
मीना आधी रात को किसी से मिलने के लिए निकल पड़ी थी। उसे एक लेटर मिला था, लेटर में बस इतना ही लिखा था, चौराहे के पीछे कुएं के पास मिलो। मीना वहां जाने से घबरा रही थी, क्योंकि कुएं के पास कोई नहीं जाता था। आधी-रात में उसके लिए घर से निकलना भी मुश्किल हो रहा था, लेकिन कैसे भी करके उसे निकलना ही था। घर में सबके सोने का इंतजार कर रही थी। जैसे ही सब सो गए, उसने अपने कपड़ों से भरा बैग बैड के नीचे से उठाया और धीरे से दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई। उस समय बाहर कोई भी नहीं था, रात के 2 बजे थे और वैसे भी उसे कोई नजर नहीं आने वाला था। वह जल्दी-जल्दी चौराहे की ओर भाग रही थी। तभी उसे पीछे से किसी की आवाज आई। यह आवाज जानी पहचानी थी, वह चाहकर भी पीछे मुड़कर देखना चाहती थी, लेकिन तभी किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। वह घबरा गई और पीछे मुड़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी। आखिर उसके बाद मीना कहां गई। क्या वह मोहन से मिल पाई? या मोहन ही उसके पीछे था।
वैसे तो मीना काफी हिम्मत वाली लड़की थी, लेकिन वह हमेशा अपने घर वालों से परेशान रहती थी। उसके मां-बाप को उसका रहन-सहन और फोन चलाना पसंद नहीं था। वह हर समय फैशन की दुनिया में ही खोई रहती थी। मोबाइल पर वीडियो देखकर नए-नए स्टाइल आज़माना उसका रोज का काम था। कभी भाई की पुरानी टी-शर्ट काटकर उसे क्रॉप टॉप में बदल देती, तो कभी जींस को कैंची से छोटा कर निकर बना लेती। मां-बाप समझाते-समझाते थक चुके थे, मगर मीना खुद को किसी ब्यूटी क्वीन से कम नहीं मानती थी। उसे पूरा यकीन था कि इस चॉल से बाहर निकलकर बड़ी हिरोइन बनेगी।

घरवालों की टोका-टोकी से वह हर दिन झुंझलाई रहती थी, लेकिन उसकी हरकतें आपको भी हैरान कर देंगी। अगर मां जरा-सा भी कह देती कि ‘जा, सामान ले आ’, तो मीना पहले शीशे के सामने खड़ी होकर लिपस्टिक लगाती, बाल संवारती, कपड़े ठीक करती और तब जाकर दरवाजे से बाहर कदम रखती।
मीना के गायब होने से ठीक 2 दिन पहले सुबह-सुबह मां ने उसे दूध लाने को कहा था। उस वक्त मीना के बालों में तेल लगा हुआ था और ऐसे हाल में बाहर निकलना उसके लिए किसी सजा से कम नहीं था। उसने तुरंत जवाब दिया, ‘नहीं… मैं नहीं जा सकती, आप भाई को भेज दो।’
मां ने फिर कहा-,अरे इतनी सुबह कौन तुझे देखने वाला है, जल्दी जा और दूध ले आ। लेकिन मीना तमतमा गई। बोली, मैंने बोल दिया ना कि मैं नहीं जाऊंगी, तो मतलब नहीं जाऊंगी। अब मां का सब्र भी जवाब दे गया था। गुस्से में चिल्लाते हुए बोली, मैं भी देखती हूं तू आज कैसे नहीं जाती। तू नहीं लाएगी तो कोई और भी नहीं लाएगा। दूध तुझे ही लाना होगा। मीना ने भी गुस्से में दो टूक जवाब दे दिया- ठीक है, फिर आज दूध आएगा ही नहीं, लेकिन मैं बाहर नहीं जाऊंगी।

मां लगातार जिद करती रही, समझाती रही, मगर मीना अपनी बात से जरा भी टस से मस नहीं हुई। आखिरकार मां सिर पकड़कर बैठ गई और झल्लाकर बोली, मैं इस लड़की से पूरी तरह तंग आ गई हूं। खुद को पता नहीं कहां की विक्टोरिया समझती है। बालों में तेल लगा है तो जनाब घर से बाहर नहीं जाएंगी!
उस दिन मां के हजार कोशिशों के बाद भी वह दूध लेने नहीं गई और वह खुद दूध का बर्तन लेकर, दूध लेने निकल गई। तभी पड़ोस की रहने वाली नैना ने आवाज आई, अरे मीना की मां- कहां गुस्से में भागी चली जा रही हो… मीना की मां ने जवाब देते हुए कहा- अरे क्या करूं बहन 1 घंटे से मैं इस मीना को बोल रही हूं, दूध लेने चली जा,, लकिन ये है कि घर से बाहर ही नहीं निकल रही है। कहती है सिर में तेल लगाया है, मैं नहीं जाने वाली। बताओ तो जरा, ये क्या बात हुई…कौन इसकी फोटो लेने आ रहा है, कहां कि ये स्टार है, जो ऐसे निकल जाएगी तो इसकी तस्वीरें वायरल हो जाएगी।
नैना हंसते हुए बोली.. अरे ये मीना भी न.. ठीक है कोई बात नहीं बच्ची है। धीरे-धीरे समझ जाएगी। मीना की मां- मुझे नहीं लगता इसको कभी अकल आने वाली है। तभी मीना दरवाजे में से थोड़ा सा चेहरा निकालते हुए बोली..मम्मी आप धीरे नहीं बोल सकती। नैना आंटी आप उनके पास खड़ी होकर क्यों नहीं बात करती हो। ये सबके सामने मेरा मजाक बना देती है। तभी नैना ने भी मीना का मजाक उड़ाते हुए कहा- अरे तुमने तेल लगाया है, तुम्हारा चेहरा तो दिख रहा है। ये सुनते ही मीना ने तुरंत अपना सिर दरवाजे के अंदर कर लिया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। नैना के साथ-साथ आस-पड़ोस के और लोग भी यह देखकर हंसने लगे।
पूरे दिन मीना ऐसे ही तेल लगाकर बैठी रही और मां ने भी गुस्से में उससे बात नहीं की।
शाम को लगभग 4 बजते ही वह फौरन नहाने के बाथरूम में घुस गई। मां को यह देखकर बहुत ज्यादा गुस्सा आया। मां ने चिल्लाते हुए कहा- नहाने के बाद अगर तू कहीं बाहर गई, तो आज मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।मीना ने कहा- नहाने के बाद तो बाहर जाऊंगी ही, मैंने कहा था तेल लगे हुए बालों के साथ बाहर नहीं जाने वाली। अब मुझे नहाने दो। मां का दिमाग गुस्से से गर्म हो रहा था, लेकिन वो जानती थी कि इस लड़की से बहस करने का कोई फायदा नहीं। नहाकर निकलने के बाद लगभग 1 घंटे तक मीना का मेकअप चला। तभी उसके फोन पर किसी का फोन आया। उसने फौरन फोन काटा और बाहर निकल गई। मां, मीना को देख रही थी।

मां ने मन ही मन सोचा- आज मैं भी पता लगाकर रहूंगी की आखिर ये आज इतना सज-धजकर कहां निकली है। मां ने भी कसम खा ली थी कि आज वह पता लगाकर रहेगी।
मीना कान में इयरफोन लगाए, गाना गुनगुनाते हुए सड़क पर चले जा रही थी। सड़क पर लड़के उसे घूर रहे थे, लेकिन उसे किसी से कोई भी फर्क नहीं पड़ता था। मां को भी अब इन बातों की आदत हो गई थी कि जब बेटी ही ऐसी है, तो किसी और लड़कों को कुछ कहकर क्या फायदा।
लगभग 20 मिनट तक चलने के बाद मीना एक दुकान पर रुकी। यह कपड़ों की दुकान थी। एक बड़ा शोरूम, जिसमें मीना तुरंत अंदर चली गई। मां बाहर ही खड़े होकर उसका इंतजार कर रही थी।
आखिर मीना उस दिन किसके साथ थी, उसके साथ ऐसा क्या होने वाला था, जिसकी चिंता मां को सता रही थी। आगे क्या हुआ जानने के लिए इंतजार करें अगरे पार्ट का...
यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।
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