
अक्सर आपने सुना होगा कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद लोटा घर पर खाली नहीं लाना चाहिए। इसके पीछे सिर्फ परंपरा ही नहीं, बल्कि गहरा आध्यात्मिक अर्थ भी छिपा है। ऐसा क्यों कहा जाता है और इसका क्या महत्व है? आइए महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर एस्ट्रोलॉजर सिद्धार्थ एस. कुमार से विस्तार से जानते हैं।
शिवलिंग पर जल चढ़ाना केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि ऊर्जा के आदान-प्रदान की सूक्ष्म प्रक्रिया मानी जाती है। जब भक्त श्रद्धा और संकल्प के साथ शिवलिंग का अभिषेक करता है, तब वह जल उनके मन, भावनाओं और कामनाओं की ऊर्जा को अपने भीतर समेट लेता है। शिव तत्त्व के संपर्क में आने के बाद वह जल साधारण नहीं रह जाता, बल्कि सकारात्मक और सात्त्विक ऊर्जा से भर जाता है।
इसी कारण शास्त्रों में यह स्पष्ट कहा गया है कि अभिषेक के बाद जल का लोटा घर खाली नहीं लाना चाहिए। मान्यता है कि खाली लोटा घर लाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह टूट जाता है, जबकि इसमें थोड़ा सा जल या प्रसाद रखकर लाने से शिव कृपा, शांति और समृद्धि घर तक साथ आती है।

अभिषेक के समय जल केवल जल नहीं रहता। वह आपकी प्रार्थना, आपकी मानसिक स्थिति और आपकी कामना को धारण कर लेता है। शिवलिंग के संपर्क में आने के बाद वह जल पात्र एक प्रकार से ऊर्जा-वाहक बन जाता है। यदि इस पात्र को खाली अवस्था में घर लाया जाता है, तो वह ऊर्जा अधूरी और असंतुलित मानी जाती है।
वैदिक दृष्टि में खाली लोटा शून्यता का प्रतीक है। जब अभिषेक के बाद वही लोटा खाली करके घर लाया जाता है, तब यह संकेत देता है कि आपने संकल्प तो किया, लेकिन उसे पूर्णता तक नहीं पहुंचाया। ऐसा माना जाता है कि इससे मनोकामना में विलंब, मानसिक अस्थिरता, बार-बार कार्यों का अटकना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।
वैदिक परंपरा में इसका भी संतुलित और सुरक्षित समाधान बताया गया है, ताकि संकल्प अधूरा न रहे और शिव कृपा बनी रहे।
यदि अभिषेक के बाद लोटा घर लाना हो, तो इसे पूरी तरह खाली न करें। लोटे में थोड़ा जल अवश्य रहने दें। यह जल शिव-संवित से युक्त माना जाता है और संकल्प की निरंतरता बनाए रखता है।

घर लाने से पहले लोटे में एक बेलपत्र या एक-दो तुलसी पत्ते डाल दें। यह लोटे को ऊर्जा-संरक्षण देता है और नकारात्मक शून्यता से बचाता है।
घर पहुंचने के बाद इस जल को किसी पवित्र पौधे की जड़ में अर्पित करें या घर के मुख्य द्वार पर थोड़ा सा छिड़क दें। जल को नाली या अपवित्र स्थान पर न डालें।
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जल अर्पित करने के बाद लोटे को साफ जल से धोकर पूजा स्थान में अलग रख दें। उसी दिन इसे सामान्य घरेलू उपयोग में न लें। इससे अभिषेक की ऊर्जा सुरक्षित रूप से समाप्त होती है।
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घर लाकर यह भाव रखें, ''मेरी पूजा और संकल्प शिव चरणों में पूर्ण हुआ।'' यह संकल्प-चक्र को पूरा करता है।
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