
मीना का 8 साल का बेटा सोनू रोज स्कूल से घर आने के बाद बिना कुछ खाए-पीए सो जाता था। हर रोज सोनू की इस हरकत से मीना परेशान हो गई थी। आखिर ऐसी भी क्या थकान थी कि वह आते ही सो जाता है? मीना ने रात को सोनू के पापा के आने के बाद उन्हें इस हरकत के बारे में बताया। मीना ने कहा- सोनू रोज आते ही सो जाता है और खाना भी नहीं खाता। टीचर भी कहती हैं कि वह रोज स्कूल में क्लास में भी सोता रहता है, ऐसा पहले नहीं होता था। पिछले 1 महीने से सोनू रोज ऐसा कर रहा है।
सोनू की ऐसी हरकत सुनकर उसके पापा भी हैरान थे, लेकिन उन्होंने गुस्से में कहा- ये सब पढ़ाई न करने का नाटक है। उसे स्कूल जाने का और पढ़ाई करने का मन तो करता नहीं है, इसलिए वह ऐसी हरकत करता होगा। मीना को भी सोनू के पापा की बात सही लगी। उसने भी बात में हां करते हुए कहा- हो सकता है यही बात हो। छोड़ो, मुझे तो चिंता हो गई थी। मैंने सोचा कि शायद इसे डॉक्टर के पास लेकर जाना पड़ेगा। आप हाथ-मुंह धो लीजिए, मैं खाना लगाती हूं।
सोनू के पापा ने कहा- सोनू है कहां?
"वो तो सो रहा है," मीना ने हैरानी से कहा। "मैंने बताया तो था, वह रोज स्कूल से आकर सो जाता है।"
सोनू के पापा बोले- "अभी तक सो रहा है? शाम 5 बजे आया था और अभी तक सो ही रहा है! 4 घंटे हो गए उसे सोते हुए। इतनी कैसी नींद? अभी मैं उसे उठाता हूं।"
सोनू के पापा गुस्से में तिलमिलाते हुए सोनू के पास गए और उसे जगाने लगे।
सोनू नींद में था और सपने में बार-बार कह रहा था- "मैं किसी को नहीं बताऊंगा... प्लीज मुझे माफ कर दो... प्लीज मुझे छोड़ दो।" सोनू की ऐसी बातें सुनकर मीना भी हैरान थी, लेकिन सोनू के पापा गुस्से में थे।

उन्होंने जबरदस्ती उसे उठाया और उसे बहुत डांट लगाई। नींद से उठते ही पापा की डांट सुनने की वजह से सोनू रोने लगा। तभी मीना ने सोनू के पापा को चुप करवाते हुए कहा-"अरे, अभी सोकर उठा है, ऐसे कौन डांटता है? थोड़ी देर बाद इसे प्यार से भी समझा सकते हो न। आप जाओ, खाना खा लो।" सोनू के पापा गुस्से में कमरे से बाहर चले गए।
मीना ने सोनू को प्यार से चुप करवाते हुए कहा- बेटा, बुरा सपना देखा क्या? सपने में क्या नहीं बताना... किस बारे में बात कर रहा था तू?
सोनू मां की बातों को सुनकर हैरान हो गया। उसने घबराते हुए कहा- कुछ नहीं मां, अब तो मुझे याद भी नहीं कि मैं कौन सा सपना देख रहा था। मीना को भी लगा कि शायद सोनू को याद नहीं है, इसलिए उसने दोबारा कुछ पूछा नहीं। मीना ने मुस्कुराते हुए क- चलो, कोई नहीं। खाना खा लो, जाओ हाथ-मुंह धोकर आओ।
सोनू उठा और बाथरूम की तरफ चला गया। मीना भी किचन में जाकर खाना निकालने लगी, तभी बाथरूम से आवाज आई- "बचाओ…!"
सोनू चिल्ला रहा था। मीना और सोनू के पापा भागते हुए बाथरूम की तरफ गए। सोनू बाथरूम में जमीन पर बैठा हुआ था और किसी को देखकर बुरी तरह डर रहा था। मीना तुरंत सोनू के पास जाकर बैठ गई और बोली- "क्या हुआ सोनू? क्या हुआ? इतनी तेज क्यों चिल्लाए?"
सोनू ने कांपते हुए कहा- मम्मी, उसने बाथरूम की लाइट बंद कर दी... वो मुझे खींच रहा था।

मीना और सोनू के पापा हैरानी से देख रहे थे। वह लाइट ऑन करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लाइट जल नहीं रही थी। सोनू के पापा ने कहा- लगता है, बल्ब फ्यूज हो गया है।
सोनू ने कहा- मैंने लाइट जलाई थी, पापा... उसने लाइट बंद कर दी। वो मुझे बुला रहा था। मैंने उसके साथ जाने से मना कर दिया, तो वो मेरा हाथ खींच रहा था।
मीना और सोनू के पापा ने घबराते हुए कहा- कौन? बेटा, किसकी बात कर रहे हो?
सोनू ने रोते हुए कहा- पापा, वो मेरा रोहन था न, जो 1 महीने पहले स्कूल की छत से गिरने की वजह से गुजर गया था... वो मुझे बुला रहा है। वो रोज रात में आता है और मेरे साथ ही रहता है। रोज वो रात में मेरे साथ खेलता है। स्कूल में भी वो मेरे साथ खेलता है। सोनू की बातें सुनकर जैसे मीना और उसके पापा के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत सोनू को बाथरूम से निकालकर मंदिर वाले कमरे में ले गए। उन्होंने पूजा की और सोनू के हाथों और गले में भगवान का धागा बांधा। लेकिन उन्हें बहुत ज्यादा डर लग रहा था, इसलिए वे समझ नहीं पा रहे थे कि सोनू को रोहन की आत्मा से कैसे बचाएं।

अगले दिन उन्होंने रोहन के परिवार से संपर्क किया और उन्हें ये सब बातें बताईं। ये बात सुनकर वे हैरान रह गए, लेकिन वे नहीं चाहते थे कि रोहन की आत्मा की वजह से सोनू के साथ कुछ हो। इसलिए उन्होंने सोनू की मां से कहा- मीना, मैं नहीं चाहती कि सोनू के साथ कुछ भी गलत हो। इसलिए हम एक पूजा रखवाते हैं। पूजा में सोनू को भी बिठाएंगे। हो सकता है कि रोहन के जाने की वजह से सोनू उससे बहुत ज्यादा जुड़ गया हो। इसी वजह से उसे रोहन की आत्मा नजर आने लगी हो। इसके बाद उन्होंने रोहन की आत्मा की शांति के लिए फिर से बड़ा पूजा-पाठ करवाया, जिसमें सोनू को भी शामिल किया गया। पूजा-पाठ होने के बाद भी मीना को तसल्ली नहीं थी। उसे लगा कि अगर सोनू उसी स्कूल में रहेगा, तो उसे डर लगेगा। इसी डर से मीना ने सोनू का स्कूल भी बदल दिया और उसका एडमिशन किसी दूसरे स्कूल में करवा दिया।

स्कूल बदलने और पूजा पाठ के साथ-साथ सोनू को बच्चों के साथ खेलने के लिए वह जबरदस्ती भेजने लगे। धीरे-धीरे सोनू रोहन को भूल गया और सब कुछ ठीक हो गया। सोनू फिर से पहले की तरह ही एक्टिव हो गया और अब उसे रोहन की आत्मा दिखाई नहीं देती थी। इस कहानी से हम आपको यह बताना चाहते हैं कि अगर आपके बच्चे के बर्ताव में आपको बदलाव नजर आता है, तो उसे अकेला न छोड़ें। उससे बात करें और उसे समझने की कोशिश करें।
यह कहानी पूरी तरह से कल्पना पर आधारित है और इसका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है। यह केवल कहानी के उद्देश्य से लिखी गई है। हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। ऐसी ही कहानी को पढ़ने के लिए जुड़े रहें हर जिंदगी के साथ।
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