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'फेल हुई तो शादी नहीं होगी...' UP Board की कॉपी में छुपी छात्रा की गुहार, जानें क्यों लड़कियों को पढ़ाई से ज्यादा शादी न होने का डर सताता है?

यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं में छात्राओं की 'पास कर देना, शादी नहीं होगी' जैसी गुहारें समाज के गहरे मनोवैज्ञानिक तनाव को दर्शाती हैं। यह लेख बताता है कि कैसे लड़कियों के लिए शिक्षा ज्ञान का माध्यम न होकर शादी की सीढ़ी बन गई है। 
Editorial
Updated:- 2026-03-23, 16:14 IST

यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं में "गुरुजी पास कर देना, फेल हो गई तो उसकी शादी नहीं हो पाएगी।" जैसी गुहारें केवल एक छात्र की निराशा नहीं, बल्कि हमारे समाज के एक गहरे psychological distress को दिखाती हैं। जब एक स्टूडेंट मैथ्स के सवालों के बजाय अपनी शादी की दुहाई देती है, तो यह साफ है कि उसके लिए एजुकेशन एक ज्ञान का माध्यम नहीं है बल्कि शादी करने की सीढ़ी है। ऐसे में ये जानना तो बनता है कि आखिर कैसा होता है इन लड़कियों का पारिवारिक माहौल? आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि इस मानसिकता के लिए कौन जिम्मेदार है और पढ़ाई का सीधा संबंध शादी से क्यों है? इसके लिए हमने कोच और हीलर, लाइफ अल्केमिस्ट, साइकोथेरेपिस्ट डॉ. चांदनी तुगनैत (Dr. Chandni Tugnait) से भी बात की है। जानते हैं इस लेख के माध्यम से...

कैसा होता है इन लड़कियों का पारिवारिक माहौल?

  • ऐसी सोच अक्सर उन परिवारों में पैदा होती है जहां लड़कियों की एजुकेशन को एक 'अस्थायी निवेश (Temporary Investment)' माना जाता है। इन परिवारों में पढ़ाई का उद्देश्य लड़की को आत्मनिर्भर बनाना नहीं, बल्कि उसके बायोडाटा की वैल्यू बढ़ाना होता है ताकि एक अच्छा लड़का मिल सके।
  • ऐसे घरों में लड़कियों को पढ़ने की परमिशन इस शर्त पर मिलती है कि वे कभी नाकाम नहीं होंगी। वहीं फेल होने का मतलब है पढ़ाई का अंत और शादी का बोझ।
  • कई परिवारों में आज भी बेटी को पराया धन समझा जाता है। माता-पिता को लगता है कि अगर पढ़ाई में पैसा बर्बाद हुआ और रिजल्ट नहीं आया, तो बेहतर है कि उस पैसे को दहेज के लिए बचा लिया जाए।

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पढ़ाई का सीधा संबंध शादी से क्यों?

  • लड़कियों के लिए परीक्षा का रिजल्ट केवल उनके करियर का फैसला नहीं करता, बल्कि उनके अस्तित्व का फैसला करता है।
  • ज्यादातर लड़कियों को घर में यह अल्टीमेटम दिया जाता है, "यह तुम्हारा आखिरी मौका है, अगर इस बार फेल हुई तो हाथ पीले कर देंगे।"
  • यहां एजुकेशन एक सौदे की तरह है। डिग्री होगी तो पढ़ा-लिखा घर मिलेगा, वरना किसी भी उम्रदराज या कम पढ़े-लिखे व्यक्ति से शादी कर दी जाएगी। इसी डर के कारण छात्राएं कॉपी में अपनी मजबूरी लिखती हैं।

इस मानसिकता के लिए कौन जिम्मेदार है?

  • जब पेरेंट्स पढ़ाई को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं, तो बच्चे के मन में रुचि खत्म होने लगती है और केवल Pass होने का स्ट्रेस रह जाता है।

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  • समाज में आज भी एक सफल महिला से ज्यादा एक विवाहित महिला को सम्मान दिया जाता है। लड़कियों को बचपन से सिखाया जाता है कि उनका अंतिम लक्ष्य घर बसाना ही है।

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  • यह सोच कि लड़की की जिम्मेदारी जल्द से जल्द किसी और को सौंप देनी है, लड़कियों को मानसिक रूप से कमजोर बनाती है। वे खुद को एक बोझ की तरह देखने लगती हैं।

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Images: Freepik/shutterstock

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