
बारिश की हल्की फुहारें कार के शीशों पर गिर रही थीं। पहाड़ों के घुमावदार रास्तों पर गाड़ी धीरे-धीरे चढ़ रही थी। नेहा मुस्कुराते हुए अर्जुन के कंधे पर सुकून की झपकी ले रही थी। नेहा और अर्जुन की शादी को 4 दिन ही हुए थे और शादी की रस्मों को पूरा करने के बाद वो हनीमून पर जा रहे थे। हनीमून के लिए जगह भी बहुत खूबसूरत चुनी थी, पहाड़ों की रानी मसूरी।
वैसे तो नेहा और अर्जुन एक दूसरे को तीन साल से जानते थे, लेकिन शादी के बाद हनीमून को यादगार बनाना हर कपल का सपना होता है … नेहा ने सुकून की सांस की और बोलै आखिर हम जा रहे हैं कुछ दिनों के लिए सुकून के पल ढूंढने... हमारा हनीमून!
अर्जुन ने गाड़ी की स्टीयरिंग संभालते हुए कहा, 'और वो भी ऐसी जगह, जहां भीड़ नहीं, शांति है… सिर्फ हम दोनों।'

नेहा ने गूगल पर होटल की फोटोज़ देखनी शुरू की 'होटल पार्क रिट्रीट'… घने जंगलों के बीच बना एक पुराना लेकिन खूबसूरत होटल। ऑनलाइन रिव्यू बहुत कम थे, लेकिन जो थे, वो या तो बहुत अच्छे थे या फिर थोड़े अजीब। लोगों ने होटल के लिए लिखा था 'एक बार आने के बाद बार-बार आने का मन करेगा', ' जो इस होटल में आएगा यहां का हो जाएगा', हनीमून को यादगार बनाने का एक ऐसा होटल जिसे आप कभी भूल नहीं पाएंगे। ऐसे न जाने कितने रिव्यु थे जो नेहा को बार-बार सोचने के लिए मजबूर कर रहे थे।
'अर्जुन होटल तो बहुत खूबसूरत है और हमारा कमरा भी हिल फेसिंग हैं, पहाड़ियों के पीछे से सूरज कितना खूबसूरत दिखेगा न। '

रास्ते में रुकते है हनीमून कपल होटल पहुंच गया। शाम ढल चुकी थी जब वे होटल पहुंचे। होटल वैसा ही था जैसा फोटो में था, बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत दिख रहा था। असल में थोड़ा होटल ज्यादा पुराना, थोड़ा ज्यादा शांत और थोड़ा थोड़ा रहस्यमयी भी लग रहा था।
रिसेप्शन पर एक दुबला-पतला लड़का खड़ा था।
'वेलकम सर, वेलकम मैम.. उसने धीमी आवाज में कहा, 'आपका कमरा नंबर 207 है।
यहां बहुत कम गेस्ट दिख रहे? अर्जुन ने पूछा।
लड़का मुस्कुराया ' जी सर ऑफ-सीजन है… शांति पसंद करने वाले लोग ही आते हैं यहां, शहर से हटकर है न'
नेहा ने चारों ओर देखा - दीवारों पर पुरानी पेंटिंग्स, एक बड़ी घड़ी जो टिक-टिक की तेजी से आवाज कर रही थी और हवा में एक अलग सी खुशबू थी, रिसेप्शन पर भी एक अलग खुशबू आ रही थी, शायद किसी ने कोई धूप बत्ती जलाई है। नेहा मन में खुद से ही बातें कर रही थी और होटल को एकटक निहार रही थी।

नेहा और अर्जुन अपने कमरा नंबर 207 में पहुंचे। कमरा बेहद सुंदर था-लकड़ी की दीवारें, बड़ी खिड़की, बाहर धुंध से ढकी पहाड़ी। नेहा बहुत खुश हो गई 'परफेक्ट!' अर्जुन कितना सुंदर कमरा है न और न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा इस कमरे से कोई पुराना रिश्ता है।
अर्जुन तेजी से हंस पड़ा और बोला- 'कैसी बात करती हो नेहा हम यहां पहली बार आए हैं फिर तुम्हारा इस कमरे से भला क्या रिश्ता हो सकता है। मुझे तो बहुत जोर की भूख लगी है चलो जल्दी से फ्रेश हो जाओ फिर कुछ खाने चलते हैं। ' रात को खाना खाकर दोनों जल्दी सो गए। आधी रात को नेहा की आंख खुली। उसे लगा जैसे किसी ने दरवाजे के बाहर धीरे-धीरे कदम रखे हों।
टक… टक… टक…
'अर्जुन…' उसने फुसफुसाया।
“हम्म?” अर्जुन अचानक से नींद से जाग गया 'क्या हुआ नेहा? तुम डरी हुई क्यों लग रही हो, सो जाओ कल जल्दी उठकर सन राइज भी तो देखना है।
'अर्जुन कोई बाहर है। अर्जुन ने दरवाजा खोला - बाहर कोई नहीं था। लंबा खाली कॉरिडोर… बस एक टिमटिमाती लाइट।
'नेहा तुम्हें सपना आया होगा,' अर्जुन ने उसने कहा।

दरवाजा बंद करते ही नेहा की नजर दरवाजे के नीचे पड़े एक कागज पर पड़ी उसमें लिखा था 'कमरा बदल लो, अभी भी समय है।'
नेहा ने करवट बदली और चादर ओढ़कर सो गई। अगले दिन नेहा ने वो कागज अर्जुन को दिखाया, लेकिन उसमें लिखे अक्षर गायब थे। अर्जुन ने कहा, तुम कुछ ज्यादा ही सोच रही हो नेहा, ये सब बेकार की बातें हैं। चलो तैयार हो जाओ फिर घूमने निकलते हैं।
रिसेप्शन पर वही लड़का था।
“किसी ने रात को ये नोट डाला,” अर्जुन ने पूछा।
लड़के ने कागज देखा… कुछ सेकंड चुप रहा… फिर बोला
'पुरानी बिल्डिंग है… बच्चे कभी-कभी शरारत कर देते हैं।'
यहां बच्चे भी हैं क्या? नेहा ने तुरंत पूछा।
हां हैं न स्टाफ के बच्चे वह बोला और बात टाल दी।
बंद पड़ा कमरा….

कॉरिडोर के आखिर में एक कमरा बंद था जिसका नंबर था 203 जंग लगा ताला, दरवाज़े पर खरोंच के निशान।
अरे ये कमरा बंद क्यों है? नेहा ने हाउसकीपिंग स्टाफ से पूछा।
लड़की घबरा गई - 'मैडम… उधर मत जाइए।”
क्यों?”
'बस… मत जाइए,' वह जल्दी से चली गई।
दूसरी रात जब फिर से नेहा सोई तब फिर वही कदमों की आवाज़… इस बार नेहा ने साफ सुना ।
और फिर किसी लड़की के रोने की धीमी सी आवाज।
नेहा फिर से डर गई और अर्जुन से बोल पड़ी- “तुम भी सुन रहे हो न अर्जुन ?
अर्जुन ने सिर हिलाया।
आवाज 203 नंबर कमरे से आ रही थी।
अर्जुन चलो न देखते हैं एक बार-अर्जुन बोला अरे सो जाओ नेहा ऐसे ही कोई आवाज आई होगी।
'डरो मत, मैं हूं न। अर्जुन और नेहा दरवाजे तक गए- कमरा नंबर 203 का ताला बंद था। अर्जुन ने हल्का सा दरवाजा ठोका।
टक टक टक....
नेहा पीछे हट गई- 'कोई अंदर है!'

अगली सुबह अर्जुन ने चाय वाले से पूछा
ये होटल कैसा है...क्या यहां कोई रहस्य है जो सब हमसे छिपा रहे हैं?
चाय वाला चुप हो गया...'अरे नहीं भैया ऐसा कुछ नहीं है बस लोग बोलते हैं कि वहां किसी औरत का साया है...अब हमका तो कौनो नाय दिखा सालों से यहीं चाय लगा रहे हैं। '
अरे लोग तो ये भी कहते हैं कि 5 साल पहले एक कपल हनीमून के लिए आया था लड़की का नाम था नैना और लड़के का अर्जुन। लड़की होटल के कमरे से ही गायब हो गए और लड़का उसकी याद करते हुए बावला सा हो गया था। क्या बताएं साहब अब ये बड़े होटलों में क्या-क्या रहस्य हैं ये तो होटल का मालिक ही जाने।
नेहा के हाथ से चाय का कुल्लहड़ गिर गया...'क्या क्या नाम बताया आपने? अर्जुन और नैना? क्या?

'अरे हां कमरा नंबर भी बहुत चर्चा में था उस समय और उस पर ताला लगा दिया गया था। शायद कमरा नंबर 203 था- चाय वाला बोला, हां वही कमरा था।
नेहा घबरा सी गई अरे अर्जुन ये कैसा इत्तफाक है उस हनीमून कपल का नाम भी हमसे मिलता जुलता ही है। अर्जुन चुप था और कुछ सोच रहा था-शायद नेहा से कुछ छिपा रहा था।
आज पहली बार नेहा को अर्जुन कुछ बदला हुआ सा लगा… रात में जब नेहा सो गई तो अर्जुन उठकर कहीं गया।
नेहा को फिर से दरवाजे के पास एक कागज़ मिल जिसमें लिखा था 'तुम अभी तक यहीं रुकी हो...वापस लौट जाओ यह होटल ठीक नहीं है। नेहा ने अर्जुन से पूरी बात बताई और ये भी पूछा कि आखिर वो कहां गया था? अर्जुन ने नेहा की तरफ देखा और बोला 'नेहा मैं तुमसे कुछ बताने वाला था...दरअसल मैं पहले भी इस होटल में आया था आज से 5 साल पहले... ये सब तभी हुआ था और मैं इतना डर गया था कि बिना कुछ बोले ही चुपचाप होटल से बाहर चला गया था।
मैं इसलिए भी बहुत डर गया था क्योंकि उस लड़के का नाम भी अर्जुन ही था।
'ये क्या मज़ाक है?” नेहा बुदबुदाई।
फिर तुम इस होटल में आए क्यों तुम्हारा हनीमून खराब क्यों किया?
या फिर कुछ और बात है? तुम मुझसे कुछ और छिपा रहे हो क्या अर्जुन?
अर्जुन चुप था और नेहा नाराज ...दोनों के बीच लड़ाई बढ़ गई, लेकिन अर्जुन फिर भी चुप ही था।
रात को नेहा सोने का नाटक करके जागती रही। 1:30 बजे अर्जुन उठा… चुपचाप बाहर निकल गया।
नेहा उसके पीछे गई।
वह 203 के सामने रुका जेब से चाबी निकाली कमरे का दरवाजा खोला और अंदर चला गया।
'तो तुम…'नेहा फुसफुसाई- और अर्जुन के पीछे-पीछे अंदर गई।
कमरा धूल भरा था लेकिन बीच में मोमबत्तियां जल रही थीं… और दीवार पर एक लड़की की तस्वीर लगी थी।
नेहा सोचने लगी ये तस्वीर किसकी है...कहीं ये नैना की ही तो नहीं है? नेहा ने अर्जुन को आवाज लगाई और तेजी से बोल पड़ी अर्जुन तुम यहां क्या कर रहे हो?
अर्जुन पीछे मुड़ा- 'नेहा मैं तुम्हे सच बताने ही वाला था। मैं इस होटल में पहले आ चुका हूं और मेरे साथ मेरे दो और दोस्त थे जिसमें से एक की शादी हुई थी और उसकी वाइफ भी साथ थी...उसका नाम भी अर्जुन था और उसकी वाइफ नैना।
नैना? नेहा ने अर्जुन की तरफ आश्चर्य से देखा कौन नैना वही जिसकी तस्वीर है?
हां वही..हम बहुत खुश थे और हम मसूरी की खूबसूरती का पूरा मजा उठा रहे थे। नैना और अर्जुन कमरा नंबर 203 में ही रुके थे। और उस रात...क्या उस रात अर्जुन ... उस रात अर्जुन के चीखने की आवाज आई और जब हमने उसके कमरे का दरवाजा खटखटया तो पता चला कि नैना कमरे से कहीं चली गई थी। नैना वापस नहीं मिली और मेरा दोस्त अर्जुन इसी होटल में कई दिनों तक उसको ढूंढता रहा...यही नहीं वो उसकी याद में पागल सा हो गया।
उसी समय से कमरा नंबर 203 बंद रहता है, लेकिन मैं कई बार इस होटल में आता हूं और अपने दोस्त और उसकी वाइफ नैना को याद करता हूं। इस होटल से मेरा कुछ लगाव सा है।
'तो इसलिए ही तुम मुझे यहां लेकर आए… नेहा ने अर्जुन से बोला। हां नेहा मुझे लगा कि शायद कोई सुराख़ मिल जाए नैना का और वो वापस मिल जाए।
हां, लेकिन तुमने मुझे ये सब क्यों नहीं बताया? मुझे लगा कि पता नहीं तुम ये सब सुनकर क्या सोचोगी, हो सके तो मुझे माफ करना। 'अर्जुन ने नेहा से माफ़ी मांगते हुए कहा।
नेहा और अर्जुन अगली सुबह ही होटल से बाहर निकल गए और पुरानी बातों को भुलाकर वापस लौट गए।
6 महीने बाद नेहा और अर्जुन फिर से पहाड़ों पर थे।
'अर्जुन इस बार होटल मैं चुनूंगी और किसी ऐसे होटल में लेकर जाउंगी जहां मेरा कोई रहस्य छिपा हो...हा हा हा
नेहा ने अर्जुन से कहा… पर एक बात समझ आई।

क्या?
सच्चा पार्टनर वही जो कोई भी राज छिपाए नहीं… हमेशा सच के साथ खड़ा रहे।' चलो अच्छा ही है अर्जुन तुमने भी कम से कम सच्चाई बताई मुझे।
धुंध छंट रही थी।
एक नई सुबह थी और पहाड़ों की खूबसूरत वादियां थीं।
इस बार होटल का कोई बंद कमरा नहीं था। बस अर्जुन और नेहा साथ में थे और पहाड़ों को खूबसूरती का मजा उठा रहे थे ...
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यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।
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