
आमलकी एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस एकादशी को आमलकी एकादशी, रंग भरी एकादशी या आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले का विशेष महत्व होता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करना, आंवले का सेवन करना और आंवले का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस एकादशी का संबंध आंवला वृक्ष से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों में आंवले को पवित्र, औषधीय और दिव्य गुणों से युक्त बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करने से समस्त पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन विधि-विधान से विष्णु जी के साथ आंवले की पूजा करने से शुभ फल मिलते हैं। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें आमलकी एकादशी की पूजा विधि के बारे में।


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अगर आप यहां बताई विधि से विष्णु जी का और आंवले के वृक्ष का पूजन करेंगी तो पूजा का पूर्ण फल मिलेगा। आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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