Thu Feb 12, 2026 | Updated 04:14 AM IST
why water vessel should not be brought home empty after offering water

Mahashivratri 2026: शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद लोटा घर पर खाली क्यों नहीं लाना चाहिए? जानें इसका महत्‍व

आइए महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग अभिषेक के बाद खाली लोटा घर न लाने का आध्यात्मिक महत्व के बारे में जानते हैं। ज्योतिषी सिद्धार्थ एस. कुमार से समझें क्यों अभिषेक का जल शिव ऊर्जा और पूर्ण संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
Editorial
Updated:- 2026-02-11, 12:55 IST

अक्सर आपने सुना होगा कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद लोटा घर पर खाली नहीं लाना चाहिए। इसके पीछे सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी छिपा है। ऐसा क्यों कहा जाता है और इसका क्या महत्व है? आइए महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एस्ट्रोलॉजर सिद्धार्थ एस. कुमार से विस्तार से जानते हैं।

शिवलिंग पर जल चढ़ाना केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि ऊर्जा के आदान-प्रदान की सूक्ष्म प्रक्रिया मानी जाती है। जब भक्त श्रद्धा और संकल्प के साथ शिवलिंग का अभिषेक करता है, तब वह जल उनके मन, भावनाओं और कामनाओं की ऊर्जा को अपने भीतर समेट लेता है। शिव तत्त्व के संपर्क में आने के बाद वह जल साधारण नहीं रह जाता, बल्कि सकारात्मक और सात्त्विक ऊर्जा से भर जाता है।

इसी कारण शास्त्रों में यह स्पष्ट कहा गया है कि अभिषेक के बाद जल का लोटा घर खाली नहीं लाना चाहिए। मान्यता है कि खाली लोटा घर लाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह टूट जाता है, जबकि इसमें थोड़ा सा जल या प्रसाद रखकर लाने से शिव कृपा, शांति और समृद्धि घर तक साथ आती है।

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अभिषेक के बाद लोटा क्या बन जाता है?

अभिषेक के समय जल केवल जल नहीं रहता। वह आपकी प्रार्थना, आपकी मानसिक स्थिति और आपकी कामना को धारण कर लेता है। शिवलिंग के संपर्क में आने के बाद वह जल पात्र एक प्रकार से ऊर्जा-वाहक बन जाता है। यदि इस पात्र को खाली अवस्था में घर लाया जाता है, तो वह ऊर्जा अधूरी और असंतुलित मानी जाती है।

खाली लोटा घर लाने से क्या प्रभाव पड़ता है?

वैदिक दृष्टि में खाली लोटा शून्यता का प्रतीक है। जब अभिषेक के बाद वही लोटा खाली करके घर लाया जाता है, तब यह संकेत देता है कि आपने संकल्प तो किया, लेकिन उसे पूर्णता तक नहीं पहुंचाया। ऐसा माना जाता है कि इससे मनोकामना में विलंब, मानसिक अस्थिरता, बार-बार कार्यों का अटकना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।

वैदिक परंपरा में इसका भी संतुलित और सुरक्षित समाधान बताया गया है, ताकि संकल्प अधूरा न रहे और शिव कृपा बनी रहे।

लोटे को कभी भी पूरी तरह खाली न करें

यदि अभिषेक के बाद लोटा घर लाना हो, तो इसे पूरी तरह खाली न करें। लोटे में थोड़ा जल अवश्य रहने दें। यह जल शिव-संवित से युक्त माना जाता है और संकल्प की निरंतरता बनाए रखता है।

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लोटे में तुलसी या बेलपत्र डालें

घर लाने से पहले लोटे में एक बेलपत्र या एक-दो तुलसी पत्ते डाल दें। यह लोटे को ऊर्जा-संरक्षण देता है और नकारात्मक शून्यता से बचाता है।

घर आकर जल का सम्मानजनक इस्‍तेमाल करें

घर पहुंचने के बाद इस जल को किसी पवित्र पौधे की जड़ में अर्पित करें या घर के मुख्य द्वार पर थोड़ा सा छिड़क दें। जल को नाली या अपवित्र स्थान पर न डालें।

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लोटे को तुरंत साफ कर अलग रखें

जल अर्पित करने के बाद लोटे को साफ जल से धोकर पूजा स्थान में अलग रख दें। उसी दिन इसे सामान्य घरेलू उपयोग में न लें। इससे अभिषेक की ऊर्जा सुरक्षित रूप से समाप्त होती है।

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एक छोटा मानसिक समापन करें

घर लाकर यह भाव रखें, ''मेरी पूजा और संकल्प शिव चरणों में पूर्ण हुआ।'' यह संकल्प-चक्र को पूरा करता है।

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