
हिंदू धर्म में मां सरस्वती को विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी माना जाता है। विशेष रूप से विद्यार्थियों, कलाकारों और नौकरीपेशा लोगों के लिए मां सरस्वती की कृपा अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर हम पूरी श्रद्धा के साथ पूजा तो करते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं जो शास्त्रों के अनुसार वर्जित मानी गई हैं। मान्यताओं के अनुसार, अगर सरस्वती पूजा के नियमों का पालन न किया जाए तो इसका नकारात्मक प्रभाव हमारी एकाग्रता और करियर की प्रगति पर पड़ सकता है। करियर में आने वाली बाधाओं को दूर करने और मां का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा के सही तरीकों को जानना बेहद जरूरी है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं सरस्वती पूजा के दिन क्या करें क्या नहीं?
मां सरस्वती को सात्विकता और शांति का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा में काले, गहरे नीले या बहुत ज्यादा भड़कीले रंगों के कपड़े पहनने से बचना चाहिए। सरस्वती पूजा के लिए सबसे शुभ रंग पीला या सफेद माना जाता है। पीला रंग ज्ञान और ऊर्जा का प्रतीक है, इसलिए कोशिश करें कि पूजा के दिन पीले वस्त्र धारण करें और मां को भी पीले फूल ही अर्पित करें। रंगों का यह चुनाव आपके मन में सकारात्मक विचार लाता है।

सरस्वती पूजा के दिन अपनी किताबों, पेन, वाद्य यंत्रों या कला से जुड़ी चीजों का अपमान बिल्कुल न करें। बहुत से लोग पूजा के दौरान इन्हें फर्श पर इधर-उधर छोड़ देते हैं। नियम के अनुसार, पूजा के दिन इन चीजों को मां के चरणों में रखना चाहिए और उनकी भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन पढ़ाई से ब्रेक लेने की परंपरा है, लेकिन अपनी अध्ययन सामग्री को गंदे हाथों से छूना या उन पर पैर लगाना करियर में बाधाएं उत्पन्न कर सकता है।
मां सरस्वती वाणी की भी देवी हैं। पूजा के दिन या सामान्य रूप से भी अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है। इस दिन किसी को अपशब्द कहना, झूठ बोलना या घर में झगड़ा करना मां सरस्वती को रुष्ट कर सकता है। जिस घर में कलह होती है या जहां वाणी का दुरुपयोग होता है, वहां बुद्धि और विवेक का वास नहीं होता। अपनी वाणी को मधुर रखें ताकि करियर में आपकी नेटवर्किंग और संबंध बेहतर बने रहें।

पूजा वाले स्थान और अपने कमरे की सफाई का विशेष ध्यान रखें। किताबों की अलमारी में धूल जमी होना या फटी हुई किताबों को अव्यवस्थित रखना नकारात्मकता फैलाता है। साथ ही, सरस्वती पूजा के दिन मांस, मदिरा या लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। सादा और सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और बुद्धि तेज होती है जो आपके प्रोफेशनल जीवन के लिए बहुत आवश्यक है।
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कई बार लोग जल्दबाजी में पूजा की आरती या मंत्रों को अधूरा छोड़ देते हैं। पूजा हमेशा शांत मन से और पूरे विधान के साथ करनी चाहिए। इसके अलावा, पूजा के बाद इस्तेमाल की गई सामग्री या पुरानी मूर्तियों को कहीं भी अपमानजनक तरीके से न फेंकें। उन्हें सम्मानपूर्वक जल में प्रवाहित करें या किसी पेड़ के नीचे रखें। नियमबद्ध तरीके से की गई पूजा आपके आत्मविश्वास को बढ़ाती है और करियर के रास्ते में आने वाली अड़चनों को कम करती है।
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