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Basoda Ashtami Stotra: बसोड़ा के दिन जरूर करें इस चमत्कारी स्तोत्र का जाप, संतान के जीवन में कभी नहीं आएगी कोई परेशानी

हिंदू धर्म में बसोड़ा को शीतला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। अब ऐसे में इस दिन शीतला माता के स्तोत्र का जाप करने का विशेष महत्व है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं। 
Editorial
Updated:- 2025-03-19, 11:56 IST

हिंदू धर्म में बसोड़ा अष्टमी व्रत का बहुत महत्व है। यह व्रत शीतला माता को समर्पित है, जिन्हें रोगों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है। इस दिन, भक्त बासी भोजन का भोग लगाकर माता शीतला की पूजा करते हैं। शीतला माता को स्वच्छता और ठंडक की देवी माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर स्वस्थ रहता है। आपको बता दें, बसोड़ा अष्टमी के दिन ताजा भोजन नहीं बनाया जाता है, इसलिए सप्तमी के दिन ही भोजन तैयार कर लिया जाता है। अब ऐसे में इस दिन मां शीतला का स्तोत्र का जाप करने का विशेष महत्व है। आइए इस लेख में ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद त्रिपाठी से विस्तार से जानते हैं।

बसोड़ा अष्टमी के दिन करें मां शीतला के स्तोत्र का पाठ

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ऊं ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः
॥ ईश्वर उवाच॥
वन्दे अहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम् ।
मार्जनी कलशोपेतां शूर्पालं कृत मस्तकाम् ॥
वन्देअहं शीतलां देवीं सर्व रोग भयापहाम् ।
यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटक भयं महत् ॥
शीतले शीतले चेति यो ब्रूयाद्दारपीड़ितः ।
विस्फोटकभयं घोरं क्षिप्रं तस्य प्रणश्यति॥
यस्त्वामुदक मध्ये तु धृत्वा पूजयते नरः ।
विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते॥
शीतले ज्वर दग्धस्य पूतिगन्धयुतस्य च ।
प्रनष्टचक्षुषः पुसस्त्वामाहुर्जीवनौषधम् ॥
शीतले तनुजां रोगानृणां हरसि दुस्त्यजान् ।
विस्फोटक विदीर्णानां त्वमेका अमृत वर्षिणी॥
गलगंडग्रहा रोगा ये चान्ये दारुणा नृणाम् ।
त्वदनु ध्यान मात्रेण शीतले यान्ति संक्षयम् ॥
न मन्त्रा नौषधं तस्य पापरोगस्य विद्यते ।
त्वामेकां शीतले धात्रीं नान्यां पश्यामि देवताम् ॥
॥ फल-श्रुति ॥
मृणालतन्तु सद्दशीं नाभिहृन्मध्य संस्थिताम् ।
यस्त्वां संचिन्तये द्देवि तस्य मृत्युर्न जायते ॥
अष्टकं शीतला देव्या यो नरः प्रपठेत्सदा ।
विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते ॥
श्रोतव्यं पठितव्यं च श्रद्धा भक्ति समन्वितैः ।
उपसर्ग विनाशाय परं स्वस्त्ययनं महत् ॥
शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः ॥
रासभो गर्दभश्चैव खरो वैशाख नन्दनः ।
शीतला वाहनश्चैव दूर्वाकन्दनिकृन्तनः ॥
एतानि खर नामानि शीतलाग्रे तु यः पठेत् ।
तस्य गेहे शिशूनां च शीतला रूङ् न जायते ॥
शीतला अष्टकमेवेदं न देयं यस्य कस्यचित् ।
दातव्यं च सदा तस्मै श्रद्धा भक्ति युताय वै ॥

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मां शीतला के स्तोत्र का पाठ करने का महत्व

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ऐसी मान्यता है कि मां शीतला की आराधना करने से रोगों का नाश होता है। स्कंद पुराण में मां शीतला को चेचक, खसरा और हैजा जैसी बीमारियों से बचाने वाली देवी कहा गया है। शीतलाष्टक स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मां शीतला जल्दी प्रसन्न होती हैं और आशीर्वाद देती हैं। शीतला माता को आरोग्य प्रदान करने वाली देव के रूप में माना जाता है, ऐसा माना जाता है कि मां शीतला जिस पर अपनी कृपा बरसाती हैं, उनके सभी रोग दूर कर देती है।

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Image Credit- HerZindagi

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