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delhi haunted bus mystery 20 passengers disappeared fiction story part 1

दिल्ली की वो 'भूतिया' बस; 20 यात्रियों के साथ जो सालों पहले गायब हुई थी, आज भी उसी रूट पर दौड़ती हुई आती है नजर; आंचल जब उस रात ऑफिस से निकली थी तो...

दिल्ली की इस बस को लेकर हर कोई अफवाह समझता था, लेकिन एक दिन सच में आंचल नाम की एक लड़की ने इस बस को जाते देखा। बस दिखने में साफ थी, लेकिन उस दिन उसके साथ जो हुआ, इस बात की किसी को उम्मीद भी नहीं थी।
Editorial
Updated:- 2026-03-13, 20:10 IST

आंचल ऑफिस से निकल ही रही थी, तभी बॉस का मैसेज आ गया- ‘’आज काम ज्यादा है, तुम्हे 11 बजे तक रुकना होगा।’’ मैसेज देखकर गुस्से में बौखलाई आंचल फिर से वापस आई और बैग सीट पर फेंकते हुए कहती है- रोज का हो गया है, ये भी कोई बात होती है? पूरे दिन काम करने के बाद हम रात में समय पर घर भी नहीं जा पाते। हर दिन मैं घर लेट पहुंचती हूं। काम नहीं हुआ है, तो नए लोग क्यों नहीं हायर करते। हमें परेशान करके रख दिया है। आंचल सीट पर बैठे-बैठ बड़बड़ा ही रही थी, तभी पीछे से आवाज आई- क्या हो गया आंचल? क्यों इतना गुस्सा कर रही हो, तुम्हें पता है रोज ही ऐसा होता है, तो इस बात से नाराज होने की क्या जरूरत है। आंचल ने गुस्से में अपनी चेयर पीछे की और करते हुए कहा- तुम्हें क्या है, तुम तो बॉस के चमचे हो, तुम्हारा तो जब मन करता है आते हो, हमारे साथ ऐसा नहीं है न। हम 25 हजार कमाने वाले लोगों की मेहनत तुम्हें क्यों दिखाई देगी। ये बोलते हुए आंचल कान में इयरफोन लगाती है और सिस्टम में काम करने लगती है। आंचल से इतनी डांट खाने के बाद उसके टीम मेट मोहित का मुंह उतर जाता है,वह अपना बैग उठाता है और सीधा घर के लिए निकल जाता है।

Hindi horror story

आंचल काम करते हुए मन ही मन सोच रही होती है। जल्दी से अपना काम खत्म कर लेती हूं, वरना 11 बजे वाली बस भी निकल जाएगी। आंचल पूरी कोशिश करती है, लेकिन काम करते-करते लेट हो जाता है और उसे 11:30 बज जाते हैं। आंचल- अरे यार इतना लेट हो गया, अब तो केवल 12 बजे वाली बस ही बची है, सब जा चुके हैं, अगर 12 बजे वाली बस नहीं मिली, फिर तो मैं घर जा ही नहीं पाऊंगी। ऐसा करती हूं, कैब बुक कर लेती हूं। आधे घंटे में तो कैब आ जाएगी और मैं घर भी पहुंच जाऊंगी। अगर मैं 12 बजे वाली बस का इंतजार करूंगी, तो फिर तो मुझे बहुत लेट हो जाएगा।

आंचल फोन खोलती है और ऑनलाइन कैब बुक करने लगती है। बार-बार वह लोकेशन एड करके कैब बुक करने की कोशिश करती है, लेकिन कैब बुक ही नहीं होती। तभी सामने से एक कार आती नजर आती है। कार उसके सामने से गुजरती है और आगे जाकर रुक जाती है। आंचल कार रुकते हुए देखती है, तो सड़क से थोड़ा पीछे हो जाती है। वह लगातार कैब बुक करने की कोशिश करती है, लेकिन कैब बार-बार कैंसिल हो जाती है, तभी लाल रंग की कार पीछे बैक होने लगती है।

Mysterious bus journey

आंचल समझ जाती है कि कुछ गड़बड़ है, वह वापस ऑफिस के गेट की तरफ मुड़ रही होती है, तभी पीछे से आवाज आती है। मैडम कहां जाना है? मैं छोड़ दूं आपको? आंचल- भैया मैंने आपसे मदद मांगी? अगर मैंने आपसे मदद नहीं मांगी है, तो आप खुद से क्यों आ रहे हैं। आंचल को गुस्से में देख कार वाला आदमी भी घबरा जाता है, वह डरते हुए कहता है… ठीक है..ठीक है। इतना गुस्सा करने की क्या जरूरी है, आजकल भलाई का जमाना ही नहीं है, ये बोलते ही वह अपनी गाड़ी तेज चलाकर निकल जाता है। आंचल- हां तो किसने कहा भलाई करने को..बिना मेतलब मदद करने आ जाते हैं, जब मदद की जरूरत होती है, तब तो कोई नहीं आता। एक तो 12 बज गए हैं और कोई कैब बुक नहीं हुई। पता नहीं बस कहां रह गई है, बस के आने का टाइम भी तो हो गया है।

तभी दूर से उसे हॉर्न की आवाज आई, आंचल खुश हो गई- चलो बस आ रही है, मुझे तो लगा ऑफिस में ही रात गुजारनी पड़ेगी। आंचल बस के आने पर हाथ हिलाने ही वाली थी, तभी बस अपने आप आकर उसके सामने रुक गई। आंचल ने मन ही मन सोचा- कमाल हो गया है, आज अपने आप ही बस रुक गई। आज तो हर कोई मुझपर मेहरबान हो रहा है। आंचल ने बस की खिड़कियों की तरफ देखा। बस में बहुत सारे लोग बैठे थे।

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आंचल- क्या बात है, रात के 12 बजे भी इतने सारे लोग बस से सफर करते हैं। बड़ी हैरानी की बात है, लगता है हर किसी को उनके बॉस परेशान कर रहे हैं। दरवाजा खुलता है और आंचल बस में चढ़ती है। वह अंदर बैठने के लिए सीट देख रही होती है, तभी वह ध्यान देती है कि बस मेें केवल लड़कियां ही हैं। बस ड्राइवर और कंडक्टर के सिवा तो बस में कोई आदमी है ही नहीं। आंचल को अजीब लगता है, केवल लड़कियां ही रात के 12 बजे ट्रैवल कर रही है, बड़ी अजीब बात है। वह सीट देख रही होती है, तभी एक लड़की पीछे से हाथ हिलाती है। 

आंचल मुस्कुराते हुए कहती है- Thank You, मुझे तो लगा आज घर तक का सफर खड़े होकर ही करना होगा। इतनी रात में भी काफ लोग बस से सफर कर रहे हैं। आंचल लड़की से बात करने की कोशिश करती है, लेकिन वह उसकी बात को अनसुना करके खिड़की की तरफ देखने लगती है। आंचल को लड़की की हरतक अजीब लगती है। वह मन ही मन सोचती है- इसने खुद ही मुझे अपने साथ बैठने को बुलाया और खुद ही मुझे इग्नोर कर रही है, छोड़ो मुझे क्या? मुझे तो सीट मिल गई, यही बहुत है। आंचल बैग में से इयरफोन निकालती है और कानों में लगा लेती है।

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10 मिनट बीत जाते हैं, बस लगातार सड़क पर चल रही है और कहीं नहीं रुकती, लेकिन देखते ही देखते बस का रंग अचानक बदल जाता है। जो बस दिखने में नई चम-चमाती थी, वह अचानक टूटी-फूटी और खड़बड़ करने लगती है। बस की खिड़कियों में से हवा आने लगती है और शीशे भी टूटे-फूटे हो जाते हैं। बस पूरी तरह से बदल जाती है, लेकिन आंचल का ध्यान गानों में होता है। वह आंखें बंद करके कानों में इयरफोन लगाए, सीट पर बैठी होती है। तभी आवाज आती है, मैडम…मैडम..कहां जाना है, टिकट लोगी के नहीं।

आंचल की आंख खुलती है। वह कानों में से इयरफोन निकालती है और बैग में हाथ डालकर पैसे ढूंढने लगती है, तभी उसे कुछ अजीब लगता है। कंडक्टर का चेहरा…बैग में पैसे ढूंढते-ढूंढते उसे समझ आता है कि ये आदमी तो वही है, जो कार में आया था। आंचल घबरा जाती है। वह बस की फर्श की तरफ देखती है। फर्श टूटी-फूटी है और साइड में बैठी लड़की के कपड़ों का रंग भी बदल गया है। उसके कपड़ों पर खून के निशान है। आंचल के हाथ कांपने लगते हैं। वह कांपते हुए बैग में से पैसे निकालती है और कंडक्टर की तरफ देखे बिना कहती है…मुझे अगली लाल बत्ती पर उतरना है। कंडक्टर की भारी आवाज आती है- ठीक है.. चेंज जाते हुए ले लेना। आंचल- ठीक है.. वह कंडक्टर की तरफ देखे बिना कानों में इयर फोन लगाती है और फिर से आंख बंद करके सीट पर बैठ जाती है। उसे पैरों की आवाज आती है कि कंडक्टर वापस जा रहा है। आंचल के माथे पर पसीना छूट रहा होता है। वह आंख खोलकर आस-पास बैठे लोगों को देखना चाहती होती है, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं होती।

बस में आंचल के साथ क्या होगा? वह आगे क्या करेगी, बस बैठे यात्री के अचानक कपड़े कैसे बदल गए? जानने के लिए इंतजार करें अगले पार्ट का…

यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।

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