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Navratri Day 3 Vrat Katha 2026: साहस और शांति का प्रतीक हैं मां चंद्रघंटा, नवरात्रि के तीसरे दिन पढ़ें यह विशेष कथा

Maa Chandraghanta ki Vrat Katha 2026: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। ऐसे में इनकी विशेष व्रत कथा भी पढ़ना जरूरी होता है। इससे आपको भी साहस और शांति का प्रतीक के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। आइए विस्तार से इस कथा के बारे में बताते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-03-21, 05:21 IST

चैत्र नवरात्रि के 9 दिनों में माता के 9 रुपों की पूजा होती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इस माता का साहस और शांति का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इनकी पूजा भी अलग तरह से होती है। अगर आप भी नवरात्रि के व्रत रख रही हैं, तो इसमें मां चंद्रघंटा की कथा का वर्णन जरूर करें, ताकि आपके जीवन की सभी परेशानियां दूर हो सके और आपको बढ़ने के लिए साहस मिल सके। आइए आपको विस्तार से पौराणिक कथा बताते हैं।

मां चंद्रघंटा की पौराणिक व्रत कथा (Maa Chandraghanta Vrat Katha 2026)

पौराणिक कथा के अनुसार, मां चंद्रघंटा का यह रूप भगवान शिव से विवाह के बाद प्रकट हुआ था। जब भगवान शिव बारात लेकर राजा हिमालय के द्वार पहुंचे, तो उनका रूप अत्यंत विकराल था। उनके शरीर पर भस्म लगी थी, गले में सर्प और जटाओं में चंद्रमा विराजमान था। यह दृश्य देखकर माता पार्वती के परिवारजन भयभीत हो गए। तब माता पार्वती ने स्थिति को संभालने के लिए चंद्रघंटा का दिव्य और तेजस्वी रूप धारण किया। उनके इस रूप को देखकर भगवान शिव ने भी सौम्य रूप धारण किया, जिससे विवाह संपन्न हुआ। इस प्रकार मां चंद्रघंटा का स्वरूप शांति और संतुलन का प्रतीक बन गया। तभी से माता चंद्रघंटा की इस कथा का वर्णन किया जाता है।

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मां चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति को साहस और आत्मबल की प्राप्ति होती है। उनकी कृपा से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और शत्रुओं पर विजय मिलती है। इस दिन व्रत रखने और सच्चे मन से पूजा करने से मां प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को निर्भयता और शांति का आशीर्वाद देती हैं।

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नवरात्रि के तीसरे दिन साधक को विशेष रूप से मन, वाणी और कर्म की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए। मां चंद्रघंटा का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हर प्रकार का भय समाप्त हो जाता है।

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इस प्रकार मां चंद्रघंटा की व्रत कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन में साहस के साथ-साथ शांति और संतुलन बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। आपको भी इस कथा को नवरात्रि के तीसरे दिन जरूर पढ़ना चाहिए, ताकि आपके जीवन में माता रानी का आशीर्वाद बना रहे।

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Image credit-Freepik

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