
हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले सभी पर्वों में मकर संक्रांति का विशेष स्थान है। इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक ओर मकर संक्रांति के दिन वर्ष का सबसे बड़ा खगोलीय परिवर्तन होता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, वहीं दूसरी ओर इस दिन दान और स्नान का अत्यंत पुण्यकारी महत्व बताया गया है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, जबकि इस दिन दान करने से सौ गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, इन शुभ कार्यों को करने के लिए सही मुहूर्त का होना आवश्यक माना गया है।
इस विषय में हमने मध्य प्रदेश के उज्जैन से पंडित मनीष शर्मा से बात की। वे बताते हैं, "मकर संक्रांति के दिन तिल का दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। साथ ही जो भक्त इस पावन दिन श्रद्धा भाव से किसी पवित्र नदी में स्नान करता है, वह न केवल पापों से मुक्त होता है, बल्कि उसके जीवन में नए मार्ग खुलते हैं, जो उसे सही दिशा और लक्ष्य तक पहुंचाने में सहायक होते हैं।"
पंडित मनीष शर्मा ने मकर संक्रांति के दिन विभिन्न पवित्र नदियों में स्नान और दान के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी भी साझा की है।

मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, क्षिप्रा, सरस्वती या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।
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| नदी का नाम | प्रमुख शहर | स्नान का शुभ मुहूर्त |
| गंगा | हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी | दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक |
| यमुना | मथुरा, वृंदावन, दिल्ली | दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक |
| नर्मदा | ओंकारेश्वर, अमरकंटक | दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक |
| गोदावरी | नासिक | दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक |
| क्षिप्रा | उज्जैन | दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक |
| सरस्वती | प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) | दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक |
नोट: जो श्रद्धालु पवित्र नदियों तक नहीं पहुंच सकते, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे भी मकर संक्रांति का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।
इस दिन तिल, गुड़, चावल, अन्न, कंबल, वस्त्र और धन का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। दान हमेशा पुण्यकाल या महा पुण्यकाल में करना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस समय किए गए कर्म का फल कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, पुण्यकाल वह समय होता है जब सूर्य देव की ऊर्जा पृथ्वी पर सबसे अधिक प्रभावी होती है। इस दौरान किए गए स्नान और दान से व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है और उसके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है।
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इन शुभ मुहूर्तों में स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से मकर संक्रांति का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। सही समय और विधि से किए गए धार्मिक कर्म आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आते हैं। यह जानकारी आपको पसंद आई हो, तो लेख को शेयर और लाइक करें, इसी तरह और भी इंटरटेनमेंट आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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