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Makar Sankranti Snan Muhurat 2026: मकर संक्रांति कितनी देर रहेगा स्‍नान का मुहूर्त, किस नदी में करें स्‍नान और गरीबों को कब दें दान; जानें सही समय

मकर संक्रांति 2026 पर स्नान और दान का सही मुहूर्त यहां जानें। किस नदी में स्नान करना सबसे शुभ है, पुण्यकाल और महा पुण्यकाल कितनी देर रहेंगे, तिल दान का महत्व क्या है और सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही समय क्या होगा। इस लेख में पूरी जानकारी पढ़ें। सही मुहूर्त में स्नान-दान कर पाएं पुण्य, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद।
Editorial
Updated:- 2026-01-14, 20:45 IST

हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले सभी पर्वों में मकर संक्रांति का विशेष स्थान है। इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक ओर मकर संक्रांति के दिन वर्ष का सबसे बड़ा खगोलीय परिवर्तन होता है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, वहीं दूसरी ओर इस दिन दान और स्नान का अत्यंत पुण्यकारी महत्व बताया गया है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किसी पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं, जबकि इस दिन दान करने से सौ गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, इन शुभ कार्यों को करने के लिए सही मुहूर्त का होना आवश्यक माना गया है।

इस विषय में हमने मध्य प्रदेश के उज्जैन से पंडित मनीष शर्मा से बात की। वे बताते हैं, "मकर संक्रांति के दिन तिल का दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। साथ ही जो भक्त इस पावन दिन श्रद्धा भाव से किसी पवित्र नदी में स्नान करता है, वह न केवल पापों से मुक्त होता है, बल्कि उसके जीवन में नए मार्ग खुलते हैं, जो उसे सही दिशा और लक्ष्य तक पहुंचाने में सहायक होते हैं।"

पंडित मनीष शर्मा ने मकर संक्रांति के दिन विभिन्न पवित्र नदियों में स्नान और दान के लिए शुभ मुहूर्त की जानकारी भी साझा की है।

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मकर संक्रांति पर स्‍नान का शुभ मुहूर्त

मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, क्षिप्रा, सरस्वती या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।

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नदी का नाम प्रमुख शहर स्नान का शुभ मुहूर्त
गंगा हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक
यमुना मथुरा, वृंदावन, दिल्ली दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक
नर्मदा ओंकारेश्वर, अमरकंटक दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक
गोदावरी नासिक दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक
क्षिप्रा उज्जैन दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक
सरस्वती प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक

नोट: जो श्रद्धालु पवित्र नदियों तक नहीं पहुंच सकते, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे भी मकर संक्रांति का पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।

मकर संक्रांति पर दान का शुभ मुहूर्त

इस दिन तिल, गुड़, चावल, अन्न, कंबल, वस्त्र और धन का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। दान हमेशा पुण्यकाल या महा पुण्यकाल में करना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि इस समय किए गए कर्म का फल कई गुना बढ़ जाता है।

पुण्‍यकाल में ही क्‍यों किया जाता है दान-स्‍नान

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, पुण्यकाल वह समय होता है जब सूर्य देव की ऊर्जा पृथ्वी पर सबसे अधिक प्रभावी होती है। इस दौरान किए गए स्नान और दान से व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि मिलती है और उसके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है।

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इन शुभ मुहूर्तों में स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से मकर संक्रांति का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। सही समय और विधि से किए गए धार्मिक कर्म आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आते हैं। यह जानकारी आपको पसंद आई हो, तो लेख को शेयर और लाइक करें, इसी तरह और भी इंटरटेनमेंट आर्टिकल्‍स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।  

FAQ
मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व क्यों कहा जाता है?
मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़ और खिचड़ी दान करने की परंपरा है। खासकर उत्तर भारत में इस कारण इसे खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है।
मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा क्यों की जाती है?
इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य को ऊर्जा, आरोग्य और जीवन का आधार माना गया है, इसलिए इस दिन सूर्य पूजा का विशेष महत्व होता है।
मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का ही दान क्यों किया जाता है?
तिल पाप नाशक और गुड़ शुभता का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन तिल-गुड़ का दान करने से सौ गुना पुण्य फल मिलता है।
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