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Rangbhari Ekadashi Puja Vidhi 2025: रंगभरी एकादशी के दिन इस विधि से करें शिव-पार्वती की पूजा? जानें सामग्री और मंत्र

ऐसा माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।  
Editorial
Updated:- 2025-03-09, 05:30 IST

पूजा का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ पहली बार काशी में होली खेली थी, और तभी से फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'रंगभरी' नाम से जाना जाने लगा। यह दिन विशेष रूप से पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। अब, आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से रंगभरी एकादशी की पूजा विधि, सामग्री और मंत्रों के बारे में विस्तार से।

रंगभरी एकादशी 2025 की पूजा सामग्री (Rangbhari Ekadashi Puja Samagri 2025)

rangbhari ekadashi 2025 ki puja

रंगभरी एकादशी के दिन पूजा सामग्री के तौर पर आंवले का फल, फल और फूल, धूप, दीपक और घी, अनाज, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, हल्दी, सिंदूर, अबीर, गुलाल, चंदन, नारियल, मिठाई, दान सामग्री, कच्चा सूत या मौली, दूध और जल आदि शामिल करें।

इन सामग्रियों का उपयोग भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में विशेष रूप से किया जाता है, ताकि पूजा विधिवत हो सके और भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त हो। हर एक सामग्री का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है, जो पूजा के दौरान श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है।

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रंगभरी एकादशी 2025 की पूजा विधि (Rangbhari Ekadashi Puja Vidhi 2025)

rangbhari ekadashi 2025 puja

रंगभरी एकादशी के दिन, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर पूजाघर में घी का दीपक जलाकर हाथ जोड़कर भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष व्रत का संकल्प लें। इसके बाद एक वेदी पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

अब भगवान शिव और माता पार्वती को पीले चंदन से तिलक करें और उन्हें पीले फूलों की माला पहनाएं। फिर पंजीरी, फल, पंचामृत, पंचमेवा, तुलसी पत्ते आदि का भोग अर्पित करें और भगवान शिव तथा माता पार्वती का ध्यान करें। इसके बाद आंवले वृक्ष की पूजा करें।

वृक्ष के नीचे नवरत्न युक्त कलश स्थापित कर धूप-दीप जलाएं। साथ ही रोली, चंदन, पुष्प, फल, अक्षत आदि अर्पित कर पूजा करें। यदि आसपास आंवला वृक्ष न हो तो आप प्रसाद के रूप में शिव-शक्कोति आंवला फल या बेलपत्र चढ़ा सकते हैं। अंत में आरती करें और अगले दिन व्रत पारण करें।

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रंगभरी एकादशी 2025 के पूजा मंत्र (Rangbhari Ekadashi Puja Mantra 2025)

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रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के 'ॐ नमः शिवाय', 'ॐ शं शिवाय नमः', 'सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते', 'ॐ गौरीशंकराय नमः' आदि का जाप करना चाहिए। इससे वैवाहिक जीवन का दुख दूर हो जाता है।

रंगभरी एकादशी के दिन इन मंत्रों के अलावा एक ओर मंत्र का उच्चारण अवश्य करना चाहिए और वह है शिव पार्वती एकादशी मंत्र। यह मंत्र कुछ इस प्रकार से है: ॐ उमा महेश्वराभ्यां नमः॥ इस मंत्र का जाप करने से रंगभरी एकादशी के व्रत का सौ गुना फल प्राप्त होता है।

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