
आज गुरुवार, 19 मार्च 2026 का दिन बहुत ही पवित्र और खास है। आज के दिन से शक्ति की देवी माँ दुर्गा के पावन पर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज पवित्र चैत्र महीने की अमावस्या तिथि सुबह 06:55 बजे तक रहेगी और उसके ठीक बाद प्रतिपदा तिथि यानी नवरात्रि का पहला दिन लग जाएगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है, इसलिए आज का दिन माता के भक्तों के लिए बहुत बड़ा है। आज पूरी रात उत्तराभाद्रपद नक्षत्र रहेगा और उसके बाद रेवती नक्षत्र लग जाएगा। इसके साथ ही, आज रात 01:16 बजे तक सफलता और खुशियां देने वाला शुक्ल योग रहेगा, जिसके बाद ब्रह्म योग शुरू हो जाएगा। गुरुवार के दिन नवरात्रि का शुरू होना बहुत ही शुभ और चमत्कारिक संयोग है। आइए, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज के इस खास पंचांग की पूरी जानकारी, शुभ-अशुभ समय और जीवन की हर परेशानी को दूर करने के बेहद आसान और घरेलू उपाय विस्तार से जानते हैं।

| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| अमावस्या (सुबह 06:55 बजे तक) | उत्तराभाद्रपद | गुरुवार | शुक्ल | किस्तुघ्न |
| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 15 मिनट पर होगा |
| सूर्यास्त | शाम 06 बजकर 20 मिनट पर होगा |
| चंद्रोदय | आज नहीं है |
| चंद्रास्त | शाम 06 बजकर 45 मिनट पर होगा |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 04 बजकर 35 मिनट से 05 बजकर 23 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त | (सूर्य पूजन का शुभ समय) सुबह 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06 बजकर 37 मिनट से 07 बजकर 01 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | दोपहर 01 बजकर 58 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक |
| यमगंड | सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 07 बजकर 47 मिनट तक |
| गुलिक काल | सुबह 09 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक |
गुरुवार को राहु काल दोपहर के समय होता है। इस दौरान कलश स्थापना, किसी भी तरह की नई खरीदारी, जरूरी यात्रा की शुरुआत, या बड़े पैसों के लेन-देन से पूरी तरह बचना चाहिए।
आज के दिन का महत्त्व आज सुबह 06:55 बजे तक अमावस्या रहेगी और उसके तुरंत बाद चैत्र नवरात्रि की पावन प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन घर के मंदिर में कलश स्थापना की जाती है और माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की सच्चे मन से पूजा की जाती है। माता शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन के सारे दुख, डर और बीमारियां खत्म हो जाती हैं और घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। रात 01:16 बजे तक शुक्ल योग है। शुक्ल का मतलब होता है उजला, साफ या सफेद। आज के दिन शुरू किया गया कोई भी अच्छा काम जीवन में उजाला लाता है और उसमें पक्की सफलता मिलती है।
जब भी चैत्र नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार के दिन होती है, तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का दिन है, जो ज्ञान, सुख और बरकत देते हैं। माँ दुर्गा की आराधना और गुरुवार का यह प्यारा संयोग परिवार में चल रही पुरानी परेशानियों को शांत करने और जीवन में खुशियां लाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में की गई माता की पूजा और कलश स्थापना आने वाले समय में बहुत अच्छा फल देती है और आपके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा देती है।

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