
हिंदू धर्म में सालभर में बहुत सारे त्योहार आते हैं, मगर कुछ बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। अक्षय तृतीया को आखा तीज भी कहा जाता है। सालभर में आने वाली कई प्रमुख तीजों में से एक अक्षय तृतीया का नाम होता है। अक्षय तृतीया का दिन श्री हरि विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन को बहुत ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। खासतौर पर इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं, जो घर में सुख और समृद्धि लेकर आते हैं।
इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 को मनाया जाएगा या फिर 20 को। इस पर हमारी बातचीत पंडित एंव ज्योतिषाचार्य सौरभ त्रिपाठी से हुई। वह कहते हैं, " अक्षय तृतीया हमेशा वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ बताया गया है और इस दिन आबुझ मुहूर्त रहता है। आप कोई भी शुभ काम कर सकती हैं और किसी भी नए काम की शुरुआत कर सकती हैं। इस दिन शादी, मुंडन और गृह प्रवेश आदि भी किए जा सकते हैं। इतना ही नहीं, आप सोना-चांदी या कोई नया वाहन भी खरीद सकती हैं।"
पंडित जी हमें आगे जानकाीर देते हुए बताते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किसी मुहूर्त पर पूजा होगी और यह तिथि कितने बजे से कितने बजे तक रहेगी।
इस बार अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इसी दिन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पड़ रही है। यह तिथि 19 अप्रैल रविवार को सुबह 10 बजकर 50 मिनट पर शुरू होकर 20 अप्रैल सोमवार को सुबह 7 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। इस दिन आप श्री हरी विष्णु भगवान और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा कर सकती हैं और दान-पुण्य के लिए भी अक्षय तृतीया का दिन बहुत ही शुभ माना गया है। आप इस दिन किसी नई वस्तु की खरीदारी कर सकती हैं। विशेष रूप से आप सोना-चांदी या फिर कोई नया वाहन आदि खरीद सकती हैं।
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अक्षय तृतीया के दिन आप सुबह उठकर स्नान करके तिथि शुरू होने के साथ-साथ ही पूजा कर सकती हैं। पंडित जी बताते हैं, "कई लोग जो इस दिन सुबह पूजा नहीं कर पाते हैं, वे शाम को प्रदोष काल में भी पूजा कर सकते हैं।" वहीं दूसरी तरहफ अक्षय तृतीया के दिन आप दोपहर 3:00 से रात 10:00 बजे तक कभी भी पूजा कर सकती हैं। इस दिन अभिजीत मुहूर्त पर अपने पितृों को तर्पण देना भी बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन आप जल में काले तिल डालकर सूर्यो को भी जल चढ़ा सकती हैं, इससे आपके घर में सुख और समृद्धि का प्रवेश होता है।
अक्षय तृतीया मनाए जाने के पीछे बहुत सारे कारण है। इस दिन भगवान श्री हरी विष्णु के अवतार परषुराम का जन्म हुआ था। वहीं बताया जाता है कि इस सतयुग का समापन और त्रेता युग का आरंभ हुआ था। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इसी दिन गंगा स्वर्ग लोक से पृथवी लोक में आई थीं। इन सभी कारणों के कारण इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है और अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है।
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