
चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की उपासना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि मां ने सृष्टी का रचना की थी। ऐसे में अगर आप भी जीवन में सुख-समृद्धि चाहती हैं, तो सही पूजा विधि और नियम से मां कुष्मांडा की पूजा करें, ताकि आपके ऊपर भी मां का आशीर्वाद बना रहे और आपको भी लंबी आयु और यश प्राप्त हो। आइए सही पूजा विधि और मंत्रों के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कुष्मांडा सूर्य ग्रह को दिशा-निर्देश देती हैं। अतः इनकी पूजा करने से कुंडली में सूर्य के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। यदि आपको मान-सम्मान में कमी महसूस हो रही है या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएंहैं, तो चौथे दिन का व्रत और पूजन आपके लिए रामबाण सिद्ध हो सकता है।
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मां कुष्मांडा की भक्ति व्यक्ति को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है। इस चैत्र नवरात्रि में माता की उपासना कर अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें।
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