Tue Apr 14, 2026 | Updated 08:02 AM IST
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First Pradosh Vrat April 2026: 14 या 15 अप्रैल, कब रखा जाएगा वैशाख का पहला प्रदोष व्रत? यहां जानें सही तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

अप्रैल महीने का पहला प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बहुत खास माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं सुख-समृद्धि का आगमन होता है। अप्रैल महीने में प्रदोष की तिथि को लेकर लोगों के मन में थोड़ा भ्रम बना हुआ है। आइए यहां जानें इसकी सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
Editorial
Updated:- 2026-04-14, 05:02 IST

प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन महादेव की पूजा पूरे भक्ति भाव से की जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद लिया जाता है। हर महीने की द्वादशी या त्रयोदशी तिथि में जब भी प्रदोष मुहूर्त प्राप्त होता है तब प्रदोष का व्रत रखा जाता है। किसी भी महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में यह व्रत रखा जाता है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन होता है तब इसे शनि प्रदोष कहा जाता है, जब या रविवार के दिन होता है तब रवि प्रदोष कहा जाता है और इसी तरह से अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को अलग नामों से जाना जाता है। अप्रैल महीने में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को लेकर लोगों के मन में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि अप्रैल में पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा?

अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत कब है?

pradosh vrat in april

  • हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख महीने यानी कि अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को रखा जाएगा।
  • कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ-14 अप्रैल, मध्य रात्रि के बाद 12 बजकर 12 मिनट पर
  • त्रयोदशी तिथि का समापन-15 अप्रैल, बुधवार, रात्रि 10:31 बजे होगा।
  • उदया तिथि के अनुसार अप्रैल का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026, बुधवार के दिन रखा जाएगा।
  • चूंकि यह व्रत बुधवार के दिन रखा जाएगा , इसलिए इसे बुध प्रदोष कहा जाएगा।

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अप्रैल प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त

  • बुध प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 15 अप्रैल, बुधवार, शाम 6:56 बजे से रात्रि 9:13 बजे तक।
  • भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उत्तम माना जाता है।
  • इस दिन विशेष रूप से 15 अप्रैल, सायं 6:01 बजे से 7:31 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ रहेगा।

बुध प्रदोष व्रत का महत्व क्या है?

बुध प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है और जब यह बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। बुध प्रदोष व्रत करने से विशेष रूप से बुद्धि, वाणी और व्यापार से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है। यह व्रत मानसिक शांति प्रदान करता है और परिवार में सुख-समृद्धि लाता है। यदि आप संतान प्राप्ति को इच्छा रखती हैं, तो यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।

बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि क्या है?

pradosh puja vidhi

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूरे दिन व्रत का संकल्प लेकर व्रत करें और भगवान शिव का ध्यान करें।
  • घर के मंदिर या शिवालय में एक चौकी पर शिवलिंग की स्थापना करें।
  • प्रातः पूजन के बाद प्रदोष काल में भगवान शिव और पारवती की पूजा शुरू करें।
  • सबसे पहले भगवान शिव का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
  • इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें।
  • ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
  • माता पार्वती की भी पूजा करें और उन्हें श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

यदि आप यहां बताई विधि से शिव जी का पूजन प्रदोष व्रत के दिन करेंगी तो आपकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होगी। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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