
शीतला अष्टमी का पर्व हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है और इस दिन शीतला माता का पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगाने से समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है और संतान को अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिलता है। यह पर्व होली के आठवें दिन मनाया जाता है और इसका धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है। इस साल शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी और इस दिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस पर्व को कई स्थानों पर बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन ताजा भोजन न तो करना चाहिए और न ही इसका भोग लगाना चाहिए। आइए ज्योतिर्विद पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी से जानें शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला को बासी भोजन क्यों चढ़ाया जाता है और इस दिन चूल्हा जलाना वर्जित क्यों होता है। साथ ही, शीतला अष्टमी की पूजा विधि के बारे में भी जानें।

शीतला अष्टमी हिंदू पंचांग के चैत्र महीने में पड़ती है और ऐसा माना जाता है कि इसी दिन से गर्मी के मौसम की शुरुआत भी हो जाती है। गर्मी के मौसम में कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है जैसे चेचक, खसरा और कई तरह के अन्य संक्रमण इस दौरान बढ़ जाते हैं। शीतला माता को ऐसी देवी के रूप में पूजा जाता है जो अपने भक्तों की सेहत को अच्छा बनाए रखती हैं और बीमारियों से बचाती हैं। ऐसा माना जाता है कि शीतला माता को बासी और ठंडा भोजन ही अत्यंत प्रिय है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता शीतला पृथ्वी भ्रमण पर ये देखने के लिए निकलीं कि उनकी पूजा कौन करता है। उसी समय गांव में किसी ने उनके ऊपर उबलते चावल का माड़ डाल दिया जिससे उनके शरीर पर छाले निकल आए। उस समय गांव की एक कुम्हारिन ने उनकी मदद की और शीतला माता को ठंडा पानी, दही और ठंडा भोजन कराया जिससे उनके छाले ठीक हो गए। उसी समय से माता को बासी भोजन चढ़ाया जाने लगा।
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माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। पुराने समय में जब चेचक जैसी बीमारियां फैलती थीं, तब लोग माता शीतला की पूजा करते थे और वो रोगों से उपचार के लिए ढाल का काम करती थीं। प्राचीन काल से ही मान्यता है कि माता शीतला को ठंडा या बासी भोजन बहुत प्रिय होता है। इसके साथ ही इस दिन चूल्हा या कोई भी अग्नि वाली वास्तु जलाने से मना किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन चूल्हा जलाने और गर्म भोजन बनाने से माता नाराज हो जाती हैं और परिवार में समस्याएं आने लगती हैं। इसी वजह से सप्तमी तिथि के दिन बनाया गया पुआ, दही, चना और अन्य भोजन माता शीतला को चढ़ाया जाता है और घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है।

यदि आप शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला का पूजन करती हैं तो आपको यहां बताई पूजा विधि को ध्यान में जरूर रखना चाहिए। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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