
हर साल जनवरी आते ही बजट (Union Budget 2026) की चर्चा तेज हो जाती है। हर साल एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) बजट पेश करती हैं। जब भी बजट पेश किया जाता है तो उसके पहले कई तरह के काम किए जाते हैं। केंद्रीय बजट से पहले एक खास परंपरा निभाई जाती है। इसे हलवा सेरेमनी कहा जाता है। वहीं लॉक-इन पीरियड का भी खास महत्व होता है।
कई लोगों के मन में ये सवाल आता है कि आखिर बजट बनाता कौन है, हलवा सेरेमनी और लॉक-इन पीरियड क्या होता है? अगर आप भी उन्हीं में से एक हैं तो हम आपको अपने इस लेख में बजट से जुड़ी हर एक जानकारी विस्तार से देंगे। आइए जानते हैं-

भारत का बजट वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) का एक खास विभाग बनाता है, जिसे आर्थिक मामलों का विभाग कहते हैं। इस विभाग का काम बजट तैयार करना ही होता है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि ये विभाग अकेले ही काम करता है। बजट बनाने के लिए कई और लोगों की मदद ली जाती है। इनमें ये शामिल हैं-
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इन सब जानकारियों को आपस में जोड़कर और सोच-समझकर पूरे देश का बजट तैयार किया जाता है।
बजट बनाने की तैयारी सितंबर या अक्टूबर के आसपास शुरू कर दी जाती है। वित्त मंत्रालय सभी मंत्रालयों और विभागों से पूछता है कि अगले साल उन्हें कितना पैसा चाहिए और कहां खर्च होगा। इन्हीं जानकारियों के आधार पर बजट का ढांचा तैयार किया जाता है।
सभी सुझाव आने के बाद वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) उनकी जांच करता है। इसके बाद वित्त मंत्री की देखरेख में अलग-अलग सेक्टर के लोगों से बातचीत होती है। इसमें किसान संगठनों, बिजनेस सेक्टर, बैंकों और यहां तक कि अर्थशास्त्रियों की राय भी ली जाती है, ताकि बजट आम लोगों की जरूरत के हिसाब से बनाया जा सके।

बजट से पहले एक खास परंपरा निभाई जाती है, जिसे हलवा सेरेमनी (Halwa Ceremony) कहते हैं। ये नॉर्थ ब्लॉक में होती है। बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्री इसे बजट टीम के साथ बांटती हैं। इसे बजट की छपाई शुरू होने का संकेत माना जाता है। साथ ही ये महीनों की मेहनत करने वाले अधिकारियों के लिए सम्मान का प्रतीक भी होता है। आपको ये सिर्फ एक रस्म लग सकती है, लेकिन बजट बनाने की प्रक्रिया में इसका खास महत्व होता है।
हलवा सेरेमनी के बाद ही लॉक-इन पीरियड (Lock-In Period in Union Budget) शुरू होता है। इस दौरान बजट बनाने और छापने से जुड़े अधिकारी नॉर्थ ब्लॉक परिसर में ही रहते हैं। उन्हें किसी भी बाहरी लोगों से मिलने की अनुमति नहीं होती है और न ही बात करना होता है। इसका मकसद सिर्फ जानकारी को लीक होने से बचाना होता है।
अब आपके मन में सवाल आ रहे होंगे कि आखिर बजट पेश कैसे किया जाता है। दरअसल, सारी तैयारी पूरी होने के बाद वित्त मंत्री एक फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करती हैं। संसद की मंजूरी मिलने के बाद ही सरकार खर्च कर सकती है। इसी के साथ नए वित्त वर्ष (Financial Year) की आर्थिक दिशा तय हो जाती है।
कुल मिलाकर भारत का बजट कई महीनों की मेहनत के बाद पेश किया जाता है। इसमें प्राइवेसी और टीम वर्क का नतीजा होता है। यही वजह है कि हलवा सेरेमनी से लेकर लॉक-इन पीरियड तक हर एक का अपना खास महत्व है। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
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