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Varuthini Ekadashi Puja Vidhi And Mantra: घर पर कैसे करें वरुथिनी एकादशी का पूजन? जानें पूजा सामग्री और मंत्र

घर पर आप भी वरुथिनी एकादशी की पूजा करने के बारे में सोच रही हैं, तो ऐसे में सही पूजा विधि और मंत्रों का उच्चारण जरूर करें। आइए इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-04-11, 12:30 IST

वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी यानी वरुथिनी एकादशी सौभाग्य और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी गई है। इस दिन भगवान विष्णु के मधुसूदन स्वरूप की पूजा होती है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करता है, उसे दस हजार वर्षों तक तपस्या करने के समान फल प्राप्त होता है। साथ ही मोक्ष प्राप्त होता है। ऐसे में आप भी इस दिन के पूजन की पूरी विधि और मंत्रों के बारे में पंडित जन्मेश द्विवेदी से जान सकती हैं, ताकि आपकी पूजा भी सफल हो सके।

वरुथिनी एकादशी की पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान पर एक चौकी बिछाएं, उस पर पीला कपड़ा डालें और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। पास में ही जल से भरा कलश रखें।
  • भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं और फिर शुद्ध जल से अभिषेक करें। उन्हें पीले वस्त्र और पीला चंदन अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाएं और भगवान को पीले फूल व माला चढ़ाएं।
  • वरुथिनी एकादशी पर खरबूजे का भोग लगाना अत्यंत शुभ होता है। ध्यान रहे कि भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें।
  • वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद ओम जय जगदीश हरे की आरती करें।
  • इस एकादशी पर रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। रात के समय भजन-कीर्तन करना पुण्यदायी होता है।

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वरुथिनी एकादशी के शक्तिशाली मंत्र

  • द्वादश अक्षर मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। इसका अर्थ है मैं भगवान वासुदेव (सर्वव्यापी ईश्वर) को नमन करता हूं। यह मंत्र मन को शांति प्रदान करता है और मोक्ष की राह खोलता है।
  • श्री विष्णु मंत्र: मंगलम भगवान विष्णुः, मंगलम गरुणध्वजः। मंगलम पुण्डरीकाक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥ इसका अर्थ है भगवान विष्णु मंगलकारी हैं, जिनका ध्वज गरुड़ है वे मंगलकारी हैं। जिनकी आंखें कमल के समान हैं वे भगवान विष्णु मंगलकारी हैं, वे श्री हरि हमारे लिए मंगल करें।
  • क्षमा मंत्र: अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥ इसका अर्थ है हे परमेश्वर! दिन-रात मेरे द्वारा हजारों अपराध होते रहते हैं। मुझे अपना दास समझकर मेरे उन अपराधों को क्षमा करें।

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वरुथिनी एकादशी के नियम

  • एकादशी का नियम दशमी की रात से ही शुरू हो जाता है। दशमी को मसूर की दाल, शहद और कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए।
  • इस दिन किसी की बुराई न करें और मन में शुद्ध विचार रखें।
  • पूजा के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न और जल का दान अवश्य करें।

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वरुथिनी एकादशी का व्रत शरीर को शुद्ध और आत्मा को पवित्र करता है। यदि आप पूरी श्रद्धा और सही मंत्रों के साथ भगवान विष्णु की आराधना करें। इससे आपकी पूजा सफल मानी जाएगी।

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Image credit-Freepik

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