
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति और एकादशी दोनों ही तिथियों का विशेष महत्व है और जब ये दोनों शुभ अवसर एक ही दिन पड़ते हैं तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं जिसे 'उत्तरायण' की शुरुआत माना जाता है। वहीं, एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है जो मोक्ष और पापों के नाश का दिन होती है। इन दोनों के संयोग को 'दुर्लभ योग' माना जाता है क्योंकि सूर्य आत्मा के कारक हैं और विष्णु सृष्टि के पालनहार। इस साल ऐसा ही दुर्लभ योग बन रहा है जब मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी पड़ रही है, ऐसे में इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से न केवल जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होगा बल्कि ग्रहों के अशुभ प्रभाव भी दूर हो जाएंगे। आइये जानते हैं इस बारे में वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स से।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और तांबे के लोटे में जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। जल में थोड़ा सा कुमकुम, अक्षत और लाल फूल जरूर डालें। अर्घ्य देते समय ॐ सूर्याय नमः का जाप करें।
एकादशी का साथ होने के कारण, आप आज के दिन सूर्य को जल चढ़ाते समय उसमें काले तिल भी मिला सकते हैं। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इस उपाय से आपके करियर की बाधाएं दूर होंगी।

षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति के मेल पर तिल का दान महादान माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है, इसलिए एकादशी पर तिल का उपयोग बहुत शुभ है।
आप तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी या कंबल का दान जरूरतमंदों को करें। ऐसा करने से शनि देव और सूर्य देव दोनों प्रसन्न होते हैं। इस दिन किया गया दान अक्षय होता है यानी इसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता और घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती।
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एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले रंग की वस्तुएं अति प्रिय हैं। पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल, पीले फल और पीले वस्त्र अर्पित करें। इसके अलावा, सूर्य देव का रंग भी तेजस्वी पीला और सुनहरी माना जाता है।
ऐसे में भगवान विष्णु की पूजा में केसर का तिलक लगाना दोनों देवताओं को प्रसन्न करने का उत्तम तरीका है। पूजा के बाद 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

एकादशी के दिन तुलसी पूजन का विशेष महत्व है क्योंकि तुलसी माता भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और 11 बार परिक्रमा करें। ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।
ऐसे में पूजा के लिए पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। इस दिन शाम को घर के मुख्य द्वार पर भी दीपक जलाना चाहिए जिससे लक्ष्मी जी का आगमन होता है और सूर्य देव के आशीर्वाद से यश प्राप्त होता है।
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मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा है। इस दिन चावल और दाल की खिचड़ी बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाएं। एकादशी होने के कारण अगर आप व्रत रख रहे हैं तो केवल फलाहार करें।
अगर आप व्रत नहीं रख रहे हैं तो भी इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। खिचड़ी में घी का भरपूर प्रयोग करें क्योंकि घी को सूर्य और गुरु दोनों का प्रतीक माना जाता है। जरूरतमंदों को खिचड़ी खिलाने से कुंडली के कई दोष शांत होते हैं।
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image credit: herzindagi
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