Fri Mar 20, 2026 | Updated 11:35 AM IST
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Navratri Day 2 Vrat Katha 2026: संकल्प और धैर्य की शक्ति हैं मां ब्रह्मचारिणी, यहां पढ़ें उनकी पौराणिक व्रत कथा

Navratri Vrat Katha 2026: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। ऐसे में अगर आप व्रत का संकल्प ले रही हैं, तो कथा का वर्णन जरूर करें, ताकि आप भी नवरात्रि के व्रत को अच्छे से पूरा कर सके।
Editorial
Updated:- 2026-03-20, 05:18 IST

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन हम मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं। यहां 'ब्रह्म' का अर्थ है 'तपस्या' और 'चारिणी' का अर्थ है 'आचरण करने वाली'। मां का यह रूप केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि उस अजेय इच्छाशक्ति का प्रतीक है जो असंभव को भी संभव बना देती है। इसलिए इनका व्रत रखने के साथ-साथ व्रत कथा भी जरूर पढ़नी चाहिए, ताकि आपके जीवन में भी तपस्या का एक नया अध्याय खुल सके। आइए इनकी पौराणिक कथा के बारे में आपको बताते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की पौराणिक कथा (Maa Brahmacharini Vrat Katha 2026)

पौराणिक कथा के अनुसार, माता ने पर्वतराज हिमालय और मैना की पुत्री के रूप में जन्म लिया। देवर्षि नारद के उपदेश पर उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या करने का संकल्प लिया। उनकी यह तपस्या कोई साधारण साधना नहीं थी, बल्कि यह हजारों वर्षों तक चलने वाला एक कठिन आत्म-बलिदान था। माता ने एक हजार वर्ष तक केवल फल-फूल खाकर व्यतीत किए। यह हमारे जीवन के उस चरण जैसा है जब हम किसी नए लक्ष्य को पाने के लिए अपनी आदतों को बदलते हैं।

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इसके बाद सौ वर्षों तक केवल सब्जियों पर निर्वाह किया। वर्षा, धूप और भीषण ठंड को सहते हुए उन्होंने खुले आकाश के नीचे रहकर तपस्या जारी रखी। यह उनके अटूट 'धैर्य' को दर्शाता है।अंततः माता ने पत्तों को खाना भी छोड़ दिया, जिसके कारण उनका नाम 'अपर्णा' पड़ा। कई हजार वर्षों की इस निराहार तपस्या ने उनके शरीर को क्षीण कर दिया, लेकिन उनके मुख का तेज और संकल्प की अग्नि और भी प्रज्वलित हो गई। देवता, ऋषि-मुनि और गंधर्व सभी हैरान रह गए कि कोई इतनी दृढ़ इच्छाशक्ति कैसे रख सकता है। अंत में, पितामह ब्रह्मा जी स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने माता से कहा "हे देवी! आज तक किसी ने ऐसी कठिन तपस्या नहीं की। तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी और भगवान शिव तुम्हें पति के रूप में अवश्य प्राप्त होंगे।" ब्रह्मा जी के आशीर्वाद के बाद माता की तपस्या सफल हुई।

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मां ब्रह्मचारिणी की यह कथा हमें सिखाती है कि जीवन के सबसे कठिन दौर में भी धैर्य और संकल्प नहीं छोड़ना चाहिए। जो भक्त इस दिन माता की पूजा करते हैं, उनके भीतर कर्तव्य पथ से न डिगने की शक्ति और आत्म-नियंत्रण का संचार होता है।

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Image credit-Freepik

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