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हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का त्योहार न केवल पूजा-पाठ के लिए होता है। इसे शुद्धि का प्रतीक भी मानते हैं। इस दिन बच्चों की लंबी आयु और उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए पूजा पाठ की जाती है। माताएं अपने बच्चों को शीतला माता की पूजा करने के बाद बच्चों को हल्दी का टीका लगाती हैं, लेकिन शीतला माता की पूजा में रोली का प्रयोग वर्जित क्यों माना जाता है? और बच्चों को विशेष रूप से हल्दी का तिलक क्यों लगाया जाता है? आइए, पंडित जन्मेश द्विवेदी से इसके पीछे क्या आध्यात्मिक कारण है?
पंडित जी के अनुसार, रोली को पूजा कमें गर्म प्रकृति का माना जाता है। इसलिए हल्दी का इस्तेमाल बच्चों के लिए किया जाता है। माता खुद शीतल की देवी होती हैं। इसलिए उनकी पूजा में किसी भी गर्म चीजों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। साथ ही हल्दी रोगों में ज्यादा इस्तेमाल की जाती है। इसलिए भी इसे लगाया जाता है, ताकि अगर आपके शरीर पर दाने या चेचक हो जाएं, तो इसे लगाने से ठीक हो जाए। इसलिए आपको इसे लगाना चाहिए।

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हल्दी का यह छोटा सा तिलक केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों के उस ज्ञान का हिस्सा है जो धर्म और स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ता है। इस शीतला अष्टमी, अपने बच्चों को हल्दी का तिलक लगाकर माता शीतला से उनके आरोग्य और सुखद भविष्य की कामना करें।
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