
हिंदू धर्म में किसी भी एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है और इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हर महीने दो एकादशी तिथियां होती हैं और पूरे साल में 24 एकादशी मनाई जाती हैं। हर महीने की एकादशी का विशेष महत्व होता है और इस दिन की पूजा विधि भी अलग होती है। इसी तरह अप्रैल महीने में पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी भी बहुत खास है। यह तिथि हिंदू पंचांग के वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ती है और इसका बहुत महत्व होता है। वैशाख महीने की एकादशी को शास्त्रों में भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस साल भी वरुथिनी एकादशी की सही तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें 13 या 14 अप्रैल, कब पड़ेगी वरुथिनी एकादशी, इसका महत्व क्या है और किस शुभ मुहूर्त में पूजा करना फलदायी हो सकता है?


हिंदू धर्म शास्त्रों की मानें तो वरुथिनी एकादशी का व्रत करने वाले व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य बना रहता है और सुख समृद्धि आती है। इस दिन व्रत करने वाले भक्तों के जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। इस दिन का व्रत कई एकादशियों का एक साथ फल देता है।वरुथिनी एकादशी के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को भगवान विष्णु किसी भी समस्या से जल्द ही बाहर निकालते हैं। इस एकादशी पर व्रत करने से परिवार और रिश्तों में सामंजस्य बना रहता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा दृष्टि मिलती है।

इस प्रकार वरुथिनी एकादशी के दिन जो व्यक्ति सच्चे ह्रदय से विष्णु जी का पूजन करता है उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में समृद्धि बनी रहती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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