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Navratri Day 5 Puja Vidhi & Mantra 2026 : संतान सुख प्राप्ति के लिए चैत्र नवरात्रि में करें मां स्कंदमाता का पूजन, जानें संपूर्ण पूजा विधि और मंत्र

Maa Skandmata Puja Vidhi 2026: चैत्र नवरात्रि के 5वें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है। ऐसे में अगर आप भी मां का आशीर्वाद पाना चाहती हैं, तो पूरे विधि-विधान और मंत्रों का उच्चारण करके इस पूजा को पूरी करें और संतान सुख की प्राप्ति करें।
Editorial
Updated:- 2026-03-22, 15:54 IST

नवरात्रि के हर दिन खास होते हैं। इन दिनों में माता के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती हैं। पांचवे दिन मां स्कंदमाता को समपर्ति होता है। यह देवी का प्रेम और शक्ति स्वरुप कहा जाता है। इनकी गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान होते हैं। साथ ही मां की चार भुजाएं होती हैं और वो कमल पर विराजमान होती हैं। इसलिए इन्हें पद्मासना भी कहते हैं। आप भी अगर मां से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद पाना चाहती हैं, तो ऐसे में पंडित जन्मेश द्विवेदी के बताई गई पूजा-विधि और मंत्रों का उच्चारण करके पूजा कर सकती हैं, ताकि आपके जीवन में सुखों का आगमन हो सके और जीवन की परेशानियों का हल जल्द से जल्द निकल सके।

मां स्कंदमाता की पूजा विधि (Maa Skandmata Puja Vidhi 2026)

  • नवरात्रि के पांचवें दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्रधारण करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और व्रत का संकल्प लें।
  • सबसे पहले कलश और उसमें विराजमान देवी-देवताओं का पूजन करें।
  • इसके बाद मां स्कंदमाता का चित्र को चौकी पर स्थापित करें।
  • माता को जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक कराएं।
  • उन्हें कुमकुम, अक्षत, सिंदूर और पीले फूल अर्पित करें।
  • मां को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
  • मां स्कंदमाता को केले का भोग अत्यंत प्रिय है।
  • आप उन्हें केसर वाली खीर या कोई भी पीली मिठाई अर्पित कर सकते हैं।
  • धूप-दीप दिखाकर माता की आरती करें और अंत में अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

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मां स्कंदमाता के शक्तिशाली मंत्र (Maa Skandmata Puja Mantra)

मां की उपासना के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जाप 108 बार करना फलदायी माना जाता है।

  • सिद्ध मंत्र सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥ इसका अर्थ है जो देवी हमेशा सिंह पर सवार रहती हैं और अपने दोनों हाथों में कमल का पुष्प धारण करती हैं, वे यशस्विनी मां स्कंदमाता मेरे लिए सदैव शुभकारी और मंगलकारी हों।
  • स्तुति मंत्र या देवी सर्वभूतेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ इसका अर्थ है हे देवी! आप सभी प्राणियों में मां स्कंदमाता के रूप में विराजमान हैं। आपको मेरा बारंबार नमस्कार है, प्रणाम है।
  • बीज मंत्र ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नमः॥ इसका अर्थ है। इस बीज मंत्र का जाप माता की दिव्य शक्ति और उनकी सुरक्षात्मक ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

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मां स्कंदमाता की पूजा का महत्व

  • जिन दंपत्तियों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है, उनके लिए स्कंदमाता की पूजा रामबाण मानी जाती है।
  • कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के नाते, वे भक्तों को विवेक और ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं।
  • जो भक्त प्रेम भाव से उनकी पूजा करते हैं, उनके लिए मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं।

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मां स्कंदमाता की पूजा करने से आपके जीवन के कई सारे नए रास्ते खुल जाते हैं। बस आपको इनके मंत्रों का उच्चारण और पूजा विधि का खास ध्यान रखना होगा।

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