
हमारे देश में कोई भी त्योहार बहुत ही विधि विधान के साथ मनाया जाता है। इन्हीं व्रत और पर्वों में से एक है बसंत पंचमी का शुभ पर्व। इस दिन को माता सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है और किसी भी शुभ काम की शुरुआत के लिए इसी दिन को विशेष माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त होता है और इसमें कोई भी शुभ काम जैसे शादी-विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन संस्कार, बिजनेस की शुरुआत के लिए इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है। भारत की सांस्कृतिक परंपराओं में बसंत पंचमी का विशेष स्थान है। यह पर्व ऋतु परिवर्तन का संकेत तो देता ही है और जीवन में नई ऊर्जा, नई शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन यदि छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार किया जाता है तो उन्हें जीवन में कभी भी असफलता नहीं मिलती है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें विद्यारंभ संस्कार क्या होता है और इसका महत्व क्या होता है।
हिंदू धर्म में सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है, जिनमें से एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है विद्यारंभ संस्कार। इसका अर्थ यह होता है कि बच्चे को औपचारिक रूप से शिक्षा के लिए तैयार कराना। कुछ स्थानों पर इसे अक्षर ज्ञान, अक्षर अभ्यास या शिक्षा आरंभ संस्कार भी कहा जाता है। ज्योतिष की मानें तो इस संस्कार के माध्यम से बच्चे के मन में यह भाव स्थापित किया जाता है कि विद्या केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन की सबसे पवित्र साधना है और सभी के लिए अत्यंत आवश्यक भी है। यही नहीं इस संस्कार का उद्देश्य यह होता है कि भविष्य में बच्चे को कभी कोई परेशानी न हो और उसका शिक्षण अच्छी तरह चलता रहे।

शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन ही माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था और इस दिन को माता सरस्वती के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब सृष्टि में नीरसता, सन्नाटा और जड़ता थी, तब माता सरस्वती के प्रकट होने से ज्ञान, वाणी और चेतना का संचार हुआ था। इसलिए यह दिन किसी भी नए काम की शुरुआत के लिए तो अत्यंत शुभ होता ही है और ज्ञान की शुरुआत के लिए भी सर्वोत्तम समय माना जाता है। बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, इसका मतलब यह है कि इस दिन किसी विशेष मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। बच्चों को अक्षर ज्ञान देना, नई पढ़ाई शुरू करना या किसी नई स्किल की शुरुआत करना इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
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बसंत पंचमी का संबंध पीले रंग से होता है। पीला रंग उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन को बसंत ऋतु की शुरुआत का समय माना जाता है जिसमें खेतों में सभी ओर पीले फूल खिलते हैं। ऐसे में पीले रंग को बसंत पंचमी के लिए विशेष माना जाता है और इसी दिन पीले वस्त्र पहनकर माता सरस्वती की पूजा की जाती है। पीले रंग को मन और बुद्धि को सक्रिय करने वाला भी माना जाता है और इससे व्यक्ति की सीखने की क्षमता बढ़ती है। यही नहीं माता सरस्वती को पूजन में पीले फल, फूल और मिठाइयां भी चढ़ाई जाती हैं। यदि आप भी विद्यारंभ संस्कार के दौरान बच्चे रंग के वस्त्र पहनाती हैं तो माता सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

यदि आप बच्चे का विद्यारंभ संस्कार घर पर करना चाहती हैं तो सबसे पहले बच्चे को पीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठकर घी का दीपक जलाएं और उनकी प्रिय वस्तुएं जैसे पीले फूल और पीली मिठाई अर्पित करें। इस दिन बच्चे की केवल स्लेट ही नहीं बल्कि उसकी पहली कलम और किताब की भी पूजा की जाती है। यदि बच्चा पहली बार लिखना शुरू कर रहा है तो बच्चे की उंगली पकड़कर केसर की स्याही से या सूखे चावलों पर ओम या श्री लिखवाएं। यदि बच्चा स्लेट में लिख रहा है तो उसमें भी ॐ या श्री लिखकर बच्चे की शिक्षा की शुरुआत करें।
| Basant Panchami Date | Basant Panchami Daan | Saraswati Puja Samagri List |
| Saraswati Puja Niyam | Maa Saraswati Aarti | Saraswati Puja Mantra |
| Saraswati Puja Upay | Maa Saraswati Chalisa | Maa Saraswati Puja Vidhi |
यदि आप बसंत पंचमी के दिन बच्चे का विद्यारंभ संस्कार करती हैं तो उसके शुभ फल बच्चे को सदैव दिखाई देते हैं और उसे जीवन के हर मोड़ पर सफलता ही मिलती है। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें और ऐसे अन्य आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें अपनी साइट हरजिंदगी के साथ।
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