Fri Mar 20, 2026 | Updated 03:21 AM IST
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Chaitra Navratri Date 2026: 19 मार्च से शुरू हो रही है चैत्र नवरात्रि, यहां जानें प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक का पूरा कैलेंडर

Chaitra Navratri Kab Hai 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। मुख्य रूप से नवरात्रि साल में दो बार मनाई जाती है। पहली चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि। आइए जानें इस साल चैत्र महीने में पड़ने वाली नवरात्रि की सही तिथि और घाट स्थापना के शुभ मुहूर्त के बारे में यहां विस्तार से।
Editorial
Updated:- 2026-03-18, 13:28 IST

चैत्र नवरात्रि को सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना है, जो माता दुर्गा की आराधना को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में जो व्यक्ति माता दुर्गा की नियम से पूजा करता है और श्रद्धा से व्रत करता है उसके जीवन में सदैव समृद्धि बनी रहती है। हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का आरंभ होता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष यानी नव संवत की शुरुआत भी मानी जाती है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की तिथि को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम बना हुआ है कि यह 19 मार्च को शुरू होगी या 20 मार्च को। इसके पीछे का एक कारण अमावस्या और प्रतिपदा तिथि एक ही दिन होना भी बताया जा रहा है। दरअसल ऐसा माना जा रहा है कि इस साल चैत्र अमावस्या तिथि का समापन भी 19 मार्च को सुबह ही हो रहा है। ऐसे में प्रतिपदा तिथि उदया तिथि में मौजूद न होने की वजह से इस तिथि का क्षय माना जारहा है। हालांकि ज्योतिष गणना के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च, गुरूवार को ही होगी। नवरात्रि की तिथि को लेकर गूगल ट्रेंड्स पर भी कई सवाल पूछे जा रहे हैं। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें कि इस साल चैत्र नवरात्रि कब पड़ेगी और माता के विभिन्न स्वरूपों का महत्व क्या है?

चैत्र नवरात्रि कब से शुरू होगी? (Chaitra Navratri Kab Hai 2026)

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  • 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होगी और इसका समापन 27 मार्च 2026, शुक्रवार को होगा।
  • इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी आरंभ माना जाएगा।
  • पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च 2026 को सुबह 6:52 बजे से शुरू होकर 20 मार्च 2026 को सुबह 4:52 बजे तक रहेगी।
  • इसका मतलब है कि किसी भी दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि मौजूद नहीं रहेगी।
  • सामान्यतः हिंदू पंचांग में किसी भी पर्व को उदया तिथि के अनुसार मनाना शुभ माना जाता है।
  • लेकिन इस बार उदया तिथि में प्रतिपदा नहीं होने के कारण चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च 2026 से ही माना जाएगा।

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चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियां

तिथि  दिन  देवी का स्वरूप
19 मार्च 2026  गुरुवार  मां शैलपुत्री 
20 मार्च 2026  शुक्रवार  मां ब्रह्मचारिणी 
21 मार्च 2026  शनिवार  मां चंद्रघंटा 
22 मार्च 2026  रविवार  मां कूष्मांडा 
23 मार्च 2026  सोमवार  मां स्कंदमाता 
24 मार्च 2026  मंगलवार  मां कात्यायनी 
25 मार्च 2026  बुधवार मां कालरात्रि 
26 मार्च 2026  बृहस्पतिवार  मां महागौरी 
27 मार्च 2026  शुक्रवार  मां सिद्धिदात्री, राम नवमी 

माता दुर्गा के नौ स्वरूपों का महत्व

माता दूर के नौ स्वरुप हैं और नवरात्रि के नौ दिनों में विभिन्न रूपों में उनकी पूजा की जाती है। आइए जानें माता दूर के सभी स्वरूपों के महत्व के बारे में-

मां शैलपुत्री

मां शैलपुत्री स्थिरता, पवित्रता और चंद्र शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। नवरात्रि के पहले दिन माता के इसी स्वरूप का पूजन किया जाता है और उन्हें पर्वत की बेटी के रूप में पूजा जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी

मां ब्रह्मचारिणी जो तपस्या, संयम और आत्म-अनुशासन का प्रतीक हैं। उनका संबंध मंगल ग्रह से है, जो ऊर्जा, वीरता और इच्छाशक्ति का प्रतीक हैं। भक्त एकाग्रता, इच्छाशक्ति और शैक्षणिक या करियर में सफलता के सर्वोत्तम अवसर के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं। वे मंगल ग्रह की ऊर्जा से जुड़े आवेग या आक्रामकता को कम करने के लिए कृपापूर्वक आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

मां चंद्रघंटा

माता दुर्गा का तीसरा रूप मां चंद्रघंटा है। उनके माथे पर घंटा के आकार का चंद्र विराजमान है। वे वीरता की प्रतीक हैं और राक्षसों के विरुद्ध युद्ध में अपार शक्ति रखती हैं।

मां कुष्मांडा

माता दुर्गा का चौथा रूप मां कुष्मांडा है। उन्हें ब्रह्मांड की सृष्टिकर्ता माना जाता है। जब तक उनका प्रकाश सूर्य की किरणों की तरह सभी दिशाओं में नहीं फैला, तब तक ब्रह्मांड अंधकार से भरा एक शून्य मात्र था। ऐसा माना जाता है कि माता ने संपूर्ण विश्व का अंधकार दूर किया।

मां स्कंद माता

माता दुर्गा का पांचवां रूप स्कंद माता के नाम से जाना जाता है स्कंद माता भगवान कार्तिकेय की माता हैं जिन्हें देवताओं ने राक्षसों के विरुद्ध युद्ध में अपना सेनापति चुना था। स्कंद माता की चार भुजाएं और तीन आंखें हैं, वोअपनी दाहिनी ऊपरी भुजा में शिशु स्कंद को और अपने दाहिने हाथ में थोड़ा ऊपर उठा हुआ कमल धारण किए हुए हैं।

मां कात्यायनी

माँ दुर्गा का छठा रूप कात्यायनी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वह काटा नामक एक महान ऋषि की पुत्री हैं, जिनकी इच्छा थी कि उनकी पुत्री देवी के रूप में हो। काटा की पुत्री कात्यायनी का जन्म दुर्गा के अवतार के रूप में हुआ था और तभी से उनका पूजन माता दुर्गा के छठे स्वरूप के रूप में होता है।

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मां कालरात्रि

कालरात्रि, देवी दुर्गा का सातवां रूप हैं। उनका रंग सांवला है, उनके बाल बिखरे हुए हैं और उनका भाव निर्भीक है। वे देवी काली की तरह काली हैं और अपने दाहिने हाथ में चमकती तलवार लिए सभी बुराइयों से लड़ती हैं। उनकी रक्षा करने की मुद्रा हमें भय और कष्टों से मुक्ति का आश्वासन देती है।

मां महा गौरी

मां महा गौरी माता दुर्गा का बुद्धिमान, शांत और सौम्य स्वरुप मानी जाती हैं। वो सफेद वस्त्र पहनती हैं, उनकी चार भुजाएं हैं और वे बैल पर सवार होती हैं। उन्हें भगवान शिव की अर्धांगिनी के रूप में भी पूजा जाता है।

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माता सिद्धिदात्री

सिद्धिदात्री, देवी का नौवां रूप हैं और उनमें अलौकिक उपचार शक्तियां निहित हैं। वे देवी मां के अवतार के रूप में सभी देवताओं, संतों, योगियों, तांत्रिकों और सभी भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।

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चैत्र नवरात्रि के 9 रंग कौन से हैं?

चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में आप माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के अनुसार अलग-अलग रंग के वस्त्र धारण करें और माता के पसंदीदा रंगों में ही पूजन करें तो उसका शुभ फल मिल सकता है।

दिन  रंग  माता का स्वरूप
पहला दिन  पीला   मां शैलपुत्री
दूसरा दिन  हरा   मां ब्रह्मचारिणी
तीसरा दिन  ग्रे  मां चंद्रघंटा
चौथा दिन  नारंगी  मां कूष्मांडा
पांचवां दिन  सफेद  मां स्कंदमाता 
छठा दिन  लाल  मां कात्यायनी 
सातवां दिन  नीला  मां कालरात्रि 
आठवां दिन  गुलाबी  मां महागौरी 
नौवां दिन  बैंगनी  मां सिद्धिदात्री 

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चैत्र नवरात्रि का धार्मिक महत्व

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चैत्र नवरात्रि का पर्व माता दुर्गा की उपासना और शक्ति की साधना के लिए समर्पित होता है। इन नौ दिनों में भक्त माता रानी की उपासना करते हैं और व्रत रखते हैं। यही नहीं विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के पहले दिन लोग व्रत क संकल्प लेते हैं कि वो नौ दिनों तक माता की भक्ति और व्रत का पालन करेंगे। नवरात्रि की नौ रातों को विशेष रूप से माता दुर्गा के लिए समर्पित समय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि माता दुर्गा की नौ दिनों तक की गई आराधना भक्तों के जीवन में समृद्धि लाने में मदद करती है।

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अगर आप भी चैत्र नवरात्रि में माता दुर्गा की पूजा करती हैं तो यहां से कलश स्थापना और तिथि की सही जानकारी ले सकती हैं।
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