
चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। यह स्वरूप शक्ति, साहस और शांति का अद्भुत संगम होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से माता की पूजा करने से जीवन के सभी भय दूर होते हैं और व्यक्ति के आत्मबल में वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि माता दुर्गा का पूजन हमेशा विधि-विधान से करने से जीवन में खुशहाली बनी रहती है और सही विधि से किया गया पूजन फलदायी होता है। नवरात्रि के नौ दिन माता के अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित होते हैं। अगर आप भी व्रत करती हैं और अलग-अलग दिनों में माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का पूजन करती हैं तो चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा विधि के बारे में ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जरूर जानें।

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष विधि से करनी चाहिए। ऐसा करने से माता का आशीर्वाद बना रहता है। आइए जानें पूजा की यही विधि क्या है-
मां की पूजा में अलग-अलग मंत्रों का विशेष महत्व होता है। इनके जाप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन शांत रहता है। यदि आप नवरात्रि के तीसरे दिन कुछ मंत्रों का जाप करें तो जीवन में सदैव मां चंद्रघंटा का आशीर्वाद बना रहता है।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली माना जाता है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी वजह से उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां के दस हाथ होते हैं, जिनमें वो विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और कमल पुष्प धारण करती हैं। उनका वाहन सिंह है, जो साहस और वीरता का प्रतीक माना जाता है। यह स्वरूप इस बात का प्रतीक होता है कि मां अपने भक्तों को शांति और सौम्यता के साथ-साथ हर संकट से बचाने के लिए रौद्र रूप भी धारण कर सकती हैं।
यदि आप चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा का पूजन यहां बताई विधि के अनुसार करेंगी तो पूजा का पूर्ण फल मिलता है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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