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rangbhari ekadashi 2025 shubh muhurat

Rangbhari Ekadashi 2025 Date: कब है रंगभरी एकादशी? जानें पूजा से लेकर रंग अर्पित करने का शुभ मुहूर्त और महत्व

रंगभरी एकादशी के दिन बांके बिहारी जी में जमकर गुलाल एवं अबीर उड़ता है और टेसुओं के फूलों से बने रंग को विशेष रूप से बांके बिहारी जी के चरणों में अर्पित किया जाता है।  
Editorial
Updated:- 2025-03-05, 14:03 IST

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। रंगभरी एकादशी के दिन बांके बिहारी जी में जमकर गुलाल एवं अबीर उड़ता है और टेसुओं के फूलों से बने रंग को विशेष रूप से बांके बिहारी जी के चरणों में अर्पित किया जाता है। इसके अलावा, जो लोग इस एकादशी का व्रत रखते हैं, वे लोग पूजा के दौरान भगवान विष्णु को रंग अर्पित करते हैं। ऐसे में ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि इस साल कब पड़ रही है रंगभरी एकादशी, क्या है इस पूजा से लेकर रंग अर्पित करने तक का शुभ मुहूर्त एवं महत्व।

रंगभरी एकादशी 2025 कब है?

rangbhari ekadashi 2025 bhagwan vishnu ko lagane ka shubh samay

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की रंगभरी एकादशी का आरंभ 9 मार्च, दिन रविवार को रात 7 बजकर 45 मिनट पर होगा और इसका समापन 10 मार्च, दिन सोमवार को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, रंगभरी एकादशी का व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा।

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रंगभरी एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त

rangbhari ekadashi 2025 bhagwan vishnu ko rang chadhane ka shubh muhurat

रंगभरी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 59 मिनट से शुरू होगा और सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। ऐसे में स्नान-दान और पूजा के लिए ये दोनों मुहूर्त बहुत शुभ हैं।

रंगभरी एकादशी के दिन गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 24 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 7 मिनट से रात 12 बजकर 55 मिनट तक होगा। ये दोनों मुहूर्त भगवान विष्णु को पीले रंग का गुलाल अर्पित करने के लिए उत्तम है।

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रंगभरी एकादशी 2025 महत्व

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रंगभरी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भोलेनाथ और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। आंवले के पेड़ की भी इस दिन विधिपूर्वक पूजा की जाती है और इस पेड़ को किसी मंदिर में लगाना शुभ होता है।

इस दिन विशेष रूप से काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी में भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है। रंगभरी एकादशी का व्रत पूरा करने के बाद श्रद्धा के अनुसार अन्न, धन और अन्य वस्तुओं का दान करना चाहिए, जो पुण्य प्राप्ति का उत्तम माध्यम माना जाता है।

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