
मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली व्रत है जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से इस दिन का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह शिव और शक्ति के मिलन की रात मानी जाती है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन व्रत रखने और मध्यरात्रि में महादेव की पूजा करने से जीवन के सभी कठिन संघर्ष समाप्त हो जाते हैं और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साल 2026 में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रियां न केवल पूजा-अर्चना के अवसर हैं बल्कि ये साल की शुरुआत से ही महादेव का सानिध्य प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि साल 2026 में कब-कब पड़ रही हैं मासिक शिवरात्रि और क्या है शुभ मुहूर्त?
| महीना | तिथि | मासिक शिवरात्रि नाम | निशिता काल पूजा मुहूर्त |
| जनवरी | 16 जनवरी | माघ शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 12:04 से 12:58 |
| फरवरी | 15 फरवरी | फाल्गुन शिवरात्रि (महाशिवरात्रि) | रात 12:09 से 01:01 |
| मार्च | 17 मार्च | चैत्र शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 12:05 से 12:54 |
| अप्रैल | 16 अप्रैल | वैशाख शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 11:58 से 12:44 |
| मई | 15 मई | ज्येष्ठ शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 11:56 से 12:40 |
| जून | 14 जून | आषाढ़ शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 12:01 से 12:42 |
| जुलाई | 13 जुलाई | श्रावण शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 12:07 से 12:48 |
| अगस्त | 11 अगस्त | भाद्रपद शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 12:05 से 12:48 |
| सितंबर | 10 सितंबर | आश्विन शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 11:54 से 12:40 |
| अक्टूबर | 9 अक्टूबर | कार्तिक शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 11:43 से 12:31 |
| नवंबर | 8 नवंबर | मार्गशीर्ष शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 11:39 से 12:30 |
| दिसंबर | 8 दिसंबर | पौष शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष) | रात 11:46 से 12:40 |
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शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति नियमपूर्वक मासिक शिवरात्रि का व्रत करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत सुयोग्य वर प्राप्ति में सहायक माना जाता है जबकि विवाहित महिलाएं इसे अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए रखती हैं।

इस दिन विशेष रूप से 'निशिता काल' यानी मध्यरात्रि की पूजा का महत्व है क्योंकि मान्यता है कि इसी समय भगवान शिव पृथ्वी पर विचरण करते हैं।
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध, शहद और बेलपत्र अर्पित करना चाहिए। इस दिन 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना सबसे सरल और उत्तम फलदायी है।
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शाम के समय फलाहार करें और अगले दिन चतुर्दशी तिथि समाप्त होने के बाद व्रत का पारण करें। ध्यान रखें कि पूजा में कभी भी तुलसी के पत्ते या हल्दी का प्रयोग न करें।
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