Tue Mar 3, 2026 | Updated 03:23 AM IST
does the method of funeral change if someone dies during lunar eclipse

Chandra Grahan 2026: क्या चंद्र ग्रहण में मृत्यु होने पर बदल जाता है अंतिम संस्कार का तरीका?

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगेगा। शास्त्रों में ग्रहण काल को अशुभ माना गया है। साथ ही, इस समय अवधि में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसके बारे में भी बताया गया है। हालांकि कई ऐसी परिस्थितियां होती हैं जिनपर हमारा कोई जोर नहीं जैसे कि मृत्यु। अगर ग्रहण में मृत्यु हो जाए तब क्या करना चाहिए? 
Editorial
Updated:- 2026-03-02, 15:31 IST

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण को एक विशेष ध्यात्मिक घटना माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है जिसके कारण इस समय सूतक के कड़े नियमों का पालन किया जाता है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु चंद्र ग्रहण के दौरान हो जाती है तो परिवार के मन में अंतिम संस्कार को लेकर कई दुविधाएं और प्रश्न पैदा होते हैं। क्या ग्रहण के साये में शव का दाह संस्कार किया जा सकता है? क्या शास्त्र इसकी अनुमति देते हैं? यह जानना बेहद जरूरी है क्योंकि अंतिम संस्कार का उद्देश्य आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति कराना होता है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या समय का गलत चयन आत्मा की शांति में बाधा डाल सकता है। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से। 

क्या ग्रहण काल में दाह संस्कार वर्जित है?

शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण के सूतक काल या ग्रहण की अवधि के दौरान दाह संस्कार करना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। माना जाता है कि ग्रहण के समय यमलोक के द्वार और दैवीय शक्तियां एक विशेष स्थिति में होती हैं।

अगर इस नकारात्मक समय में अग्नि संस्कार किया जाए तो जीवात्मा को कष्ट हो सकता है और उसे उत्तम गति प्राप्त करने में बाधा आती है। इसलिए, अगर किसी की मृत्यु ग्रहण के दौरान होती है तो शव को सुरक्षित रखा जाता है और ग्रहण समाप्त होने की प्रतीक्षा की जाती है।

kya chandra grahan mein kar sakte hain antim sanskar

ग्रहण समाप्त होने के बाद की प्रक्रिया

जैसे ही चंद्र ग्रहण समाप्त होता है और मोक्ष काल आता है, उसके बाद ही अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की जाती है। लेकिन सीधे दाह संस्कार नहीं किया जाता। सबसे पहले पूरे घर और उस स्थान की शुद्धि की जाती है जहां शव रखा गया है। गंगाजल का छिड़काव करना अनिवार्य होता है ताकि ग्रहण की नकारात्मकता दूर हो सके। इसके बाद ही शव को अंतिम यात्रा के लिए ले जाया जाता है।

यह भी पढ़ें- Chandra Grahan Date 2026: 2 या 3 मार्च, कब है साल का पहला चंद्र ग्रहण? सही तिथि सहित जानें सूतक लगने का समय

पंचक और ग्रहण का विशेष मेल

कई बार चंद्र ग्रहण के साथ-साथ 'पंचक' का नक्षत्र भी लगा होता है। अगर ग्रहण और पंचक दोनों एक साथ हों, तो अंतिम संस्कार के नियम और भी कड़े हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में दाह संस्कार से पहले आटे या कुश के पांच पुतले बनाकर उनका भी शव के साथ विधि-विधान से पूजन और दाह किया जाता है। यह प्रक्रिया परिवार के अन्य सदस्यों को दोष से बचाने और मृतक की आत्मा को शांति दिलाने के लिए की जाती है।

chandra grahan ke dauran antim sanskar karna sahi ya galat

सूतक काल में क्या करें?

सूतक काल में जब तक ग्रहण समाप्त नहीं होता तब तक परिवार के सदस्य मृतक के पास बैठकर भगवत गीता का पाठ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं। यह वातावरण को शुद्ध रखता है और जीवात्मा को संबल प्रदान करता है।

ग्रहण के बाद नदी में स्नान करना या घर में शुद्धिकरण के बाद ही अग्नि संस्कार की अग्नि प्रज्वलित की जाती है। शास्त्रों में स्पष्ट है कि धैर्य और शुद्धि के साथ किया गया अंतिम संस्कार ही मोक्षदायी होता है।

यह भी पढ़ें- फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया, इस पेड़ की पूजा से बढ़ेगा धन और घर आएंगी मां लक्ष्मी

अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।   

image credit: herzindagi 

यह विडियो भी देखें

Herzindagi video

Disclaimer

हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।

;