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Navratri Day 4 Puja Vidhi & Mantra 2026: नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कुष्मांडा का पूजन, यहां जानें पूजा विधि और मंत्र

Maa Kushmanda Puja Vidhi & Mantra 2026: नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा होती है। आप भी इनके पूजन को सही विधि-विधान और मंत्रों के साथ पूरा कर सकती हैं। इसके लिए विस्तार से आप आर्टिकल को पढ़ें और सभी चीजों को जानें।
Editorial
Updated:- 2026-03-22, 06:10 IST

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की उपासना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि मां ने सृष्टी का रचना की थी। ऐसे में अगर आप भी जीवन में सुख-समृद्धि चाहती हैं, तो सही पूजा विधि और नियम से मां कुष्मांडा की पूजा करें, ताकि आपके ऊपर भी मां का आशीर्वाद बना रहे और आपको भी लंबी आयु और यश प्राप्त हो। आइए सही पूजा विधि और मंत्रों के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

मां कुष्मांडा पूजा विधि (Maa Kushmanda Puja Vidhi 2026)

  • नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • इसके बाद नए वस्त्रों को धारण करें, ताकि आप पूरी तरह से पवित्र हो जाएं।
  • फिर आपको सबसे पहले कलश और उसमें उपस्थित सभी देवी देवताओं की पूजा करें।
  • मां कुष्मांडा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख हाथ जोड़कर उनका ध्यान करें।
  • माता को हरे रंग के वस्त्र या चुनरी अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • इन्हें लाल या पीले पुष्प, विशेषकर गुड़हल या गुलाब अर्पित करें।
  • माता को सिंदूर, काजल, चूड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं।
  • मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग अत्यंत प्रिय है।
  • इसके अलावा आप सफेद पेठे या हलवे का भोग भी लगा सकते हैं।
  • अंत में मां की आरती करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
  • इससे आपकी पूजा पूरी होगी।

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मां कुष्मांडा की पूजा में इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण (Maa Kushmanda Puja Mantra 2026)

  • ध्यान मंत्र: वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्। सिंहारूढ़ा अष्टभुजा कुष्माण्डा यशस्वनीम्॥ इसका अर्थ है मैं मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए उन मां कुष्मांडा की वंदना करती हूं, जिनके मस्तक पर आधे चंद्रमा का मुकुट है, जो सिंह पर सवार हैं और जिनकी आठ भुजाएं हैं।
  • स्तुति मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ इसका अर्थ है हे देवी, जो समस्त प्राणियों में मां कुष्मांडा के रूप में स्थित हैं, उनको मेरा बारंबार नमस्कार है।

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पूजा का महत्व और लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कुष्मांडा सूर्य ग्रह को दिशा-निर्देश देती हैं। अतः इनकी पूजा करने से कुंडली में सूर्य के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। यदि आपको मान-सम्मान में कमी महसूस हो रही है या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएंहैं, तो चौथे दिन का व्रत और पूजन आपके लिए रामबाण सिद्ध हो सकता है।

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मां कुष्मांडा की भक्ति व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। इस चैत्र नवरात्रि में माता की उपासना कर अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।

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