
नए साल की शुरुआत में आने वाली षटतिला एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत बड़ा महत्व है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को 'षटतिला' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें तिल का प्रयोग छह विशेष तरीकों से किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने और तिल का दान करने से व्यक्ति को स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है और उसके जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। नए साल की पहली एकादशी होने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन किए गए दान-पुण्य से पूरे वर्ष घर में सुख, शांति और सौभाग्य बना रहता है। ऐसे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से आइये जानते हैं कि नए साल की पहली एकादशी के दिन क्या दान करें और क्या हैं उससे मिलने वाले लाभ?
षटतिला एकादशी पर तिल का दान सबसे प्रमुख माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जो व्यक्ति तिल का दान करता है उसे उतने ही वर्षों तक स्वर्ग में स्थान मिलता है जितने दानों का वह दान करता है। आप काले तिल या तिल से बने लड्डू और गजक का दान कर सकते हैं। तिल का दान न केवल भगवान विष्णु को प्रसन्न करता है बल्कि यह कुंडली में शनि के दोषों को भी कम करने में मदद करता है।

माघ का महीना कड़ाके की ठंड का समय होता है, इसलिए इस एकादशी पर ऊनी कपड़ों या कंबल का दान करना अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को गर्म कपड़े भेंट करने से भगवान विष्णु के साथ-साथ सूर्य देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि दूसरों को ठंड से बचाने के बदले में ईश्वर आपके जीवन के दुखों और कष्टों को दूर करते हैं।
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एकादशी के पावन अवसर पर अन्न दान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। षटतिला एकादशी पर चावल, दाल और घी का दान करना चाहिए। हालांकि, एकादशी के दिन खुद चावल खाने की मनाही होती है, लेकिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह दान आपके घर के भंडार को हमेशा भरा रखता है और आर्थिक तंगी को दूर करने में सहायक होता है।

सौभाग्य में वृद्धि के लिए इस दिन गुड़ और शुद्ध देशी घी का दान भी किया जाता है। गुड़ का संबंध सूर्य से है और घी का संबंध गुरु और विष्णु जी से है। इन दोनों चीजों के दान से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है। यदि आप घी का दान करते हैं तो इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ के महीने में जल का पात्र और जूते-चप्पल का दान करना भी बहुत लाभकारी होता है। किसी मंदिर में तांबे का लोटा दान करना या किसी राहगीर को जूते-चप्पल देना परोपकार की श्रेणी में आता है। यह छोटे-छोटे दान आपकी कुंडली के ग्रहों को शांत करते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
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image credit: herzindagi
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