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मेरी 11 साल की बेटी अपनी उम्र से ज्यादा मेच्योर बातें करती है, मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट ने बताए जरूरी टिप्स

आजकल कई पेरेंट्स यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि उनके बच्चे कम उम्र में ही बड़ी-बड़ी और समझदारी भरी बातें करने लगे हैं। मुख्य रूप से 8 से 12 साल की उम्र में जब कोई बच्चा एडल्ट्स जैसी सोच या शब्दों का इस्तेमाल करता है, तो पेरेंट्स के मन में कई सवाल उठने लगते हैं। कई बार यह बच्चों की तेज समझ का संकेत भी हो सकता है, तो कभी इसके पीछे हार्मोनल बदलाव, तनाव या डिजिटल दुनिया का असर भी हो सकता है। आइए जानें क्या कहते हैं इस बारे में एक्सपर्ट्स।
Editorial
Updated:- 2026-03-06, 18:25 IST

आजकल कई पेरेंट्स यह महसूस करते हैं कि उनकी 10 से 12 साल की बेटियां अपनी उम्र से कहीं ज्यादा समझदारी और मेच्योरिटी भरी बातें करने लगी हैं। कभी-कभी बच्चे जाने अनजाने कई ऐसे सवाल पूछते हैं जिनके बारे में उन्हें भी पता नहीं होता है। बच्चे अपनी उम्र से ज्यादा बड़ी बातें करने लगते हैं। कई बार वो ऐसी शब्दों का इस्तेमाल करने लगते हैं जिनके बारे में उन्हें भी नहीं पता होता है। कई बार वो ऐसे विचार व्यक्त करते हैं, जो आमतौर पर बड़े लोगों से जुड़े होते हैं। ऐसे में पेरेंट्स के मन में चिंता होना स्वाभाविक होता है कि। आखिर इतनी कम उम्र में बच्चा इतना मेच्योर कैसे सोचने लगा? क्या यह सामान्य है या इसके पीछे कोई मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक कारण हो सकता है? ऐसा ही एक सवाल था मेरे घर के पास रहने वाली एक महिला का जिसकी 11 साल की बेटी इतनी मेच्योर बातें करती है, जो आमतौर पर एडल्ट लड़कियां करती हैं। वास्तव में ये एक बड़ी समस्या भी हो सकती है, क्योंकि इस उम्र में ही बड़ों जैसी बातें करने से शायद बच्चे का मन पढ़ाई में न लगे और वो गलत रास्ता अपना ले। एक्सपर्ट्स की मानें तो बच्चों में जल्दी मेच्योरिटी आने के कई कारण हो सकते हैं। आइए Jeevan Kasara, Chairman, Steris Healthcare से जानें बच्चों में कम उम्र में मेच्योरिटी आने के कारणों के बारे में।

हार्मोनल चैंजेस जल्दी होना 

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जीवन कसारा जी बताती हैं कि इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की रिपोर्ट्स की मानें तो, आजकल लड़कियों में पहले की तुलना में प्यूबर्टी यानी किशोरावस्था जल्दी शुरू हो रही है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन बढ़ने लगते हैं, जो भावनाओं, सोच और व्यवहार को तेजी से प्रभावित कर सकते हैं। अगर आपकी बेटी में कम उम्र में ही प्यूबर्टी के शारीरिक लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो आपको किसी बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी की भी आवश्यकता है।

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मानसिक रूप से तेज विकास होना

कुछ बच्चे स्वभाव से ही ज्यादा समझदार और संवेदनशील होते हैं। वे बड़ों की बातें ध्यान से सुनते हैं, चीजों को गहराई से समझते हैं और अपने विचारों को मेच्योर तरीके से व्यक्त करते हैं। ऐसे मामलों में यह मेच्योरिटी किसी समस्या का संकेत नहीं है, बल्कि अच्छी बौद्धिक क्षमता का संकेत हो सकती है। हालांकि, आपको इस बात को भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि आपकी बच्ची कोई ऐसी बात में इन्वॉल्व न हो जो कि उनको मानसिक रूप से प्रभावित करते हों। अगर 11 साल की बच्ची आपके सामने कोई भी ऐसी बात करे जो उसे मानसिक रूप से प्रभावित कर रही है तो आपको उससे बात करने की जरूरत है।

चिंता या छिपा हुआ तनाव

why kids are behaving meture

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार आजकल बच्चों में चिंता और तनाव के मामले बढ़ रहे हैं। पढ़ाई का दबाव, परिवार की समस्याएं या सामाजिक दबाव बच्चों को समय से पहले मेच्योर बना सकते हैं। अगर बच्चा ठीक से सो नहीं रहा, जल्दी चिड़चिड़ा हो जाता है, ज्यादा चिंता करता है या दोस्तों से दूर रहने लगा है, तो यह तनाव का संकेत हो सकता है। आपको इस बात को देखने की जरूरत है कि बच्चे का मेच्योरिटी लेवल ऐसा तो नहीं है जो उसे एडल्ट कंटेंट देखने से उसके बारे में बात करने में इंटरेस्ट आता है। इसके लिए आपको सबसे ज्यादा इस बात का ध्यान देने की जरूरत है कि आप बच्चे से बात करके इस बारे में जानने की कोशिश करें कि उसका फ्रेंड सर्कल कैसा है और समय-समय पर बच्चे की कॉउंसलिंग भी करें।

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बच्चों पर डिजिटल दुनिया का असर

आजकल बच्चे मोबाइल, सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए बहुत जल्दी बड़ी-बड़ी बातें जानने लगते हैं। इससे उनकी सोच और समझ जल्दी विकसित हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखें और उन्हें उम्र के हिसाब से गतिविधियों में शामिल करें। अगर बच्चे उम्र से ज्यादा बड़ी चीजें सोशल मीडिया पर देख रहे हैं या अपना ज्यादा समय डिजिटल दुनिया में बिता रहे हैं तो आपको इसकी लिमिट तय करनी चाहिए और इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि बच्चा सोशल मीडिया पर क्या देख रहा है।

पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?

what the parents should do

  • बच्चे से खुलकर और बिना डांटे बातचीत करें।
  • बच्चे को बार-बार 'उम्र से ज्यादा मेच्योर' कहकर अलग महसूस न कराएं।
  • बच्चे को आउटडोर गेम्स खेलने, हॉबी और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • जरूरत लगे तो समय-समय पर डॉक्टर से चेक-अप कराएं या कॉउंसलिंग करें।

अगर आपका बेटा या बेटी अपनी उम्र से ज्यादा बड़े लोगों जैसा व्यवहार करे तो आपको यहां बताई बातों का ध्यान देने की जरूरत है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी अन्य पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी के साथ।

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