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Aap Beeti: 'ट्रेन में मेरी सीट के सामने बैठा शख्स बार-बार अपनी....' यात्रा के दौरान हुई इस शर्मनाक घटना के बाद मैंने जो किया, वो हर महिला को जानना चाहिए

भीड़भाड़ में या पब्‍ल‍िक ट्रांसपोर्ट में आए द‍िन मह‍िलाओं को प्रताड़‍ित करने की कई खबरें आती रहती हैं। इससे उनके द‍िमाग पर बुरा असर पड़ता है। कुछ तो आवाज उठा लेती हैं, तो कुछ लोग डरी सहमी सबकुछ बर्दाश्‍त कर जाती हैं। लेक‍िन अगर आपको मानस‍िक सुकून चाह‍िए, तो आवाज उठाना जरूरी है।
Editorial
Updated:- 2026-03-30, 14:00 IST

उस दिन मैं बिल्कुल सामान्य तरीके से घर जाने के लिए निकली थी। मैं घर से दूर रहकर जॉब करती हूं और वीकेंड पर घर जाती हूं। एक रोज मैं ऑफिस करके ट्रेन से घर जाने को निकली थी। मैंने रिजर्वेशन करवा रखा था। जब हम रिजर्वेशन करवा लेते हैं तो लगता है कि सफर में कोई परेशानी नहीं होगी। ऐसे मेरे मन में भी था। मुझे लखनऊ से रायबरेली जाना था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि ट्रेन का ये सफर मेरे लिए इतना Uncomfortable हो जाएगा।

मैं अपनी सीट पर जाकर बैठ गई थी। थोड़ी देर बाद मेरी नजर सामने बैठे एक आदमी पर पड़ी। शुरू में तो सब ठीक लग रहा था, लेकिन कुछ ही देर में मुझे अजीब सा लगने लगा क्योंकि वो आदमी बार-बार अपनी जिप खोल रहा था और उसने अंडर वियर भी नहीं पहन रखा था। पहले तो मुझे लगा कि शायद ये गलती से हुआ होगा, लेकिन जब वो आदमी बार-बार यही हरकतें कर रहा था, तब मुझे लगा कि ये सब जानबूझकर हो रहा है।

real life women harrassment story in train

मेरी सीट के एकदम सामने बैठा था वो आदमी 

मुझे सबसे ज्यादा दिक्कत इसलिए हो रही थी क्योंकि ये आदमी बिल्कुल मेरी सीट के सामने बैठा था। मतलब चाहकर भी नजरें पूरी तरह हटाना आसान नहीं हो पा रहा था। मैं बार-बार इधर-उधर देखने लगती, कहीं फोन चलाने लगती तो कहीं किसी से बातें करने लगती, लेकिन वो हरकत बार-बार मेरा ध्यान खींच रही थी। मेरे अगल-बगल भी लोग बैठे थे, लेकिन किसी ने कुछ भी बोलना जरूरी नहीं समझा।

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बहुत डर गई थी मैं

सब ऐसे बैठे थे जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। उस समय मुझे बहुत अकेलापन महसूस हो रहा था। ऐसा लग रहा था कि मैं भीड़ में भी अकेली हूं। मेरे मन में बहुत सारी बातें चल रही थीं कि क्या करूं, कुछ बोलूं या शांत रहूं? कहीं बात बढ़ गई तो? लेकिन फिर मुझे लगा कि अगर मैं चुप रही, तो शायद वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा और मेरा सफर भी अभी लंबा है।

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ट्वीट कर ल‍िया स्‍टैंड 

तभी मैंने उसे कुछ बोलने के बजाय अपने फोन से ट्वीट किया। मैंने रेलवे और उससे जुड़े अधिकारियों को टैग करते हुए समस्या बताई कि इस सीट पर एक आदमी बैठा है जो गलत हरकतें कर रहा है। उस समय मुझे यही सबसे आसान लगा, क्योंकि मैं किसी से भिड़ना नहीं चाहती थी। सच बताऊं तो मुझे लगा नहीं था कि इतनी जल्दी एक्शन लिया जाएगा।

कुछ ही समय में लि‍या एक्‍शन

हालांकि, कुछ ही समय बाद ट्रेन में मौजूद सुरक्षा कर्मी (शायद RPF) मेरे पास आए। उन्होंने मुझसे बात की और फिर उस आदमी को डांटा। इसके बाद उसकी सीट बदल दी गई। जब उसकी सीट चेंज की गई तब जाकर मुझे थोड़ा सुकून मिला। क्योंकि जो डर और घुटन मैं इतनी देर से फील कर रही थी, वो धीरे-धीरे कम होने लगी। सबसे अच्छी बात ये लगी कि मेरी शिकायत को गंभीरता से लिया गया।

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चुप रहना समस्‍या का समाधान नहीं

इस घटना से मुझे ये सीख मिली कि चुप रहना समस्या का समाधान नहीं है। हम अक्सर डर या शर्म की वजह से कुछ नहीं कहते, लेकिन इससे सामने वाले को और ज्यादा हिम्मत मिल जाती है।

real life women harrassment story in train (1)

ऐसी स्थिति में फंसने पर क्या करें?

  • हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें
  • सोशल मीडिया की मदद लें
  • सीधे पुलिस से भी संपर्क कर सकती हैं

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क्या सीख मिली?

  • अगर कुछ गलत लग रहा है, तो उसे नजरअंदाज न करें
  • आसपास के लोगों से मदद मांगने में हिचकिचाएं नहीं
  • सोशल मीडिया भी आपकी मदद कर सकता है
  • खुद की सुरक्षा का सबसे ज्यादा ध्यान दें

 तो अगर आप भी ऐसी किसी स्थिति में फंस जाती है तो बेहतर है कि चुप रहने के बजाय एक्शन लिया जाए। इससे सामने वाले को सबक भी मिलेगी और आपको भी घुट-घुट कर सफर नहीं करना पड़ेगा। साथ ही अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

Image Credit- Freepik

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