-1769157775773.webp)
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्मार्टफोन एक डिजिटल बेबीसीटर बन गया है। ऐसे में माता-पिता बच्चों के हाथ में कभी भी फोन थमा देते हैं। खासतौर पर तब जब बच्चा रोता है शैतानी करता है तो माता-पिता से अपना काम शांति से करने के लिए उसके हाथों में फोन चला कर देते हैं। पहली नजर में यह एक आसान समाधान लगता है, लेकिन ये बैड पेरेंटिंग की श्रेणी में आता है और बच्चे के भविष्य के लिए बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है। डिजिटल युग में फोन के जरिए पीछा छुड़ाने की यह आदत आपके बच्चे को तीन बड़े खतरों की तरफ ले जा सकती है। ऐसे इनके बारे में पता होना जरूरी है। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि फोन के जरिए बच्चों से पीछा छुड़ाने की आदत कैसे खतरनाक साबित हो सकती है। इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की। पढ़ते हैं आगे...
बच्चे का शुरुआती सफर बेहद कोमल होता है। ऐसे में माता-पिता का स्पर्श, इंसानी बातचीत, शारीरिक गतिविधियां आदि विकसित होते हैं। जब बच्चा घंटों स्क्रीन पर समय बीताता है तो उसका दिमाग न केवल पैसेव इनफार्मेशन लेता है, जिससे उसकी एकाग्रता कम हो जाती है और अलग तरीके से सोचना शुरू कर देता है।
-1769158218691.jpg)
बता दें कि इससे बच्चों की सोचने समझने की क्षमता प्रभावित होती है और अटेंशन डिफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। बच्चे हमारी दुनिया से कट कर एक वर्चुअल दुनिया में रह जाते हैं।
बता दें कि यह आदत बच्चे के अंदर भावनाओं के कमी को पैदा करती है। पेरेंटिंग का मतलब होता है बच्चे को भावनाओं को संभालना सीखाना। जब बच्चा बहुत रोता है या दुखी होता है और आप उसे फोन दे देते हैं तो वह अपनी भावनाओं को मैनेज करना नहीं सीख पाता। वह यह नहीं जान पता कि इन इमोशंस से कैसे लड़ें या दूसरों से कैसे बात करें। ऐसे में बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और जिद्द करने लगते हैं। उनमें सामाजिक मेलजोल की भी कमी हो जाती है, जिससे भविष्य में उन्हें दोस्त बनाने में दिक्कत होती है या टीम के साथ काम करने में परेशानी हो सकती है।
इसे भी पढ़ें - सैलरी हाइक की बात करने से डरते हैं? इन 5 शब्दों का करें इस्तेमाल, बॉस भी नहीं कर पाएंगे मना
फोन से निकलने वाला डिपामिन बच्चों को इसकी लत लगा देता है। इसके अलावा इंटरनेट एक खुला समंदर के रूप में देखा जाता है। बिना निगरानी के फोन इस्तेमाल करने से बच्चे अश्लील हिंसा या साइबर पुलिस के संपर्क में आते हैं। इसके लिए उनका कोमल मन तैयार नहीं होता। यह उनके मन में अक्रामक व्यवहार पैदा करता है।
-1769158236081.jpg)
नोट - आप काम के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लें और बच्चे के साथ बातें करें। उनके साथ खेलने के लिए समय निकालें। घर में जो फोन जोन बनाएं। बच्चों को खिलौने, पेंटिंग या आउटडोर गेम्स के लिए प्रोत्साहित करें।
इसे भी पढ़ें - साइबर शिकायत के लिए कौन-से दस्तावेज हैं जरूरी? रिपोर्ट दर्ज करने से पहले तैयार रखें ये लिस्ट
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Images: Freepik/pinterest
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।