
मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में विशेष रूप से मनाया जाता है, इसका न सिर्फ धार्मिक महत्व है बल्कि यह तिथि ज्योतिष के अनुसार भी बहुत शुभ मानी जाती है। यह त्योहार सूर्य देव के राशि परिवर्तन और उत्तरायण होने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति का पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे उत्तर भारत में इसे खिचड़ी कहा जाता है, गुजरात में इसे उत्तरायण के नाम से जाना जाता है और दक्षिण भारत में इसे पोंगल कहा जाता है। हर साल यह पर्व 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही वो उत्तरायण भी हो जाते हैं और इस दिन के बाद से ही शुभ कामों की शुरुआत भी हो जाती है। इस पर्व को लेकर गूगल ट्रेंड्स में भी कई सवाल पूछे जा रहे हैं जैसे कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों खाई जाती है? इस दिन किन चीजों का दान शुभ होता है और इस दिन कौन से उपाय आपके जीवन में शुभता ला सकते हैं? आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें इन सवालों के जवाब के बारे में।
इस साल सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में 14 जनवरी की रात के समय प्रवेश करेंगे, इसलिए मकर संक्रांति का पर्व उदया तिथि के अनुसार 15 जनवरी, गुरूवार को मनाया जाएगा।
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा और दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान, दान और जप-तप करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब किया गया दान कई गुना ज्यादा फल दे सकता है। इस दिन आपको कुछ विशेष चीजों का दान करना चाहिए। यही नहीं मकर संक्रांति पर राशि अनुसार दान करती हैं तो वो भी अत्यंत फलदायी होता है।
अगर आप मकर संक्रांति के दिन कुछ विशेष उपाय करती हैं, तो जीवन में सुख-समृद्धि और धन लाभ के योग बनते हैं। आइए आपको बताते हैं इस दिन आजमाए जाने वाले कुछ विशेष उपायों के बारे में-
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उत्तर भारत में मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व के रूप में ही मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी खाना इसलिए शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन खिचड़ी का दान किया जाता है और इसे सूर्य देव को भी अर्पित किया जाता है। यही नहीं इस दिन खिचड़ी को ही भोग के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि इसी दिन से सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं और ठंड कम होने लगती है। वहीं खिचड़ी दाल और चावल को मिलाकर बनाई जाती है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है। वहीं उड़द दाल की खिचड़ी इसलिए खाई जाती है क्योंकि उड़द दाल ठंड के मौसम में शरीर को गर्म करने में मदद करती है और पोषण से भरपूर होती है।

मकर संक्रांति का सबसे बड़ा महत्व सूर्य देव के उत्तरायण होने से जुड़ा है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ते हैं। ज्योतिष की मानें तो उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवों की रात्रि कहा जाता है। इसी वजह से उत्तरायण की अवधि को ज्यादा शुभ और सकारात्मक माना जाता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है। मकर संक्रांति से ही उत्तरायण काल की शुरुआत हो जाती है। इस दिन से सूर्य देव की किरणें उत्तरी गोलार्ध में अधिक पड़ती हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। शास्त्रों में बताया गया है कि उत्तरायण काल में देवताओं की शक्ति पृथ्वी पर ज्यादा प्रभावी होती है क्योंकि वो पूर्ण रूप से सक्रीय अवश्था में होते हैं। इसी कारण से भीष्म पितामह ने महाभारत में अपनी इच्छा मृत्यु के लिए मकर संक्रांति का दिन ही चुना था।
यही नहीं जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं तब से ही शुभ कार्यों की शुरुआत होने लगती है और विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि संस्कार फिर से आरंभ हो जाते हैं।
ऐसा माना जाता है कि हर महीने सूर्य किसी न किसी राशि में प्रवेश करते हैं और इस तरह से वो साल के बारह महीनों में सभी राशियों में एक बार प्रवेश करते हैं, इसी वजह से हर महीने एक बार संक्रांति तिथि पड़ती है। वहीं मकर संक्रांति का पर्व सबसे प्रमुख माना जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि से बाहर निकलते हैं और खरमास का भी समापन होता है। मकर राशि में सूर्य का प्रवेश इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वो उत्तरायण हो जाते हैं जिसमें सूर्य की ऊर्जा अपने चरम पर होती है। यह पर्व सूर्य देव को समर्पित होता है, जिन्हें जीवन, ऊर्जा और आत्मा का कारक भी माना जाता है।

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक परंपरा नहीं है बल्कि इस दिन को एक पर्व के रूप में मनाने के लिए पतंग उड़ाई जाती है। इससे आपसी सौर्हार्द बढ़ता है। अगर हम इस परंपरा के इतिहास की बात करें तो यह परंपरा बहुत पुरानी है। ऐसा माना जाता है कि मुगल काल में भी पतंग उड़ाना एक लोकप्रिय शौक था, जो धीरे-धीरे हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया। यही नहीं मौसम के बदलाव और बसंत के आगमन की खुशी में भी लोग मिलकर पतंग उड़ाते हैं। वहीं इस दौरान पतंग से जुड़ी कई प्रतियोगिताएं भी होती हैं जो इस पर्व को और बेहतर बनाती हैं।
कई विशेष परंपराओं को खुद में समेटे हुए मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में अलग तरीके से मनाया जाता है और इसकी अलग मान्यताएं भी हैं जो इस पर्व को और ज्यादा खास बनाती हैं। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसे ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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