
हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी के दिन बासोड़ा मनाया जाता है। इस दिन बासी खाने का प्रसाद चढ़ता है और वही प्रसाद खाया भी जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता है। इस वर्ष बसोड़ा कब मनाया जाएगा और इसकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, यह जानने के लिए हमने पंडित सौरभ त्रिपाठी से बातचीत की। वह कहते हैं, "कई जगहों पर इस पर्व को बसोड़ा, बासोड़ा या शीतला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। खासतौर पर उत्तर भारत के कई राज्यों में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और माता शीतला की पूजा करती हैं। पूजा में बासी भोजन जैसे पूरी, पकौड़ी, मीठे चावल, गुड़ और अन्य पकवान चढ़ाए जाते हैं।"
इस बार बसोड़ा को लेकर लोगों के बीच थोड़ा भ्रम बना हुआ है कि यह पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा या 12 मार्च को। ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ त्रिपाठी के अनुसार, वर्ष 2026 में अष्टमी तिथि 11 मार्च को पड़ रही है और अधिकतर स्थानों पर इसी दिन बसोड़ा मनाया जाएगा। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में परंपरा के अनुसार लोग सप्तमी तिथि को भी यह पर्व मनाते हैं। ऐसे में जो लोग सप्तमी के दिन बसोड़ा मनाते हैं, वे 10 मार्च को इस पर्व का पालन करेंगे।
बसोड़ा के दिन माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन भक्तजन माता से परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि माता शीतला की कृपा से चेचक, बुखार और अन्य बीमारियों से रक्षा होती है। यही कारण है कि इस दिन ठंडे या बासी भोजन का भोग लगाकर माता को प्रसन्न किया जाता है।

अष्टमी तिथि 11 मार्च की रात 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 मार्च की सुबह 4 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस दिन पूजा करने का सबसे अच्छा समय सुबह का माना गया है। बसोड़ा की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
इस दिन महिलाएं अपने घर के मंदिर या शीतला माता के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना करती हैं। पूजा में जल, फूल, हल्दी, रोली और बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद पूरे परिवार के लोग वही प्रसाद ग्रहण करते हैं। माना जाता है कि इस परंपरा का पालन करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार के सदस्यों को रोगों से सुरक्षा मिलती है।
इस तरह बसोड़ा केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और परंपराओं से जुड़ा एक खास त्योहार भी है। इसलिए यदि आप भी माता शीतला की कृपा पाना चाहते हैं, तो इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा जरूर करें। यह जानकारी आपको पसंद आई हो तो इस लेख को शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल्स पढ़ने के लिए जुड़ी रहें, हरजिंदगी से।
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