
आज रविवार, 22 मार्च 2026 का दिन बहुत ही पवित्र और खास है। आज शक्ति की देवी माँ दुर्गा के पावन पर्व चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। इसके साथ ही आज विनायकी चतुर्थी का भी बहुत शुभ दिन है, जिससे विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की भी विशेष कृपा हमें मिलेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज पवित्र चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 09:19 बजे तक रहेगी। नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की सच्चे मन से पूजा की जाती है। मान्यता है कि माँ कूष्मांडा ने अपनी हल्की सी मुस्कान से ही इस पूरी सृष्टि की रचना की थी। आज रात 10:43 बजे तक भरणी नक्षत्र रहेगा और उसके बाद कृत्तिका नक्षत्र लग जाएगा। इसके साथ ही, आज दोपहर 03:40 बजे तक वैधृति योग रहेगा, जिसके बाद विषकुम्भ योग शुरू हो जाएगा। रविवार के दिन नवरात्रि का चौथा दिन होना, जीवन से हर तरह का अंधेरा और डर दूर करके नया आत्मविश्वास जगाने के लिए बहुत ही चमत्कारिक संयोग है। आइए, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी से आज के इस खास पंचांग की पूरी जानकारी, शुभ-अशुभ समय और जीवन की हर परेशानी को दूर करने के बेहद आसान और कुछ नए घरेलू उपाय विस्तार से जानते हैं।
आज चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्मांडा को समर्पित है। माता कूष्मांडा की पूजा करने से चेहरे पर चमक, जीवन में शांति और लंबी उम्र मिलती है। जिन लोगों को अक्सर पेट की बीमारी या स्वास्थ्य से जुड़ी कोई परेशानी रहती है, उन्हें आज माता की पूजा जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही आज विनायकी चतुर्थी भी है, जिसका मतलब है कि नवरात्रि की पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश जी का ध्यान करने से आपके सारे रुके हुए काम आने वाले दिनों में बहुत आसानी से पूरे हो जाएंगे। रविवार सूर्य देव का दिन है, इसलिए आज की गई पूजा आपके मन से सारी निराशा दूर करके एक नई ऊर्जा भर देगी।
रविवार को भरणी नक्षत्र और वैधृति योग का खास संयोग
आज दोपहर 03:40 बजे तक वैधृति योग रहेगा और रात 10:43 बजे तक भरणी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। वैधृति योग में हमें यह सीखने को मिलता है कि हमें अपने कामों में धैर्य रखना चाहिए और किसी भी तरह के गुस्से या फालतू बहस से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। अगर आप शांति से आज के दिन माता का स्मरण करेंगे, तो घर के सारे क्लेश मिट जाएंगे। वहीं, भरणी नक्षत्र का प्रतीक नियम और अनुशासन है। यह संयोग हमें यह सिखाता है कि अगर हम सच्चाई के रास्ते पर चलें और अपने जीवन में अच्छे नियम बनाएं, तो सफलता पक्की है।
| तिथि | नक्षत्र | दिन/वार | योग | करण |
| चतुर्थी (रात 09:19 बजे तक) | भरणी | रविवार | वैधृति | बव |
| प्रहर | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06 बजकर 13 मिनट पर होगा। |
| सूर्यास्त | शाम 06 बजकर 21 मिनट पर होगा। |
| चंद्रोदय | सुबह 08 बजकर 09 मिनट पर होगा। |
| चंद्रास्त | रात 09 बजकर 56 मिनट पर होगा। |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) | सुबह 04 बजकर 32 मिनट से 05 बजकर 20 मिनट तक |
| अभिजीत मुहूर्त (सूर्य पूजन का शुभ समय) | सुबह 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 18 मिनट तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06 बजकर 38 मिनट से 07 बजकर 02 मिनट तक |
| मुहूर्त नाम | मुहूर्त समय |
| राहु काल | शाम 04 बजकर 52 मिनट से 06 बजकर 23 मिनट तक। |
| यमगंड | दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 01 बजकर 49 मिनट तक। |
| गुलिक काल | दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से 04 बजकर 52 मिनट तक। |
रविवार को राहु काल शाम के समय होता है। इस दौरान किसी भी तरह की नई खरीदारी, जरूरी यात्रा की शुरुआत, या बड़े पैसों के लेन-देन से पूरी तरह बचना चाहिए।
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