
अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहती हैं, तो आप समझ सकती हैं कि रोजाना ऑफिस आना-जाना कितना थका देता है। कई बार आपका घर एक छोर पर और ऑफिस दूसरे छोर पर होता है और ऐसे में लगता है मानो ट्रैवल में ही आधा दिन निकल जाएगा। मेरा हाल भी कुछ यूं ही है। ये कहानी मेरी यानी अदिति की है। मैं सेंट्रल दिल्ली में जॉब करती हूं और मेरा घर गाजियाबाद में है, ऐसे में रोजाना कम से कम डेढ़ घंटा ऑफिस आने में और डेढ़-दो घंटे ऑफिस से घर पहुंचने में लग ही जाते हैं। मैं कई बार ऑफिस से घर जाने के लिए कैब लेती हूं, ताकि थोड़ा रिलैक्स होकर घर पहुंच जाऊं और दिनभर की थकान के बाद यूं भी मेट्रो में धक्के खाने की हिम्मत कम ही बचती है। ये बात लगभग दो महीने पुरानी है, मैंने रोज की तरह ही ऑफिस से घर जाने के लिए कैब बुक की। हालांकि, उस दिन मैं ऑफिस से निकलने में थोड़ा लेट हो गई थी और मैंने लगभग 8 बजे कैब बुक की थी, इरादा वही सुकून से घर पहुंचने का था, लेकिन उस दिन कैब में मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसने मेरे अंदर एक ऐसा डर पैदा कर दिया कि...
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मैं कैब में बैठी और रोजाना की तरह ही ड्राइवर को ओटीपी बताया। इसके बाद उसने राइड स्टार्ट की। ड्राइवर बहुत तेज कैब चला रहा था और एक-दो बार तो मुझे ऐसा लगा मानो एक्सीडेंट की हो जाएगा। इतना ही नहीं, वो फोन पर किसी से जोर-जोर से गाली-गलौच करते हुए बात कर रहा था, मुझे अनकम्फर्टेबल फील हो रहा था, मैंने ड्राइवर से गाड़ी कम स्पीड में चलाने और ढंग से बात करने के लिए कहा। मैंने उसे कहा कि पीछे कोई बैठा है, आपको इस तरह गाली देकर बात नहीं करनी चाहिए, तो उसने मुझे जवाब में कहा, "तो आपको गाली थोड़े न दे रहा हूं मैडम जी..." इसके बाद वो हंसने लगा, उसकी हंसी मानो मुझे चुभ रही थी। एक बार मैंने सोचा कि कैब से उतर जाऊं, लेकिन फिर मैंने सोचा, जाने देती हूं...जल्दी घर भी तो पहुंचना था। खैर, मैंने ड्राइवर को गाड़ी धीमे चलाने और सही से बात करने को लेकर दोबारा चेतावनी दे दी और कानों में एयरपॉड्स लगाकर मैं गाने सुनने लगी, लेकिन अब शायद जो होने वाला था, वो मेरी सोच से भी परे था।
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हमने आधा सफर भी तय नहीं किया था और फिर कैब में ड्राइवर ने कुछ स्प्रे किया। मैंने पूछा कि ये क्या स्प्रे कर रहे हो, तो उसने जवाब में कहा कि एयर फ्रेशनर है, गाड़ी में अच्छी खुशबू आएगी। हालांकि, न तो मुझे उसका इरादा अच्छा लग रहा था और न ही वो खुशबू। इसके बाद कुछ मिनटों में मुझे लगा मानो मेरा सिर भारी हो रहा है और तभी ड्राइवर ने गाड़ी की स्पीड तेज कर दी। मैंने झटके से विंडो का ग्लास ओपन किया ताकि उसने जो भी स्प्रे किया है, वो बाहर निकले और मैं सांस ले पाऊं। अब तक मैं समझ चुकी थी कि कुछ ठीक नहीं है, मैंने ड्राइवर से गाड़ी रोकने को कहा, पर उसने गाड़ी नहीं रोकी, बल्कि वो पीछे मुड़कर मुझे छूने की कोशिश करने लगा और काफी गलत बातें बोलने लगा। उसने विंडो बंद करने की भी कोशिश की, लेकिन मैंने हिम्मत दिखाई और मैं विंडो से अपना फेस बाहर की तरफ निकालकर जोर से चिल्लाई...मेरी किस्मत शायद अच्छी थी कि पास से ही एक पुलिस की गाड़ी जा रही थी और उन्होंने तुरंत कैब वाले को रोक दिया। मैं जब तक बाहर निकली, मेरा सिर दर्द से फट रहा था और मुझे चक्कर आने लगे थे। मैंने उन्हें पूरा वाकया बताया या शायद पूरी बात नहीं बता पाई और उससे पहले ही बेहोश हो गई। ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और मैंने होश आने पर खुद को अस्पताल में पाया। इस घटना ने मुझे सुन्न कर दिया था। ये कुछ ऐसा था, जो मैं सोच भी नहीं सकती थी।
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महिलाओं को यात्रा करते वक्त सुरक्षित महसूस करने का पूरा हक है। अगर आपके साथ सफर में कोई भी गलत हरकत हो, तो आपको डरने के बजाय खुलकर आवाज उठानी चाहिए। साथ ही, ट्रैवल करते वक्त सतर्क रहना भी बहुत जरूरी है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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