
मकर संक्रांति का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं जिसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं यानी उनकी दिशा उत्तर की ओर हो जाती है जिसे देवताओं का दिन माना जाता है और सभी मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन की शुरुआत हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य विशेषकर तिल और गुड़ का दान करने से पापों का नाश होता है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह पर्व अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है क्योंकि इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स ने हमें बताया कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से भाग्योदय होता है और सूर्य कृपा पाने के सबे सरल उपाय है उनकी आरती।
ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी।
तुम चार भुजाधारी॥
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे।
तुम हो देव महान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥

ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते।
सब तब दर्शन पाते॥
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा।
करे सब तब गुणगान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥
संध्या में भुवनेश्वर, अस्ताचल जाते।
गोधन तब घर आते॥
गोधुली बेला में, हर घर हर आंगन में।
हो तव महिमा गान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥
देव दनुज नर नारी, ऋषि मुनिवर भजते।
आदित्य हृदय जपते॥
स्त्रोत ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी।
दे नव जीवनदान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥
तुम हो त्रिकाल रचियता, तुम जग के आधार।
महिमा तब अपरम्पार॥
प्राणों का सिंचन करके, भक्तों को अपने देते।
बल बृद्धि और ज्ञान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥
भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं॥
वेद पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने।
तुम ही सर्व शक्तिमान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥
पूजन करती दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल।
तुम भुवनों के प्रतिपाल॥
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी।
शुभकारी अंशुमान॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान॥

ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।
जगत के नेत्र रूवरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा॥
धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की आरती करने से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। चूंकि सूर्य को आरोग्य का कारक माना जाता है, इसलिए उनकी विधि-विधान से पूजा और आरती करने से शरीर के रोगों का नाश होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह माना जाता है कि सूर्य की कृपा से व्यक्ति तेजस्वी बनता है और उसके भीतर नई स्फूर्ति का संचार होता है।
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धार्मिक दृष्टि से, इस दिन आरती करने से जीवन के कष्टों और दोषों का निवारण होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति से सूर्य का प्रभाव बढ़ने लगता है, जिससे कुंडली के ग्रहों की नकारात्मकता कम होती है। सूर्य देव की आरती करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। यह पूजा भक्तों के जीवन से अंधकार और बाधाओं को दूर कर सफलता के मार्ग खोलती है।
सूर्य देव की आरती का एक बड़ा लाभ मान-सम्मान और समृद्धि की प्राप्ति है। सूर्य को 'सफलता और शासन' का प्रतीक माना जाता है। संक्रांति पर उनकी स्तुति करने से व्यक्ति को करियर और सामाजिक जीवन में उन्नति मिलती है। साथ ही, सूर्य देव को प्रसन्न करने से पितृ दोषों से भी मुक्ति मिलती है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे कुल में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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image credit: herzindagi
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