय घटना मानी जाती है जिसका ज्योतिष में भी बहुत प्रभाव होता है। ज्योतिष और धर्म दोनों के अनुसार सूर्य ग्रहण का जीवन में अलग तरह का प्रभाव होता है। ऐसा माना जाता है कि जब सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य ग्रहण होता है। इसे ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक देता है, तब सूर्य ग्रहण बनता है। इस अवधि को शास्त्रों में सामान्य समय से अलग माना जाता है और विशेष नियमों वाला समय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान आपको पूजा-पाठ करने से मन किया जाता है और ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान आपको भोजन भी नहीं करना चाहिए। पूजा पाठ के साथ कई और ऐसे काम हैं जो ग्रहण की अवधि में करने से मना किया जाता है। अक्सर हमारे मन में एक सवाल यह भी उठता है कि क्या सूर्य ग्रहण के दौरान आपको सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए? इस सवाल का उत्तर जानने के लिए हमने ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से बात की। आइए जानें इस प्रश्न के जवाब के बारे में विस्तार से।
ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति सूर्य को नियमित जल देता है तो उसके जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना अच्छी सेहत, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मानसिक शांति भी मिलती है। यही नहीं अगर आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर हो तो इसे मजबूत करने के लिए सूर्य को नियमित जल देने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य को नियमित जल देना अत्यंत शुभ माना जाता है और सलाह दी जाती है कि यदि आप तांबे के लोटे में जल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें तो इसके प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि सूर्य ग्रहण की पूरी अवधि में आपको सूर्य को सीधे नहीं देखना चाहिए, अन्यथा इसके नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। इसी वजह से यदि आप इस अवधि में सूर्य को अर्घ्य देती हैं तो यह स्वीकार्य नहीं माना जाता है। ऐसा करना शास्त्रों और ज्योतिष दोनों के अनुसार अच्छा नहीं माना जाता है। हालांकि इसके स्थान पर आप सूर्य के मंत्रों का जाप कर सकती हैं और सूर्य की ग्रहण से मुक्ति की प्रार्थना भी कर सकती हैं। सूर्य को ग्रहण की अवधि के दौरान अर्घ्य देने से इसके अशुभ फल मिल सकते हैं।
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ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण एक विशेष खगोलीय घटना है और इस दौरान सूर्य का प्रकाश आंशिक या पूर्ण रूप से कम हो जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण काल में राहु-केतु का प्रभाव भी सक्रिय हो जाता है, जिससे आस-पास का वातावरण भी नकारात्मक होने लगता है। इसी वजह से ग्रहण को साधारण अवधि नहीं माना जाता है और इस दौरान खान-पान, यात्रा, शुभ कार्य और सामान्य पूजा-पाठ की मनाही होती है। ग्रहण काल से लेकर सूतक काल तक को अशुभ समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ शुभ काम करने से मना किया जाता है।

सूर्य को हमेशा उस समय अर्घ्य देने की सलाह दी जाती है तब उसकी ऊर्जा अपने चरम पर हो। ग्रहण के दौरान सूर्य की ऊर्जा कम हो जाती है और इसका तेज ढका हुआ होता है, इसलिए अर्घ्य देने से मना किया जाता है। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय हो जाती है, इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान नियमित देव पूजन और अर्घ्य जैसे कर्म अस्थायी रूप से रोक दिए जाते हैं।
अगर आप भी सूर्य को नियमित रूप से अर्घ्य देती हैं, तो इस दौरान आपको सूर्य को अर्घ्य नहीं देना चाहिए। हालांकि यदि ग्रहण दोपहर 12 बजे से पहले समाप्त हो रहा है तो आपको ग्रहण के समापन के बाद सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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