
स्नेहा के मां-बाप उसकी शादी पैसों के लिए एक ऐसे आदमी से करवाने जा रहे थे, जो न चल सकता था और न ही बोल सकता था। पूरे दिन बिस्तर पर रहने वाले लड़के के साथ स्नेहा किसी भी हाल में शादी नहीं करना चाहती थी, इसलिए उसने शादी के लिए लड़का ढूंढना शुरू कर दिया। वो चाहती थी कि किसी भी लड़के से बस कॉन्ट्रैक्ट बेस पर शादी कर ले, ताकि उसके घर वाले ऐसे आदमी से उसकी शादी न करवाएं। इसके लिए उसने अपने दोस्तों को भी काम पर लगा लिया। बहुत ढूंडने के बाद भी उसे कोई नहीं मिल पा रहा था। शादी का दिन भी नजदीक आते जा रहा था, तभी एक दिन वो मार्केट में शॉपिंग करने के लिए निकली थी, तभी उसकी नजर एक लड़के पर पड़ी।
लड़का एक दुकानदार के साथ झगड़ा कर रहा था, क्योंकि उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। लड़का हाथ जोड़कर दुकानदार के सामने घुटनों पर बैठा हुआ था।
वह गिड़गिड़ाते हुए बोल रहा था मालिक मेरी मां बीमार है। अगर आप मुझे नौकरी से निकाल दोगे तो मैं उनका इलाज कैसे करवाऊंगा, लेकिन दुकानदार बहुत ज्यादा गुस्से में था। उसने मोहन को धक्का देते हुए कहा - निकल जा यहां से, तू रोज मेरा नुकसान करता है, मैं अब तुझे काम पर नहीं रख सकता।

मोहन अब हार चुका था, सड़क पर सब रुक रुक कर ये नजारा देखने लग रहे थे, लेकिन कोई भी उसकी मदद करने नहीं आया।
तभी स्नेहा ने सोचा, लड़का दिखने में अच्छा है और इसे पैसों की भी जरूरत है, अगर मैं इसे कॉन्ट्रैक्ट बेस शादी की बात करूंगी तो ये मान सकता है।
इस बात को सोचकर स्नेहा उसके पीछे पीछे पैदल चलने लगी।
कुछ देर चलने के बाद मोहन एक चाय की टपरी पर रुक गया। वहां उसने चाय मांगते हुए कहा - काका एक कप छोटी चाय देदो।
मोहन को उदास देखकर काका ने पूछा, क्या हुआ मोहन इतने निराश क्यों हो।
Mohan ने दुखी मन से कहा - मुझे नौकरी से मालिक ने निकाल दिया। अब पता नहीं मेरी मां का इलाज मैं कैसे करूंगा?

काका ने मोहन के सिर पर हाथ रखते हुए कहा - बेटा सब ठीक हो जाएगा, एक रास्ता बंद होता है तो हमेशा भगवान दूसरा रास्ता खोल देते हैं।
तभी स्नेहा वहां पहुंच गई, उसने काका से कहा - अंकल यहां किसी को काम की जरूरत हो तो मुझे बताना। मैं एक ड्राइवर ढूंढ रही हूं।
ये सुनते हुए काका और मोहन की आंखों में चमक आ गई। काका ने कहा - अरे बेटा तुम सही जगह आई हो। उसने मोहन को हाथ मारते हुए कहा - अरे कुछ बोलेगा , तुझे नौकरी चाहिए या मुझे।
मोहन ने तुरंत चाय टेबल पर रखते हुए घबराते हुए कहा - हां मैडम , मैं कर लूंगा
स्नेहा ने कहा - कल सुबह 9 बजे सेक्टर 21 के मकान नंबर १२ में आ जाना, काम के बारे में मैं समझा दूंगी।
स्नेहा ने अपनी दोस्त के घर मोहन को बुलाया था। वह अगले दिन सुबह 9 बजे से पहले ही उसके घर पहुंच गया।
कपड़ों का कॉलर ठीक करते और घबराते हुए उसने दरवाजा खटखटाया। स्नेहा ने घर का दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए बोली - आओ मोहन ,जल्दी आ गए तुम तो। चलो कोई नहीं , आओ बैठो।

मोहन हाथ जोड़ते हुए नीचे बैठने लगा, तभी स्नेहा ने तुरंत बोला - अरे अरे नीचे क्यों बैठ रहे हो, सोफे पर बैठो, मोहन घबरा गया।
स्नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा - अरे इतना क्यों डर रहे हो तुम, मैं तुम्हें बस ऊपर बैठने को कह रही हूं।
मोहन खुद को संभालते हुए , सोफे पर एक किनारे पर बैठ गया।
इसके बाद स्नेहा ने पूछा पानी लोगे, मोहन ने कहा - नहीं कुछ नहीं बस आप मुझे काम के बारे में बता दो।
स्नेहा बोली - नहीं ड्राइवर का काम तो नहीं है, ये सुनकर मोहन घबरा गया, उसे लगा के स्नेहा ने किसी और को रख लिया है।
उसने हाथ जोड़ते हुए कहा, मैडम प्लीज ऐसा मत करो मुझे कम की बहुत जरूरत है।
स्नेहा ने कहा - इसके बदले तुम्हें मेरा दूसरा काम करना होगा।
मोहन ने कहा - क्या करना होगा मैडम।
स्नेहा ने तुरंत कहा , शादी.. मोहन घबरा गया और सोफे से खड़ा हो गया।
तभी उसका दोस्त कमरे से बाहर आया और हाथ पकड़ते हुए बिठाने लगा।
भाई पहले बात तो सुन ले।
स्नेहा ने फिर कहा - मोहन तुम्हे मुझसे शादी करनी है , 1 साल के लिए कॉन्ट्रैक्ट बेस शादी करनी है।
इसके बदले मैं तुम्हारी मां का इलाज भी करवाऊंगी और घर का खर्च भी उठाऊंगी।
ये जो लड़का तुम देख रहे हो ये मेरा ब्वॉयफ्रेंड है। बस 1साल के लिए तुम्हें ये नाटक करना है। कॉन्टेक्ट खत्म होने पर बदले में तुम्हें मैं 2 लाख रुपए भी दूंगी।
अब बताओ तुम्हें मेरी शर्त मंजूर है। मोहन ने कहा - इतना कुछ समझने के लिए प्लीज मुझे 1 दिन का तो समय दीजिए।
स्नेहा ने कहा - ठीक है , कल इसी टाइम पर आ जाना। देखो ये तुम्हारे लिए बहुत अच्छा ऑफर है, बाकी जो तुम्हारा फैसला हो।
मोहन ने हाथ जोड़ते हुए स्नेहा और उसके बॉयफ्रेंड को धन्यवाद किया और वहां से निकल गया।
स्नेहा के घर से निकलने के बाद पूरे रास्ते बस उसके दिमाग में यही चल रहा था कि क्या करना चाहिए। लेकिन घर पहुंचने के बाद उसका रवैया पूरी तरह से बदल गया। मां को देखते ही वो खुशी खुशी खिलखिला कर बात कर रहा था। उसने मां से कहा - आपने दवाई खाई ।
मां ने बोला बेटा दवाई खत्म हो गई थी। मोहन ने कहा - अरे मां आपको पहले बताना चाहिए था न।
मां ने कहा - बस कर बेटा मेरे ऊपर अपनी सारी कमाई लगा दे रहा है, मैं ठीक फिर भी नहीं हो रहीं हूं। अब मुझे दवाई नहीं खानी।
मोहन ने कहा - मां मैं आपके लिए नहीं तो किसके लिए कमाऊंगा।
मोहन ने कहा - आप आराम करो मैं दवाई लेकर आता हूं।
मोहन पास के मेडिकल स्टोर पर गया - उसने बोला भैया ये दवाई दे दो, मां की दवाई खत्म हो गई है।
दुकानदार ने कहा - मोहन पहले पिछले पैसे लेकर आ , हर बार तुझे मुफ्त में दवाई देने के लिए दुकान नहीं खोली है। पैसे नहीं है तो निकल जा यहां से, कुछ नहीं मिलेगा तुझे।

मोहन को समझ नहीं आ रहा था कि अब वो कहां से पैसे लाए। उसके पास 200 rs थे और कोई नौकरी भी नहीं थी।
पैसों के लिए उसने पड़ोसियों से भी मदद मांगी, लेकिन किसी ने उसे पेस नहीं दिए। आखिर उसको अब केवल एक ही सहारा नजर आ रहा था।
उसने फैसला कर लिया कि वो स्नेहा से कॉन्टेक्ट बेस शादी करेगा, ताकि उसकी मां का इलाज हो जाए।
वह रात 8 बजे ही स्नेहा के घर पहुंच गया।
यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।
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