
होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है लेकिन शास्त्रों के अनुसार इस दिन की पूजा और परंपराओं के कुछ कड़े नियम होते हैं। अक्सर अनजाने में हम कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिनका हमारे जीवन और परिवार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। होलिका दहन की अग्नि को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है इसलिए इसकी पूजा से पहले और बाद में मर्यादा और शुद्धता का पालन करना अनिवार्य है। मान्यता है कि यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए, तो घर की सुख-समृद्धि बाधित हो सकती है और मानसिक या शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइए जानते हैं वे कौन सी सामान्य गलतियां हैं जिन्हें करने से हमें बचना चाहिए।
होलिका दहन की पूजा से पहले सबसे बड़ी गलती सूतक या अशुद्धि की अवस्था में पूजा स्थल पर जाना है। अगर परिवार में किसी का जन्म या मृत्यु हुई हो तो सार्वजनिक होलिका की पूजा से बचना चाहिए।

इसके अलावा, पूजा के लिए जाते समय काले या नीले रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है क्योंकि ये रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। पूजा की थाली में बासी फूल या अशुद्ध सामग्री का प्रयोग न करें।
साथ ही, होलिका दहन के स्थान पर कूड़ा-करकट या अपवित्र वस्तुएं फेंकना भी एक गंभीर गलती है जिससे दोष लगता है।
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होलिका दहन के समय अग्नि की परिक्रमा करते समय कभी भी उल्टी दिशा में न घूमें। हमेशा घड़ी की सुई की दिशा यानी कि दक्षिणावर्त में ही परिक्रमा करें।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि नवविवाहित महिलाओं को अपनी पहली होली पर होलिका जलते हुए नहीं देखनी चाहिए, इसे शास्त्रों में वर्जित माना गया है।
दहन के बाद, जलती हुई अग्नि में प्लास्टिक या चमड़े जैसी अपवित्र वस्तुएं न डालें। अग्नि ठंडी होने से पहले वहां से राख उठाना भी गलत माना जाता है, हमेशा अगले दिन सुबह ही पवित्र राख घर लानी चाहिए।
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होलिका दहन वाले दिन सफेद खाद्य पदार्थों जैसे दूध, दही, चावल या सफेद मिठाई का खुला दान करने या किसी बाहरी व्यक्ति से इन्हें लेने से बचना चाहिए।

लोक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं और सफेद वस्तुओं के जरिए 'टोने-टोटके' का डर रहता है। साथ ही, इस दिन मांस-मदिरा का सेवन करके पूजा में शामिल होना भारी पितृ दोष और आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।
घर की महिलाओं को इस दिन बाल खुले रखकर बाहर नहीं निकलना चाहिए, विशेषकर दहन के समय।
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