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Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी के दिन क्यों खाया जाता है ठंडा खाना? यहां जानें वजह

हिंदू धर्म में त्योहारों का मतलब पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि ऋतुओं के बदलने से भी होता है। इसलिए हर मौसम में कोई खास तिथि या त्योहार पड़ता है, जिसे हर जगह अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। शीतला अष्टमी होली के बाद आती है। आइए इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
Editorial
Updated:- 2026-03-06, 18:14 IST

हिंदू धर्म में त्योहारों का संबंध केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि ऋतुओं के बदलाव से भी होता है। इसलिए हर त्योहार का महत्व भी अलग होता है। शीतला अष्टमी का त्योहार गर्मी के शुरूआत के समय आता है, जिसे उत्तर भारत के कई हिस्सों में बासोड़ा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार होली के आठवें दिन, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और लोग एक दिन पहले बना हुआ बासी या ठंडा खाना बनाकर इसे खाते हैं। आइए पंडित जन्मेश द्विवेदी से जानते हैं कि इस अनूठी परंपरा के पीछे क्या कारण हैं।

शीतला माता की पूजा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता को चेचक, खसरा और अन्य ताप वाली बीमारियों की की देवी कही जाती है। उनके एक हाथ में झाड़ू है जो सफाई का प्रतीक है और दूसरे हाथ में शीतल जल का कलश है। माता का स्वरूप हमें स्वच्छता और शांति का संदेश देता है। मान्यता है कि इस दिन चूल्हा जलाने से घर में ताप बढ़ती है, जो माता को रुष्ट कर सकती है। इसलिए माता को ठंडा खाना बनाकर इसका प्रसाद चढ़ाया जाता है।

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शीतला अष्टमी के दिन क्यों खाया जाता है ठंडा खाना?

शीतला अष्टमी के दिन बासोड़ा शब्द का अर्थ ही बासी से होता है। सप्तमी की रात को ही मीठे चावल, राबड़ी, पूड़ी, और चने की दाल जैसी चीजें बनती हैं। माना जाता है कि माता शीतला को अग्नि या गर्म चीजें पसंद नहीं हैं। उनके प्रकोप से बचने और शरीर को शीतल रखने के लिए ही ठंडे भोजन को तैयार किया जाता है।
यह परंपरा हमें यह भी सिखाती है कि हम अपनी जीभ के स्वाद पर नियंत्रण रखें और सादगी से त्योहार मनाएं।

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शीतला अष्टमी पर क्या न करें?

  • इस दिन घर में ताजा भोजन न बनाएं और न ही गरम करें।
  • चूल्हा, ओवन या हीटर का प्रयोग करने से बचें।
  • इस दिन सिर धोना या सिलाई-बुनाई जैसे कार्य भी कई क्षेत्रों में वर्जित माने जाते हैं।

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शीतला अष्टमी का यह ठंडा भोजन हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने की प्रेरणा देता है। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि बदलते मौसम में खान-पान और स्वच्छता का ध्यान रखना कितना अनिवार्य है।

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Image credit-Freepik/ Herzindagi

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