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 haunted 13th floor

हर रात 2:13 बजे आती थी एक अलग आवाज…13वीं मंजिल का सच जानकर आखिर क्यों कांप उठी समायरा

मुंबई की एक ऊंची इमारत की 1वो 3वीं मंज़िल, जहां पर शुरू हुई समायरा और अभय की शादीशुदा जिंदगी, लेकिन हर रात 2:13 बजे सुनाई देने वाली रहस्यमयी आवाज ने उनकी खुशियों को डर में बदलना शुरू कर दिया। आखिर ऐसा क्या था उस फ्लैट में...
Editorial
Updated:- 2026-02-27, 13:37 IST

अरे अभय तुम्हें सच में 13वीं मंज़िल पर ही फ्लैट लेना था?
समायरा ने कार की खिड़की से बाहर देखते हुए धीमे स्वर में पूछा।

अभय मुस्कुराया, 'अरे मैडम, जमाना कितना आगे बढ़ गया है और आप अभी भी वहीं अटकी हुई हैं… 13 नंबर से डरने का टाइम गया। ऊपर से व्यू तो देखो, पूरा शहर हथेली पर दिखेगा।' रोज शाम को हम बालकनी में बैठकर प्यार भरी बातें करेंगे। सोचो कितना अच्छा लगाएगा। न गाड़ियों का शोर-शराबा, न शहर की आवाजें कितना सुकून है इस घर में। '

samayara and abhay wedding

समायरा और अभय की शादी को अभी सिर्फ दस दिन ही हुए थे। नई दुल्हन की चूड़ियों की खनक, हाथों की मेंहदी की हल्की सी खुशबू और सपनों से भरा मन...सब कुछ समायरा के साथ इस नए शहर में भी आया था। अभय और समायरा शादी के बाद मुंबई शिफ्ट हुए थे, दोनों की नौकरी भी तो वहीं थी। अभय पेशे से इंजीनियर था और समायरा फैशन डिजाइनर। दोनों कुछ सपने लेकर मुंबई आए और किराए पर नया घर लिया। जिस सोसाइटी में वो रहने आए थे, उसका नाम था स्टार रेजीडेंसी और 13वीं मंजिल का फ्लैट पिछले दो साल से खाली पड़ा था।

शाम तक सामान शिफ्ट हो गया। घर सच में बहुत खूबसूरत था सफेद दीवारें, लंबी बालकनी और कांच की बड़ी-बड़ी खिड़कियां। नजारा किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं लग रहा था।

समायरा और अभय शिफ्टिंग में इतने थक गए कि रात मन तुरंत ही उनकी आंख लग गई। रात को करीब 2 बजे सिया की आंख अचानक खुली।
उसे लगा जैसे रसोई में बर्तन खनक रहे हैं।

abhay and samayara newly wed couple story

'अभय… सुनो ना…' उसने अभय को उठाने की कोशिश की, लेकिन थकान की वजह से अभय ने समायरा से बोला 'प्लीज यार सो जाओ कल बात करेंगे।
समायरा ने कहा 'अभय किचन से बर्तनों की आवाज आई'...अभय ने करवट बदली, 'कुछ नहीं है, शायद ऊपर वाले फ्लैट से आवाज आ रही होगी।'

समायरा ने ने घड़ी में टाइम देखा 2:13 AM

आवाज फिर आई… इस बार जैसे कोई धीमे-धीमे चल रहा था। अरे शायद ऊपर वाले फ्लैट में कोई होगा और उसी की आहट होगी। समायरा भी ऐसा सोचकर सोने लगी।

अगले दिन दोनों सुबह उठकर तैयार हो गए और ऑफिस के लिए निकल गए। दिनभर काम में बिजी रहते हुए समायरा को याद भी नहीं आया कि कल रात उसके नए फ्लैट में क्या हुआ था।

फिर रात हुई अभय और समायरा सोने लगे। रात के 2 बजे के आस-पास फिर से समायरा की आंख खुली और उसे अजीब सी आवाज सुनाई दी। सिया ने डरते-डरते कमरे से बाहर झांका। ड्रॉइंग रूम की लाइट अपने आप जल रही थी।

अरे मैंने तो सारी लाइट्स ऑफ कर दी थीं...फिर ये कैसे जल गई समायरा बुदबुदाई। हो सकता है मेरे मन का वहम हो। समायरा ने टाइम देखा 2:13 AM
'अरे ये तो कल रात भी मेरी नींद ठीक इसी समय खुली थी अजीब इत्तेफाक है।'

अगले दिन सुबह समायरा नीचे दूध लेने गई, लिफ्ट के बाहर खड़े चौकीदार ने अजीब नजरों से उसे देखा।

'मैडम, आप लोग 13वीं मंजिल पर शिफ्ट हुए हैं क्या?' उसने पूछा।

हां, क्यों?

चौकीदार कुछ पल चुप रहा, फिर बोला...अरे कुछ नहीं मैडम 13 वां माला थोड़ा ध्यान रखना। आज से 2 साल पहले वहां एक शादीशुदा जोड़ा आया था।

क्या हुआ था फिर उन्हें?' समायरा का दिल तेजी से धड़कने लगा।

चौकीदार ने नजरें झुका लीं ‘लोग कहते हैं, शादी के कुछ महीने बाद… लड़की बालकनी से गिर गई थी।

समायरा घबरा गई और उसके हाथ से दूध का पैकेट भी छूट गया।

fiction story of a 13th floor flat

उस दिन समायरा पूरे दिन बेचैन रही और ऑफिस में उसका मन भी नहीं लगा, उस रात अभय देर से घर आया।

अभय ने नया ऑफिस ज्वाइन किया था और काम भी बहुत ज्यादा था।

शाम को समायरा जब कपड़े चेंज कर रही थी तब वह तैयार होकर आईने के सामने खड़ी हुई, उसे लगा जैसे पीछे कोई खड़ा है।
उसने तुरंत पलटकर देखा, वहां कोई नहीं था

फिर उसने आईने में देखा एक धुंधली सी परछाईं...लाल साड़ी में… बाल खुले हुए…

समायरा चीख पड़ी।

अभय दौड़ता हुआ आया “क्या हुआ समायरा सब ठीक है?”

'कोई… कोई था यहां!'

अभय ने पूरे घर के हर एक कोने में देखा, लेकिन वहां कोई भी नहीं था।

'तुम्हारा वहम है समायरा,' अभय ने समझाया।

समायरा घबराई हुई थी....ये मेरे मन का वजम नहीं हो सकता। कुछ तो है जो सिर्फ मुझे ही दिख रहा है।

फ्लैट में एक छोटा स्टोर रूम था, जो बंद था। शायर उसकी चाभी लैंड लार्ड के पास ही थी और अभय ने जल्दबाजी में ये फ़्लैट लिया था, इसलिए कमरा खुल नहीं पाया। समायरा ने अभय से उस कमरे के बारे में पूछा। अभय ने कहा था कि चाबी शायद मकान मालिक के पास होगी।

story of a 13th floor flat

लेकिन उस रात फिर 2:13 पर…अचानक से समायरा की आंख खुली

आज कुछ ऐसा हुआ कि समायरा के होश ही उड़ गए...उस स्टोर रूम का दरवाजा धीरे-धीरे खुलने लगा।

समायरा बिस्तर पर बैठी थी। उसने साफ देखा दरवाजा अपने आप खुला… और अंदर से ठंडी हवा का झोंका सा आया।

कमरे के अंदर अंधेरा था, पर दीवार पर कुछ लिखा हुआ दिख रहा था।
' प्लीज मेरी मदद करो...मुझे इंसाफ दिलाओ। ...मुझे छोड़कर मत जाओ प्लीज ' समायरा को किसी की आवाज सुनाई दी, लेकिन कोई दिखा नहीं

समायरा की जैसे सांस ही अटक गई।

अगले दिन जब अभय ऑफिस गया और समायरा ने हिम्मत करके स्टोर रूम खोला। अंदर पुराने अखबार, टूटी कुर्सी और एक लाल रंग की डायरी पड़ी थी।

fiction story of a couple 13th floor

डायरी के पहले पन्ने पर ही लिखा था 'मैं जीना चाहती हूं, लेकिन उसने मुझे मार दिया। '

समायरा घबरा गई और तुरंत ही कमरे से बाहर निकल आई। वो इतनी डरी हुई थी कि सीधे अपने फ्लैट से बाहर निकल गई और नीचे के फ्लोर में रहने वाले लोगों से मिलने गई।

समायरा के फ्लैट के ठीक नीचे वाले फ़्लैट में एक आंटी रहती थीं, जो दिखने में काफी समझदार थीं। उन्होंने समायरा से पूछा क्या हुआ बेटा तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो।

fiction story of 13th floor

समायरा ने बोला 'आंटी मैं आपके ठीक ऊपर वाले फ़्लैट में शिफ्ट हुई हूं, 13 वें फ्लोर पर। आंटी मैं जब से शिफ्ट हुई हूं वहां कुछ न कुछ हो रहा है। आप बता सकती हैं कि आखिर वहां ऐसा क्या हुआ था'...

आखिर उस फ्लैट में ऐसा क्या हुआ था जिसकी वजह से कोई यहां शिफ्ट नहीं होना चाहता था? आखिर आंटी ऐसा क्या बताने वाली हैं जो सुनकर समायरा के होश उड़ जाएंगे।...जानने के लिए इंतजार करें कहानी के अगले पार्ट का...

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यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ।

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