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मेरा 7 साल का बेटा खेल-खेल में मेरे ब्रेस्ट टच करता है, क्या उसे Sex Education देनी चाहिए? एक्सपर्ट से जानें सही जवाब

कई बार बच्चे का व्यवहार पेरेंट्स को असहज लग सकता है। ऐसा माना जाता है कि अगर बच्चे के बिहेवियर में उम्र के साथ कुछ बदलाव हो रहे हैं तो इसका कारण आस-पास का माहौल हो सकता है या कोई और वजह। अगर आपका बच्चा भी बार-बार अलग व्यवहार करे तो उससे किस तरह से बात करनी चाहिए, एक्सपर्ट से जानें।
Editorial
Updated:- 2026-02-20, 23:01 IST

बच्चों की परवरिश के दौरान कई बार माता-पिता के सामने ऐसी परिस्थितियां आती हैं जिसमें वो असहज महसूस करने लगते हैं। बढ़ती उम्र के साथ बच्चों में होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलते हैं और उस समय अक्सर ऐसा भी होता है कि पेरेंट्स बच्चों को सही शिक्षा नहीं दे पाते हैं या उन बदलावों को समझ नहीं पाते हैं जो बच्चे में दिखाई दे रहे होते हैं। मुख्य रूप से जब बच्चा अपने शरीर या माता-पिता के शरीर के प्रति जिज्ञासा दिखाने लगे, कई बार जाने अनजाने वो मां को या पिता को बैड टच करे। कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चा अपनी उम्र से ज्यादा मेच्योर बिहेवियर करता है। ऐसे में कई मांएं यह सवाल पूछती हैं कि क्या बच्चे को सेक्स एजुकेशन देने की सही उम्र 7 या 8 साल से शुरू हो जाती है।

हाल ही में मैंने भी अपने 7 साल के बेटे में एक बदलाव महसूस किया 'मेरा 7 साल का बेटा कई बार खेलते हुए मेरे पास आता है और मेरे ब्रेस्ट टच करता है।' उसका यह व्यवहार थोड़ा असहज था और मैंने मन में कई बार सोचा कि क्या उसका यह व्यवहार सामान्य है? क्या उसे अब Sex Education देने का समय आ गया है? इस सवाल के सही जवाब के लिए Fortis Hospital की Clinical Psychologist Mimansa Singh Tanwar से बात की। आइए उनसे जानते हैं कि क्या बच्चों को इसी उम्र में इन बातों के बारे में बताना चाहिए।

क्या 7 साल के बच्चे का यह व्यवहार सामान्य है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार 6 से 9 साल की उम्र के बच्चे अपने शरीर और आस-पास की चीजों को लेकर जिज्ञासु होने लगते हैं। इस उम्र में शरीर में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं। अगर बच्चा खेलते समय या मजाक में मां के ब्रेस्ट को टच कर देता है, तो ज्यादातर मामलों में यह मासूम जिज्ञासा हो सकती है। कई बार बच्चा ऐसा इसलिए भी करता है क्योंकि वो मां के कई बॉडी पार्ट्स को सामान्य ही समझता है। कई बार बच्चा यह भी समझने की कोशिश कर रहा होता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्से क्या हैं और उनका क्या महत्व है। हालांकि, बच्चे के इस व्यवहार को पूरी तरह से नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं है। यह वह उम्र है जब बच्चे को सीमाएं समझाना जरूरी हो जाता है।

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क्या बच्चे को डांटना ठीक है?

अक्सर माता-पिता बच्चे का ऐसा बिहेवियर देखकर बच्चे को डांट देते हैं या कहते हैं, ऐसा दोबारा मत करना। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा करने से बच्चे के मन में शरीर के प्रति अपराधबोध की भावना आ सकती है। भविष्य में वह अपने सवालों को छिपाने लगेगा और आगे चलकर गलत सोर्स से जानकारी लेने की कोशिश कर सकता है। वैसे आपके लिए सबसे अच्छा यह है कि आप बच्चे को इस उम्र में Sex Education की जगह गुड और बैड टच समझाएं। इससे बच्चे को बॉडी के पार्ट्स के बारे में जानकारी तो होगी ही और ये जान पाना आसान होगा कि किसी के भी प्राइवेट पार्ट को टच करना गलत क्यों है।

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क्या 7 साल की उम्र में Sex Education देनी चाहिए?

Sex Education का मतलब केवल सेक्स के बारे में बताना नहीं होता है, बल्कि शरीर की समझ, प्राइवेट पार्ट्स, गुड टच-बैड टच और पर्सनल स्पेस के बारे में बताना भी हो सकता है। 7 साल की उम्र में आप बच्चे को ये सभी बातें सिखा सकती हैं और सही समय आने पर इससे आगे की शिक्षा देना ठीक हो सकता है। बच्चे को सब पहले गुड टच और बैड टच में ये समझाएं कि शरीर के कौन से हिस्से प्राइवेट हैं और यदि कोई भी व्यक्ति उन्हें छूने की कोशिश करे तो बच्चे को क्या करना चाहिए। यही नहीं अगर बच्चा इस उम्र में खेल-खेल में ही सही मां के भी प्राइवेट पार्ट जैसे ब्रेस्ट को टच करे तो ऐसा करना सही नहीं है। यह बातचीत को सहज और सामान्य तरीके से ही समझाएं। जिससे बच्चा किसी भी बात को अन्यथा न ले और अपनी जिज्ञासा को किसी और के सामने न रखे।

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बच्चे से कैसे करें बात?

  • अगर बच्चा खेल-खेल में आपके ब्रेस्ट टच करे, तो उसी समय उससे शांत स्वर में बात करें और उसे समझाएं कि यह मम्मी का प्राइवेट पार्ट है और इसे छूना ठीक नहीं है।
  • बच्चे से सामान्य भाषा में बात करें न कि उसे डांटें या शर्मिंदा करें।
  • इस बारे में बच्चे से आई कांटेक्ट बनाते हुए बात करें और बच्चे को सहज करने की कोशिश करें।
  • आप किसी उदाहरण को बच्चे के सामने रखकर भी इस तरह की बातों को समझा सकती हैं।

बच्चों को अगर समय रहते पर्सनल बाउंड्री नहीं सिखाई गई, तो वे दूसरों की सीमाएं समझने में भी देर कर सकते हैं। हालांकि इस उम्र में सेक्स एजुकेशन देना पूरी तरह से सही या गलत नहीं है, लेकिन आपको बच्चे को सही और गलत की पहचान करना जरूर सिखा सकता है। अगर बच्चा बार-बार ऐसा व्यवहार करे या दूसरों के प्राइवेट पार्ट्स के प्रति ज्यादा जिज्ञासा दिखाए तो आप पेरेंटिंग एक्सपर्ट या साइकोलॉजिस्ट से भी बात कर सकती हैं।
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