
चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे प्रसिद्ध पर्वों में से एक है और यह साल में मुख्य रूप से दो बार मनाया जाता है। पहली चैत्र महीने की और दूसरी अश्विन महीने की शारदीय नवरात्रि। इसके अलावा साल में दो नवरात्रि गुप्तनवरात्रि भी होती हैं, लेकिन उन्हें गुप्त रूप से ही मनाया जाता है। इन सभी नवरात्रि तिथियों में से चैत्र महीने की तिथि का विशेष महत्व है क्योंकि इसी समय से हिंदू नव वर्ष का भी आरंभ होता है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना या कलश स्थापना से होती है, जिसे बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं की मानें तो कलश स्थापना माता के आगमन का प्रतीक होता है और भक्तजन इसके साथ ही व्रत का संकल्प लेते हैं। यदि नवरात्रि में आप सही विधि और शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करती हैं, तो घर में सदैव सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें इस साल चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और विधि क्या है?

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इस दिन माता दुर्गा की पूजा के साथ व्रत का संकल्प भी लिया जाता है और नौ दिनों तक माता की विधिपूर्वक आराधना की जाती है।
यह भी पढ़ें- Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी तय, जानें आपके जीवन पर क्या होगा असर?
नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना या कलश स्थापना से होती है। कलश को सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और मंगल का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में भगवान रुद्र, मोल में ब्रह्मा जी और मध्य में देवी शक्ति का निवास है। इसलिए नवरात्रि के समय ब्रह्मांड की दिव्य शक्तियों का आवाहन कलश में किया जाता है।
जिस घर में माता का कलश विराजता है वहां दुख-दर्द ज्यादा समय तक टिक नहीं पाता। ऐसा माना जाता है कि कलश स्थापना से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि कलश स्थापना से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।

ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में कलश स्थापना करने से घर में सदैव समृद्धि आती है और माता दुर्गा की कृपा से धन- धान्य की कभी कमी नहीं होती है। ऐसा कहा जाता है कि नवरात्रि की पूजा तब तक पूर्ण नहीं होती है जब तक घर में सही विधि से कलश की स्थापना ना की जाए। यही नहीं सही विधि से यदि घर में कलश की स्थापना की जाती है तो इसमें ब्रह्मा, विष्णु, महेश और देवी शक्ति का निवास हो जाता है। इसके साथ ही आपको कलश का नारियल हमेशा सही दिशा में ही रखने की सलाह दी जाती है। गलत दिशा में कलश रखने से भी पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। कलश स्थापना के समय इसमें जौ डालकर ज्वारे उगाए जाते हैं और ये संपन्नता का प्रतीक माने जाते हैं। कलश को सही तरीके से स्थापित करने से आपके घर में आने वाली सभी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है।
कलश स्थापना के लिए सबसे जरूरी सामग्री है मिट्टी, तांबे या पीतल का कलश। आपको कभी भी स्टील या लोहे का कलश नवरात्रि में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
कलश स्थापना के लिए गंगाजल, चावल या गेहूं, रोली, हल्दी, आम के पत्ते, सुपारी, सिक्का, नारियल, लाल चुनरी और कलावा की आवश्यकता होती है।

यदि आप यहां बताए शुभ मुहूर्त में चैत्र नवरात्रि के दौरान कलश की स्थापना करती हैं और श्रद्धा से व्रत-उपवास करती हैं, तो माता दुर्गा का आशीर्वाद हमेशा बना रहेगा।
अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
Images: Shutterstock.com
यह विडियो भी देखें
Herzindagi video
हमारा उद्देश्य अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी प्रदान करना है। यहां बताए गए उपाय, सलाह और बातें केवल सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी तरह के हेल्थ, ब्यूटी, लाइफ हैक्स या ज्योतिष से जुड़े सुझावों को आजमाने से पहले कृपया अपने विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, [email protected] पर हमसे संपर्क करें।