
3 मार्च 2026, मंगलवार को चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। माना जा रहा है कि यह अब तक का सबसे लंबे समय तक पड़ने वाला चंद्र ग्रहण है। भारत में भी इसका पूर्ण प्रभाव रहेगा। ऐसे में भक्तों की चिंता बढ़ी हुई है कि क्या एक पूरा दिन वे भगवान की पूजा करने से वंचित रह जाएंगे। इस बारे में जब हमने मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा के पंडित एंव ज्योतिषाचार्य सौरभ त्रिपाठी से बात की, तो उन्होंने कहा, "नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि चंद्र ग्रहण के दिन भगवान की पूजा नहीं की जा सकती है। हां, थोड़ा समय परिवर्तन जरूर होगा क्योंकि सूतक काल बहुत सुबह से ही आरंभ हो जाएगा। मगर सूतक काल से पहले और बाद में भगवान की पूजा हो सकती है।"
अब भक्तों के मन में यह भी सवाल है कि अगर सूतक काल से पहले ही भगवान की पूजा करनी है, तो क्या करना चाहिए। खासतौर पर जिनके घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, उनकी चिंता ज्यादा बढ़ी हुई है, क्योंकि लड्डू गोपाल को शाम तक बिना भोग लगाए कैसे रखा जा सकता है। इस समस्या निवारण पंडित सौरभ बताते हैं और कहते हैं, "सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही ठाकुर जी को भोग लगाया जा सकता है।" पंडित सौरभ आगे लुख में पूजा का शुभ मुहूर्त और चंद्र ग्रहण में भोग लगाने के नियम आदि बता रहे हैं।
चंद्र ग्रहण से पहले ब्रह्म मुहूर्त पर पूजा की जा सकती हैं। यह मुहूर्त 5 बजकर 5 मिनट पर शुरू होगा और 5 बजकर 55 मिनट पर खत्म हो जाएगा। इसके बाद उषा काल आरंभ होगा। आप 6 बजकर 15 मिनट तक भी पूजा कर सकती हैं, मगर इसके बाद सूतक काल लग जाएगा; जिसमें पूजा करना वर्जित है। इसी दौरान आप ठाकुर जी को निद्रा से जगाकर दूध और हल्का-फुल्का भोग लगा सकती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि सूतक काल शुरू होने से पहले ही आप वह भोग भगवान के पास से हटा भी लें। पंडित सौरभ कहते हैं, "सूतक काल के दौरान ही भगवान में कष्ट में होते हैं, ऐसे में उनके पास केवल तुलसी के पत्ते रखे होने चाहिए । भोजना आदि नहीं रखना चाहिए।"
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जब ग्रहण समाप्त हो जाए, तब घर और मंदिर की पुनः शुद्धि करें। स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान को स्नान कराकर ताजे वस्त्र पहनाएं। इसके बाद विधिवत पूजा, आरती और भोग अर्पित करें। कई लोग ग्रहण के बाद दान-पुण्य भी करते हैं, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है।
चंद्र ग्रहण को लेकर कई तरह की आशंकाएं और भ्रांतियां रहती हैं, परंतु सही जानकारी होने पर आप बिना चिंता के धार्मिक आचरण कर सकते हैं। 3 मार्च 2026 को पड़ने वाले चंद्र ग्रहण के दिन भी भक्तजन सूतक से पहले ब्रह्म मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं और ग्रहण समाप्त होने के बाद पुनः नियमित पूजा-पाठ आरंभ कर सकते हैं। आवश्यक है कि समय का ध्यान रखें और परंपरागत नियमों का पालन करें। इससे न केवल धार्मिक संतोष मिलेगा, बल्कि मन में भी शांति बनी रहेगी। लेख में बताई गई जानकारी अगर आपको पसंद आई हो तो इसे शेयर और लाइक जरूर करें इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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