
हिंदू धर्म में चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाली चैत्र नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। वैसे तो साल में चार बार नवरात्रि का पर्व आता है, लेकिन उनमें से दो खास मानी जाती हैं। पहली चैत्र महीने में पड़ती है और दूसरी आश्विन महीने में पड़ने वाली शारदीय नवरात्रि होती है। यह पर्व माता दुर्गा की उपासना और शक्ति साधना का प्रतीक माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च से हो रहा है और यह 26 मार्च को राम नवमी के साथ समाप्त होगी। इन नौ दिनों में भक्तजन माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और जप, तप, उपवास तथा भक्ति के माध्यम से माता की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। नवरात्रि के दौरान कई भक्त लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं। ज्योतिष की मानें तो नवरात्रि के नौ दिनों में आपको कुछ आसान नियमों का पालन करना चाहिए जिससे व्रत का पूर्ण फल मिले और जीवन में खुशहाली भी बनी रहे। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें चाहित्र नवरात्रि के नियमों के बारे में विस्तार से।

चैत्र नवरात्रि का व्रत शुरू करने से पहले भक्तों को अपनी तैयारी एक दिन पहले ही कर लेनी चाहिए। पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री जैसे कलश, नारियल, आम के पत्ते, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, फूल, दीपक और प्रसाद पहले से इकट्ठा करके रख लें। नवरात्रि के पहले दिन यानी चैत्र प्रतिपदा को प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करके पूजा आरंभ करें। मांगता दुर्गा का ध्यान करते हुए पूरे नौ दिनों तक व्रत और पूजा करने का संकल्प लें।
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नवरात्रि के नियमों में सबसे जरूरी बात यह ही कि आपको कभी भी व्रत का संकल्प लेने के बाद इसे बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए। यदि आपको नवरात्रि के दौरान पीरियड्स आ जाएं तो भी आपको व्रत जारी रखना चाहिए। एक बार व्रत का संकल्प लेने के बाद पूरे नौ दिनों तक आपको श्रद्धा और नियमों का पालन करना चाहिए और व्रत रखना चाहिए।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। यह माता के आह्वान का प्रतीक माना जाता है। यदि आप भी नवरात्रि के नियमों का पालन करना चाहती हैं तो सबसे ज्यादा जरूरी है कलश की स्थापना करना। आप अपने घर में नवरात्रि की प्रतिपदा के दिन विधि-विधान से कलश स्थापना करें और माता दुर्गा का पूजन करें। कलश स्थापना के बाद सुबह और शाम माता की पूजा और आरती करें। अगर आप कलश के साथ अखंड ज्योति जगाती हैं तो ध्यान रखें कि आपको उसे नौ दिनों तक प्रज्वलित रखना है। आपको घर की इस दौरान अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार, यदि आप व्रत न भी करें तब भी आपको इस दौरान सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए। इस दौरान भूलकर भी तामसिक भोजन और मांस-मदिरा का सेवन न करें।
नवरात्रि के दौरान भक्तों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान व्यक्ति को मन, वचन, शरीर और कर्म से पवित्र रहने की जरूरत होती है। इस दौरान आपको साधक क्रोध, नकारात्मक विचार और झूठ बोलने से भी बचना चाहिए और किसी निरीह को सताना भी नहीं चाहिए।

चैत्र नवरात्रि के दौरान कपड़ों के रंग का भी विशेष महत्व बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इन नौ दिनों में पूजन के दौरान आपको काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। माता दुर्गा की साधना के लिए लाल और पीले रंग के वस्त्र सबसे शुभ माने जाते हैं। कोशिश करें कि पूजा के समय इन रंगों के कपड़े पहनें। इससे माता दुर्गा का आशीर्वाद बना रहता है।
अगर आप भी चैत्र नवरात्रि के दौरान इन नियमों का पालन करेंगी और श्रद्धा भाव से माता का पूजन करेंगी तो इसके जीवन में सकारात्मक प्रभाव होंगे।
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