
फैशन की दुनिया में जब भी कोई मॉडल स्टेज या रैंप पर चलती है तो उस चाल को 'कैटवॉक' (Cat Walk) कहा जाता है। यह शब्द सुनकर अक्सर मन में सवाल आता है कि आखिर इसे बिल्लियों से ही क्यों जोड़ा गया? कुत्तों या किसी और जानवर के नाम पर यह क्यों नहीं पड़ा? दरअसल, मॉडलिंग की इस खास शैली में चलने का तरीका बहुत ही नपा-तुला और सधा हुआ होता है। एक मॉडल को बहुत ही पतले रास्ते पर अपनी लय और संतुलन बनाए रखते हुए चलना पड़ता है। यह पूरी प्रक्रिया किसी साधारण चलने के तरीके से अलग है और इसका सीधा संबंध प्रकृति में बिल्लियों के चलने के अंदाज से है। आइये आपको और भी आसान तरीके से समझाते हैं।
बिल्लियों की सबसे बड़ी खासियत उनका संतुलन है। जब एक बिल्ली चलती है तो वह अपने पिछले पैर को बिल्कुल उसी जगह रखती है जहां उसने अपना अगला पैर रखा था। इस वजह से उसके पैरों के निशान एक सीधी रेखा में बनते हैं। रैंप पर चलते समय मॉडल्स भी इसी तकनीक का पालन करती हैं। वे अपने पैरों को एक-दूसरे के सामने यानी क्रॉस-स्टेप रखती हैं ताकि वे एक सीधी और पतली रेखा पर चल सकें।

बिल्लियों के चलने के तरीके में उनके कंधे और कूल्हे एक खास लय में हिलते हैं जो देखने में बहुत ही ग्रेसफुल लगता है। जब मॉडल्स रैंप पर चलती हैं तो वे एक पैर को दूसरे के आगे रखकर चलती हैं जिससे उनके कूल्हों में एक नेचुरल मूवमेंट या 'स्विंग' आता है। यह स्टाइल कपड़ों की फिटिंग और उनके फॉल को दिखाने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। कुत्तों की बनावट ऐसी होती है कि वे चलते समय अपने कूल्हों को इस तरह नहीं हिला सकते।
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बिल्लियां अपनी चाल में बहुत ही शांत, सतर्क और आत्मविश्वासी दिखती हैं। उनकी चाल में एक तरह का 'एटीट्यूड' और 'शान' होती है। फैशन जगत में भी मॉडल से यही उम्मीद की जाती है कि वह बिना विचलित हुए आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराए। 'डॉग वॉक' शब्द सुनने में थोड़ा उछल-कूद वाला या अव्यवस्थित लगता है जबकि कैटवॉक में एक तरह की गरिमा और ठहराव होता है।
बिल्लियां बहुत ही पतली दीवारों, बाड़ या संकरी जगहों पर आसानी से चल लेती हैं। फैशन शो का रैंप भी बहुत चौड़ा नहीं होता। उस सीमित जगह पर बिना लड़खड़ाए और बिना नीचे देखे चलना एक कला है। चूंकि बिल्लियां संकरे रास्तों की मास्टर होती हैं, इसलिए उनकी इस खूबी को मॉडलिंग जगत ने अपना लिया और इस चाल का नाम 'कैटवॉक' रख दिया।
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कुत्तों के चलने का तरीका बहुत अलग होता है। वे अक्सर तेजी से इधर-उधर देखते हुए और थोड़े भारी कदमों के साथ चलते हैं। उनके पैरों के बीच फासला अधिक होता है जिससे वे 'सीधी रेखा' वाली चाल नहीं चल पाते। फैशन की दुनिया में जिस नजाकत और स्टाइल की जरूरत होती है वह कुत्तों की चाल से मेल नहीं खाती। इसलिए इसे 'डॉग वॉक' कहना कभी भी प्रासंगिक नहीं लगा।
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